नोएडा के परथला चौक पर यातायात का दबाव कम करने के लिए छह लेन का अंडरपास बनाने की योजना सामने आई है। यह अंडरपास परथला सिग्नेचर ब्रिज के नीचे प्रस्तावित है। इसके बनने से नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के बीच आने-जाने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। अभी यह परियोजना योजना के चरण में है और इसकी आधिकारिक शुरुआत की तारीख घोषित नहीं हुई है।
Parthala Chowk Underpass से ट्रैफिक को कैसे मिलेगी राहत?
रिपोर्ट के अनुसार, परथला चौक से हर दिन करीब 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं। सुबह और शाम के व्यस्त समय में यहाँ जाम की समस्या बढ़ जाती है। प्रस्तावित अंडरपास से फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद यानी FNG कॉरिडोर पर चलने वाले वाहन चौराहे के नीचे से निकल सकेंगे। इससे सिग्नल पर रुकने की जरूरत घट सकती है और सफर का समय कम हो सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परियोजना से चौराहे पर यातायात का दबाव 90 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह अनुमान है, इसकी वास्तविक सफलता निर्माण, यातायात प्रबंधन और सड़क के इस्तेमाल पर निर्भर करेगी।
🚧 प्रस्तावित अंडरपास की मुख्य जानकारी
- लेन: कुल छह लेन, दोनों दिशाओं में तीन-तीन
- लंबाई: लगभग 710 मीटर
- मुख्य ढाँचा: करीब 110 मीटर का RCC बॉक्स
- एप्रोच रोड: दोनों ओर लगभग 280-280 मीटर
- जल निकासी: पानी जमा होने से रोकने के लिए नालियाँ और पंप प्रस्तावित
निर्माण में जलभराव से बचाव पर भी ध्यान
प्रस्तावित योजना में पानी निकालने के लिए ड्रेनेज व्यवस्था और संप शामिल होंगे। भारी बारिश के समय अंडरपास में पानी भरने से रोकने के लिए पंप भी लगाए जाने की बात कही गई है। ऐसी व्यवस्था इस तरह की सड़क परियोजनाओं में जरूरी होती है, क्योंकि जलभराव से यातायात बाधित हो सकता है।
किन इलाकों के लोगों को होगा फायदा?
इस परियोजना से नोएडा के सेक्टर 71, 72, 73, 74, 75, 76, 77, 78 और 79 के निवासियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सेक्टर 119, 120, 121 और 122 के साथ-साथ सोरखा गाँव और आसपास के इलाकों के लोगों को भी बेहतर सड़क संपर्क मिल सकता है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर सिटी के आसपास रहने वाले वे लोग भी लाभान्वित हो सकते हैं, जो काम के लिए नोएडा और दिल्ली आते-जाते हैं। छिजारसी से फरीदाबाद या नोएडा के दूसरे हिस्सों की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भी रास्ता आसान मिलने की उम्मीद है। गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार और वसुंधरा के निवासियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से नोएडा और ग्रेटर नोएडा की ओर आने वाले वाहनों के लिए भी अधिक सीधा मार्ग उपलब्ध हो सकता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सड़क परियोजनाओं की अन्य जानकारी के लिए NDTV India की खबरें देखी जा सकती हैं।
🗓️ परियोजना की समय-सीमा
- वर्तमान स्थिति: विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है
- अगला चरण: नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद
- संभावित अवधि: रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण में करीब 18 महीने लग सकते हैं
- शुरुआत की तारीख: अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. परथला चौक पर अंडरपास कहाँ बनाया जाएगा?
प्रस्तावित छह लेन का अंडरपास नोएडा के परथला चौक पर सिग्नेचर ब्रिज के नीचे बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य व्यस्त चौराहे पर वाहनों का दबाव घटाना और FNG कॉरिडोर से गुजरने वाले यातायात को अधिक सुगम रास्ता देना है।
2. अंडरपास कितना लंबा होगा?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अंडरपास की कुल लंबाई लगभग 710 मीटर प्रस्तावित है। इसमें करीब 110 मीटर का RCC बॉक्स ढाँचा और दोनों ओर लगभग 280-280 मीटर की एप्रोच सड़कें शामिल होंगी। अंतिम विवरण परियोजना रिपोर्ट में स्पष्ट होगा।
3. इस अंडरपास से किन शहरों के यात्रियों को फायदा हो सकता है?
नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और मेरठ की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। इसका लाभ खासकर उन लोगों को हो सकता है जो रोजाना काम, पढ़ाई या दूसरे जरूरी कामों के लिए इन इलाकों के बीच सफर करते हैं।
4. क्या अंडरपास बनने से जाम पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
जाम में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। यातायात की मात्रा, आसपास की सड़कों की स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे कई कारक वास्तविक असर तय करेंगे। 90 प्रतिशत तक कमी का आंकड़ा अभी रिपोर्ट में दिया गया अनुमान है।
5. अंडरपास का निर्माण कब शुरू होगा?
अभी निर्माण शुरू होने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होनी है और प्राधिकरण बोर्ड की मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट में निर्माण पूरा होने की संभावित अवधि करीब 18 महीने बताई गई है।
निष्कर्ष
परथला चौक पर प्रस्तावित छह लेन का अंडरपास नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात सुधारने की अहम योजना हो सकती है। इससे रोजाना सफर करने वालों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण की शुरुआत, अंतिम लागत और समय-सीमा की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। परियोजना की स्थिति, डिजाइन और समय-सीमा में बदलाव संभव है। नवीनतम पुष्टि के लिए संबंधित प्राधिकरण की आधिकारिक सूचना देखें।
