Quick Commerce: 7-Eleven बंद, भारत में Convenience Stores पर संकट

भारत में क्विक कॉमर्स यानी कुछ ही मिनटों में घर तक सामान पहुंचाने वाली सेवाओं के बढ़ते चलन से पारंपरिक कन्वीनियंस स्टोर्स के सामने कारोबार बचाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। किराना दुकानों, बड़े सुपरमार्केट और ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स के बीच फंसे इन स्टोर्स को महंगे किराए, कर्मचारियों के खर्च और सीमित जगह जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 30 सितंबर को भारत में बचे 31 Seven-Eleven स्टोर्स बंद होने की खबर ने इस कारोबार के सामने मौजूद मुश्किलों को फिर उजागर किया है।

भारत में 7-Eleven के स्टोर क्यों बंद हुए?

7-Eleven ने 2021 में भारत में प्रवेश किया था और एक समय इसके करीब 60 आउटलेट चल रहे थे। Reliance Retail के साथ फ्रेंचाइजी व्यवस्था खत्म होने के बाद 30 सितंबर को बचे 31 स्टोर भी बंद हो गए। कंपनी की जापानी पैरेंट Seven & i Holdings ने कहा कि वह भारत में लंबे समय तक मौजूद रहने के विकल्प तलाशेगी। इससे पहले Godfrey Phillips India ने अप्रैल 2024 में अपने 24Seven कन्वीनियंस स्टोर कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया था।

कन्वीनियंस स्टोर्स का मुख्य आकर्षण रोजमर्रा की जरूरत का सामान, तुरंत खाने-पीने की चीजें और लंबे समय तक खुले रहने की सुविधा है। लेकिन भारत में मोहल्ले की किराना दुकानें भी आसानी से सामान उपलब्ध कराती हैं, जबकि क्विक कॉमर्स ऐप घर तक डिलीवरी कर देते हैं। ऐसे में ब्रांडेड स्टोर, कर्मचारियों और महंगी व्यावसायिक जगह पर होने वाला खर्च संभालना मुश्किल हो जाता है।

🛒 कन्वीनियंस स्टोर्स के सामने बड़ी चुनौतियां

  • महंगा किराया: व्यावसायिक इलाकों में दुकान चलाने का खर्च ज्यादा
  • स्टाफ का खर्च: लंबे समय तक स्टोर खुला रखने के लिए कर्मचारियों की जरूरत
  • सीमित जगह: सुपरमार्केट के मुकाबले कम उत्पाद रखने की क्षमता
  • ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा: क्विक कॉमर्स से घर बैठे सामान मिलने की सुविधा
  • कम खरीदारी बिल: छोटी खरीदारी से खर्च के मुकाबले कम कमाई की चुनौती

क्विक कॉमर्स से बदल रही है ग्राहकों की आदत

रिटेल सलाहकार Devangshu Dutta के मुताबिक, क्विक कॉमर्स शुरू होने के बाद कन्वीनियंस स्टोर्स पर दबाव बढ़ा है। डिलीवरी ऐप्स रोजमर्रा का सामान कुछ ही मिनटों में ग्राहक के दरवाजे तक पहुंचा देते हैं, इसलिए छोटी खरीदारी के लिए पास की दुकान तक जाने की जरूरत कम हो सकती है। Redseer Strategy Consultants और Google की 7 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, कभी-कभार क्विक कॉमर्स इस्तेमाल करने वाले ग्राहक अपनी महीने भर की किराना खरीदारी का 5% से कम हिस्सा इन सेवाओं से करते हैं, लेकिन रोजाना या तुरंत जरूरत वाले सामान पर यह हिस्सा 15–20% तक है।

कन्वीनियंस स्टोर बड़े सुपरमार्केट और छोटी किराना दुकानों के बीच की जगह में काम करते हैं। सुपरमार्केट ज्यादा सामान और अलग-अलग उत्पादों के विकल्प दे सकते हैं, जबकि किराना दुकानें कम लागत में चलती हैं और स्थानीय ग्राहकों की मांग के अनुसार जल्दी बदलाव कर सकती हैं। छोटे स्टोर में प्रति वर्ग फुट खर्च अधिक हो सकता है, जबकि हर ग्राहक से होने वाली औसत बिक्री कम रहती है।

स्टोर कारोबार को बचाने के लिए कंपनियों की रणनीति

The New Shop की सह-संस्थापक Aastha Alamast के अनुसार, कन्वीनियंस रिटेल में फ्रेंचाइजी मॉडल खर्च को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। कंपनी ने शुरुआत में 60–70 स्टोर खुद चलाए, लेकिन 2022 में फ्रेंचाइजी आधारित विस्तार को प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, इन्वेंट्री और शुरुआती पूंजीगत खर्च सहित एक नया स्टोर स्थापित करने की लागत 20 लाख रुपये से कम है। सामान्य स्टोर 600–800 वर्ग फुट के होते हैं, जबकि बेंगलुरु में कंपनी का फ्लैगशिप स्टोर करीब 2,000 वर्ग फुट का है।

Alamast ने कहा कि लगभग 110 स्टोर खोलने के बाद कंपनी मुनाफे में आई और पिछले तीन वर्षों से लाभ में बनी हुई है। हालांकि, निवेश जुटाना आसान नहीं रहा। कंपनी अपने स्टोर को सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं, बल्कि लोगों के मिलने-जुलने और अन्य सेवाओं का केंद्र बनाने की कोशिश कर रही है। इसके कुछ आउटलेट में कूरियर पिकअप, टिकट बुकिंग और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

दूसरी ओर, AMPM के संस्थापक Shubham Gupta ने फ्रेंचाइजी मॉडल में संचालन नियमों और भुगतान से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया। कंपनी अपने मौजूदा स्टोर्स को खुद के स्वामित्व और संचालन वाले आउटलेट में बदल रही है। Gupta के मुताबिक, AMPM के 12 स्टोर चालू हैं और कुछ अन्य निर्माणाधीन हैं। कंपनी 50–100 स्टोर तक पहुंचने के बाद 10–30 मिनट में स्थानीय डिलीवरी शुरू करने की योजना बना रही है।

💡 स्टोर को अलग पहचान देने के तरीके

  • सही लोकेशन: मेट्रो स्टेशन और व्यस्त रास्तों के पास जरूरत के अनुसार स्टोर
  • उपयोगी सेवाएं: कूरियर, टिकट बुकिंग या ईवी चार्जिंग जैसी सुविधाएं
  • विशेष उत्पाद: ऐसी श्रेणियां जिनमें ग्राहकों को सलाह की जरूरत हो
  • लागत पर नियंत्रण: किराया, स्टाफ और स्टॉक का सही प्रबंधन
  • स्थानीय मांग: इलाके के ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से उत्पाद चुनना

Wellness Forever ने दवाओं और सलाह पर दिया जोर

फार्मेसी चेन Wellness Forever ने सिर्फ सुविधा के बजाय दवाओं और विशेषज्ञ सलाह को अपनी पहचान बनाए रखने का तरीका चुना है। कंपनी के सह-संस्थापक Ashraf Brian के मुताबिक, बिक्री में लगभग 60–65% हिस्सा दवाओं का और 35–40% हिस्सा गैर-दवा उत्पादों का है। उनके अनुसार, एक सामान्य स्टोर में करीब 7,000 तरह के फार्मास्यूटिकल उत्पाद रखे जाते हैं। कंपनी पांच राज्यों में लगभग 500 स्टोर चलाती है और उसके पास 2,000 से अधिक फार्मासिस्ट हैं।

क्विक कॉमर्स से प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनी ने कुछ खाद्य उत्पादों, जैसे ठंडे पेय, आइसक्रीम और तुरंत खाने वाले सामान की रेंज घटाई है। वहीं, स्किनकेयर, विटामिन और पोषण संबंधी उत्पादों पर जोर बढ़ाया गया है, जहां ग्राहक को सही उत्पाद चुनने में सलाह की जरूरत पड़ सकती है। यह रणनीति दिखाती है कि स्टोर को केवल जल्दी सामान बेचने के बजाय ऐसी सेवा देनी होगी जिसे ऑनलाइन डिलीवरी आसानी से नहीं बदल सके।

भारत में नए विदेशी ब्रांड की एंट्री भी होगी

7-Eleven और 24Seven के सामने आई चुनौतियों के बावजूद, जापानी रिटेल ब्रांड Lawson भारत में प्रवेश की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, Lawson 2027 में मुंबई में सीधे संचालित पांच स्टोर खोलने और 2030 तक भारत में करीब 100 आउटलेट तक पहुंचने की योजना बना रहा है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी सही स्थान, उत्पादों की रेंज और संचालन लागत के बीच कितना अच्छा संतुलन बना पाती है।

कन्वीनियंस स्टोर्स के लिए आगे का रास्ता हर जगह एक जैसा नहीं होगा। मेट्रो स्टेशन, दफ्तरों के आसपास या ऐसे स्थान जहां लोग जल्दी में हों, वहां तुरंत खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामान की मांग रह सकती है। लेकिन लंबे समय तक कारोबार चलाने के लिए सही लोकेशन, स्थानीय जरूरतों के अनुसार उत्पाद और खर्च पर नियंत्रण बेहद जरूरी होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. भारत में 7-Eleven के स्टोर क्यों बंद हुए?

रिपोर्ट के अनुसार, Reliance Retail के साथ फ्रेंचाइजी व्यवस्था समाप्त होने के बाद भारत में बचे 31 स्टोर 30 सितंबर को बंद हो गए। कन्वीनियंस स्टोर कारोबार में महंगा किराया, कर्मचारियों का खर्च और क्विक कॉमर्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां भी हैं।

2. क्विक कॉमर्स क्या होता है?

क्विक कॉमर्स ऐसी ऑनलाइन सेवा है जिसमें किराना और रोजमर्रा का सामान कम समय में ग्राहक के घर पहुंचाया जाता है। इससे ग्राहकों को छोटी खरीदारी के लिए दुकान जाने की जरूरत कम पड़ सकती है, खासकर जब उन्हें तुरंत कुछ सामान चाहिए हो।

3. कन्वीनियंस स्टोर और किराना दुकान में क्या अंतर है?

कन्वीनियंस स्टोर आमतौर पर व्यवस्थित ब्रांडेड आउटलेट होता है, जहां रोजमर्रा की चीजें, तुरंत खाने का सामान और लंबे समय तक खुलने की सुविधा मिल सकती है। किराना दुकानें अक्सर स्थानीय स्तर पर चलती हैं और कम लागत के साथ इलाके की मांग के अनुसार काम करती हैं।

4. The New Shop कारोबार चलाने के लिए क्या कर रही है?

The New Shop ने 2022 में फ्रेंचाइजी आधारित मॉडल को प्राथमिकता दी। कंपनी अपने स्टोर में कूरियर पिकअप, टिकट बुकिंग और ईवी चार्जिंग जैसी सेवाएं भी देने की कोशिश कर रही है, ताकि ग्राहक सिर्फ रोजमर्रा की खरीदारी के लिए ही नहीं, अन्य जरूरतों के लिए भी वहां आएं।

5. क्या भारत में कन्वीनियंस स्टोर्स का भविष्य है?

इन स्टोर्स की सफलता उनकी लोकेशन, उत्पादों की रेंज, ग्राहक वर्ग और लागत नियंत्रण पर निर्भर करेगी। मेट्रो स्टेशन और व्यस्त इलाकों में तुरंत इस्तेमाल होने वाले सामान की मांग रह सकती है। लेकिन उन्हें किराना दुकानों और ऑनलाइन डिलीवरी से अलग उपयोगी अनुभव देना होगा।

निष्कर्ष

भारत में क्विक कॉमर्स की बढ़ती लोकप्रियता कन्वीनियंस स्टोर्स के पुराने कारोबार मॉडल को चुनौती दे रही है। भविष्य में वही स्टोर बेहतर टिक पाएंगे जो सही जगह चुनें, खर्च नियंत्रित रखें और ग्राहकों को ऐसी सुविधाएं दें जो केवल तेज डिलीवरी से अलग हों।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। कारोबार से जुड़े आंकड़े और योजनाएं बदल सकती हैं; निर्णय से पहले संबंधित कंपनियों की आधिकारिक जानकारी जांचें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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