राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पहली बार CEO की होगी नियुक्ति

अयोध्या के राम मंदिर का संचालन करने वाला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। ट्रस्ट ने अपने दो प्रमुख पदाधिकारियों महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं और पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का फैसला किया है।

राम मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव, पहली बार नियुक्त होगा CEO

यह बदलाव वर्ष 2020 में ट्रस्ट के गठन के बाद सबसे बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। राम मंदिर के निर्माण के बाद यह देश के सबसे व्यस्त धार्मिक स्थलों में शामिल हो गया है, जहां रोजाना करीब एक लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2019 के अयोध्या फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को किया था। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था।

ट्रस्ट गठन और प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी

राम मंदिर का प्रबंधन तिरुपति, जगन्नाथ या वैष्णो देवी जैसे मंदिरों से अलग है। इन मंदिरों के लिए अलग-अलग कानूनों के तहत बोर्ड बनाए गए हैं, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के फैसले, केंद्र सरकार की योजना, अधिसूचना और ट्रस्ट डीड के आधार पर बनी है।

15 सदस्यीय ट्रस्ट मंदिर का सबसे बड़ा निर्णय लेने वाला निकाय है। इसकी अध्यक्षता महंत नृत्य गोपाल दास करते हैं। हालांकि उम्र और स्वास्थ्य कारणों से रोजमर्रा के कामों की जिम्मेदारी लंबे समय तक महासचिव चंपत राय संभालते रहे।

🛕 राम मंदिर प्रशासन बदलाव की मुख्य बातें

  • नया पद: पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति
  • इस्तीफा: महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार
  • उद्देश्य: मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर और व्यवस्थित बनाना
  • जिम्मेदारी: रोजमर्रा के संचालन को एक अधिकारी के हाथों में देना

CEO संभालेगा मंदिर के रोजमर्रा के काम

अब तक मंदिर के दैनिक संचालन की जिम्मेदारियां अलग-अलग पदाधिकारियों के बीच बांटी गई थीं। प्रशासन, दान प्रबंधन, कर्मचारियों की नियुक्ति और दर्शन व्यवस्था जैसे काम ट्रस्ट के सदस्यों और अधिकारियों द्वारा देखे जाते थे। लेकिन दान से जुड़ी विवादित घटनाओं के बाद इस व्यवस्था की सीमाएं सामने आईं।

CEO की नियुक्ति के बाद उम्मीद है कि मंदिर के रोजमर्रा के कामों की जिम्मेदारी एक पेशेवर अधिकारी संभालेगा, जबकि ट्रस्ट नीति और बड़े फैसलों पर ध्यान देगा। यह मॉडल देश के कई बड़े मंदिरों की व्यवस्था जैसा होगा, जहां मुख्य प्रशासक या कार्यकारी अधिकारी प्रशासन संभालते हैं।

पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन पर जोर

राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक नियमों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। अन्य बड़े मंदिर संस्थानों के नियम और प्रशासनिक ढांचे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट के कई आंतरिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हैं।

✅ CEO नियुक्ति से संभावित फायदे

  • प्रबंधन: मंदिर संचालन में बेहतर व्यवस्था
  • पारदर्शिता: दान और रिकॉर्ड व्यवस्था में सुधार
  • श्रद्धालु सुविधा: बढ़ती भीड़ को संभालने में मदद
  • आधुनिक व्यवस्था: पेशेवर प्रशासनिक मॉडल लागू करना

दान विवाद के बाद ट्रस्ट को अपनी दान प्रक्रिया, रिकॉर्ड व्यवस्था और प्रबंधन प्रणाली को लेकर सफाई देनी पड़ी थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया था।

अब CEO की नियुक्ति का उद्देश्य राम मंदिर प्रशासन को अधिक संगठित, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है, ताकि तेजी से बढ़ते श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

Disclaimer: यह जानकारी समाचार स्रोतों पर आधारित है, आधिकारिक निर्णयों के लिए ट्रस्ट की सूचना देखें।

Gourav Kumar Singh

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