E20 के बाद E25-E30 पेट्रोल पर सरकार क्यों कर रही समीक्षा?

भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना को लेकर सरकार अब धीरे और सोच-समझकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। मौजूदा समय में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने (E20) की व्यवस्था लागू है, लेकिन इससे आगे 25, 27 या 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की दिशा में कदम बढ़ाने से पहले सरकार समीक्षा कर रही है।

E20 के बाद ज्यादा इथेनॉल मिश्रण पर सरकार कर रही समीक्षा

इथेनॉल ब्लेंडिंग को तेजी से लागू किया गया है। साल 2019-20 से 2021-22 के बीच पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की औसत दर 5 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हुई थी। इसके बाद यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई और अप्रैल 2026 से देशभर में बिकने वाले पेट्रोल में E20 मिश्रण अनिवार्य कर दिया गया। यह लक्ष्य पहले 2030 तक हासिल करने की योजना थी, लेकिन इसे तय समय से पहले लागू कर दिया गया।

नीति विशेषज्ञों का मानना है कि 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले कुछ जरूरी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। सबसे बड़ी चिंता वाहन मालिकों की है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से करीब 30-35 प्रतिशत कम होती है। इससे वाहनों का माइलेज कम हो सकता है।

E25 और E30 लागू करने से पहले वाहन सुरक्षा पर ध्यान जरूरी

दूसरी समस्या इथेनॉल की नमी सोखने वाली क्षमता है। इससे लंबे समय में कुछ वाहनों के ईंधन टैंक और धातु के हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है। अप्रैल 2023 के बाद भारत में बिकने वाले नए वाहन E20 ईंधन के अनुकूल बनाए गए हैं, लेकिन इससे पुराने वाहनों के मालिकों को परेशानी हो सकती है।

पुरानी कार और दोपहिया वाहन रखने वाले कई लोगों को शिकायत है कि उन्हें वाहन खरीदते समय इथेनॉल मिश्रित ईंधन से होने वाले संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। इसलिए E25 या E30 जैसे ज्यादा मिश्रण वाले ईंधन को लागू करने से पहले सरकार को लोगों को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

⛽ E20 के बाद इथेनॉल मिश्रण की चुनौतियां

  • माइलेज असर: इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होने के कारण ईंधन दक्षता घट सकती है
  • वाहन सुरक्षा: पुराने वाहनों के कुछ हिस्सों पर लंबे समय में असर की संभावना
  • जरूरत: ज्यादा मिश्रण से पहले ग्राहकों को सही जानकारी देना जरूरी
  • भविष्य: E25 और E30 जैसे विकल्पों पर सरकार समीक्षा कर रही है

ग्राहकों को प्रोत्साहित करने के लिए कीमतों पर विचार

सरकार ग्राहकों को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे कदम भी उठा सकती है, जिससे ज्यादा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की कीमत E20 पेट्रोल से कम हो और लोग इसे अपनाने के लिए तैयार हों।

हालांकि, देश के लिए जैव ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना जरूरी है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल संकट से बचने के लिए वैकल्पिक ईंधन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

इथेनॉल उत्पादन में टिकाऊ विकल्पों की जरूरत

इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर भी ध्यान देने की जरूरत है। पानी की ज्यादा खपत करने वाली फसलों जैसे चावल से इथेनॉल बनाना लंबे समय के लिए सही विकल्प नहीं माना जाता। इसके बजाय ज्वार, बाजरा और अन्य मोटे अनाजों को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिनसे टिकाऊ तरीके से इथेनॉल उत्पादन संभव है।

🌱 इथेनॉल ब्लेंडिंग के फायदे

  • ऊर्जा सुरक्षा: कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद
  • किसानों को लाभ: इथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी
  • पर्यावरण फायदा: जैव ईंधन के उपयोग से प्रदूषण कम करने में मदद
  • भविष्य की दिशा: वैकल्पिक ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

कुल मिलाकर, इथेनॉल मिश्रण को बढ़ाना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना बेहतर होगा ताकि वाहन मालिकों, किसानों और उद्योगों सभी को इसका लाभ मिल सके।

Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है, ईंधन संबंधी निर्णय आधिकारिक जानकारी पर आधारित लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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