RBI Digital Fraud Rules: Online Scam पीड़ितों को 85% तक Compensation का नियम

ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच RBI ने छोटे मूल्य के कुछ धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन के पीड़ितों के लिए मुआवजे का नया ढांचा तय किया है। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी। पात्र मामलों में ग्राहक को हुए शुद्ध नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम ₹25,000, इनमें से जो राशि कम हो, मुआवजे के रूप में मिल सकती है। हालांकि यह सुविधा हर तरह की ऑनलाइन ठगी पर अपने आप लागू नहीं होगी। लेन-देन का प्रकार, नुकसान की सीमा, शिकायत का समय और बैंक की जांच जैसे नियम महत्वपूर्ण होंगे।

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नए RBI नियम की मुख्य बात क्या है?

Economic Times की 30 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, RBI का नया ढांचा छोटे मूल्य के Fraudulent Electronic Banking Transactions यानी धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन के लिए है। इसमें कुल नुकसान ₹50,000 तक होने की शर्त बताई गई है। पात्र ग्राहक को शुद्ध नुकसान का 85 प्रतिशत या ₹25,000, जो भी कम हो, मुआवजा मिल सकता है। शुद्ध नुकसान निकालते समय पहले से वापस मिली रकम को घटाया जाएगा। इसलिए ग्राहक को मिलने वाली राशि हमेशा कुल ठगी की रकम के बराबर नहीं होगी।

इस नियम का उद्देश्य ऐसे ग्राहकों को सीमित राहत देना है जिन्हें धोखाधड़ी के कारण बैंकिंग लेन-देन में नुकसान हुआ है। लेकिन मुआवजा पाने के लिए ग्राहक को निर्धारित समय में बैंक और National Cyber Crime Reporting Portal या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी होगी। रिपोर्ट में पांच कैलेंडर दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कराने की शर्त बताई गई है। इसके अलावा बैंक की जांच में शिकायत वास्तविक और पात्र पाई जानी चाहिए।

नए नियम के जरूरी बिंदु

लागू होने की तारीख: 1 जनवरी 2027

पात्र लेन-देन में सकल नुकसान: ₹50,000 तक

संभावित मुआवजा: शुद्ध नुकसान का 85%

अधिकतम सीमा: ₹25,000

शिकायत: बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल/1930 पर पांच कैलेंडर दिनों के भीतर

किस तरह के डिजिटल लेन-देन शामिल हो सकते हैं?

रिपोर्ट में Electronic Banking Transactions की श्रेणी में Point of Sale यानी POS भुगतान, ATM लेन-देन, सीधे जमा या निकासी, फोन के जरिए शुरू किए गए ट्रांसफर, इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड भुगतान जैसे माध्यमों का उल्लेख किया गया है। इसका अर्थ है कि नियम का दायरा केवल UPI तक सीमित नहीं है। फिर भी किसी खास घटना पर मुआवजा मिलेगा या नहीं, यह RBI के निर्देशों में तय पात्रता और बैंक की जांच पर निर्भर करेगा।

ग्राहक को यह समझना चाहिए कि किसी भी डिजिटल भुगतान विवाद को स्वतः फ्रॉड मुआवजे का मामला नहीं माना जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि ग्राहक ने खुद किसी सामान या सेवा के लिए भुगतान किया और बाद में उसे सामान पसंद नहीं आया, तो वह अलग प्रकार का विवाद हो सकता है। इसी तरह गलत खाते में खुद से पैसा भेजना और किसी धोखेबाज द्वारा अनधिकृत लेन-देन करना अलग स्थितियां हैं। शिकायत में सही तथ्य देना जरूरी है।

85 प्रतिशत मुआवजे की गणना कैसे होगी?

मुआवजा सकल नुकसान पर सीधे 85 प्रतिशत लगाकर तय नहीं होगा। पहले ग्राहक की शिकायत से जुड़ी कुल ठगी की राशि में से पहले से प्राप्त रिकवरी घटाई जाएगी। इसके बाद शेष रकम यानी Net Loss पर 85 प्रतिशत की गणना होगी। लेकिन मुआवजे की अधिकतम सीमा ₹25,000 है। यदि 85 प्रतिशत की रकम ₹25,000 से अधिक आती है, तो अधिकतम सीमा लागू होगी। इस कारण दो अलग-अलग ग्राहकों को समान प्रतिशत के बावजूद अलग राशि मिल सकती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी ग्राहक के खाते से ₹40,000 की धोखाधड़ी हुई और बैंक या अन्य माध्यम से ₹15,000 पहले ही वापस मिल गए, तो शुद्ध नुकसान ₹25,000 होगा। इसका 85 प्रतिशत ₹21,250 है। इस उदाहरण में संभावित मुआवजा ₹21,250 बनता है, बशर्ते बाकी पात्रता शर्तें पूरी हों। यदि शुद्ध नुकसान अधिक हो और 85 प्रतिशत की राशि ₹25,000 से ऊपर चली जाए, तो ₹25,000 की सीमा लागू हो सकती है।

ध्यान रखें

मुआवजे की गणना में पहले की गई रिकवरी घटाई जाती है। शिकायत दर्ज करने में देरी, गलत जानकारी या पात्रता शर्तें पूरी न होने से दावा प्रभावित हो सकता है। धोखाधड़ी का पता चलते ही बैंक और 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करें।

पांच दिन के भीतर शिकायत क्यों जरूरी है?

डिजिटल फ्रॉड में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। धोखाधड़ी की रकम कई खातों में तेजी से भेजी जा सकती है। जल्दी शिकायत करने से बैंक और संबंधित एजेंसियों को लेन-देन की जांच, खाते पर रोक लगाने और उपलब्ध धन को रिकवर करने का प्रयास करने का मौका मिल सकता है। RBI के नए ढांचे में पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की शर्त बताई गई है। ग्राहक को शिकायत का Reference Number और बैंक से मिला acknowledgment सुरक्षित रखना चाहिए।

यदि ग्राहक को SMS, ईमेल या बैंक ऐप में कोई अनजान लेन-देन दिखाई दे, तो उसे तुरंत बैंक के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर या ऐप से रिपोर्ट करना चाहिए। इंटरनेट पर मिले किसी अनजान नंबर पर कॉल न करें। शिकायत दर्ज करते समय OTP, PIN, CVV या पासवर्ड किसी व्यक्ति के साथ साझा न करें। बैंक का कर्मचारी भी इन गोपनीय जानकारियों को मांगकर लेन-देन अधिकृत नहीं कर सकता।

बैंक की गलती होने पर ग्राहक की जिम्मेदारी

RBI के नियमों में बैंक की गलती या लापरवाही से हुए नुकसान के मामलों के लिए ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होने का प्रावधान भी बताया गया है। ऐसी स्थिति में ग्राहक की शिकायत और जांच के आधार पर अनधिकृत लेन-देन को उलटने की प्रक्रिया लागू हो सकती है। हालांकि प्रत्येक मामले के तथ्य महत्वपूर्ण होंगे। ग्राहक को बैंक के साथ सभी संचार, SMS, ईमेल, शिकायत नंबर और लेन-देन का विवरण सुरक्षित रखना चाहिए।

ग्राहक की लापरवाही, तीसरे पक्ष की सुरक्षा चूक या बैंक की गलती जैसे मामलों का आकलन अलग-अलग नियमों के अनुसार किया जा सकता है। इसीलिए ग्राहक को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हर ऑनलाइन धोखाधड़ी में पूरा पैसा वापस मिल जाएगा। मुआवजे की सीमा, पात्रता और रिपोर्टिंग की शर्तें लागू होंगी। किसी विवाद की स्थिति में बैंक के Grievance Redressal Officer और फिर लागू शिकायत निवारण व्यवस्था का उपयोग किया जा सकता है।

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए क्या करें?

डिजिटल भुगतान करते समय केवल आधिकारिक बैंक ऐप और विश्वसनीय वेबसाइट का उपयोग करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें। KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक खाता बंद होने या पुरस्कार मिलने के नाम पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें। UPI PIN केवल भुगतान को अधिकृत करने के लिए दर्ज करें, पैसा प्राप्त करने के लिए PIN डालने की जरूरत नहीं होती। QR Code स्कैन करने से पहले यह समझें कि आप किसे भुगतान कर रहे हैं।

मोबाइल फोन में स्क्रीन लॉक रखें और बैंकिंग ऐप को अपडेट रखें। सार्वजनिक Wi-Fi पर संवेदनशील बैंकिंग काम करने से बचें। किसी भी व्यक्ति को OTP, ATM PIN, CVV या नेट बैंकिंग पासवर्ड न बताएं। यदि SIM अचानक बंद हो जाए या फोन पर संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो मोबाइल ऑपरेटर और बैंक से तुरंत संपर्क करें। बैंक खाते में SMS और ईमेल अलर्ट सक्रिय रखना भी उपयोगी है।

क्या मुआवजा हर ऑनलाइन स्कैम में मिलेगा?

नहीं। नया मुआवजा ढांचा छोटे मूल्य के पात्र Electronic Banking Transactions के लिए है और इसमें ₹50,000 तक के सकल नुकसान की शर्त बताई गई है। किसी भी धोखाधड़ी की घटना को बैंक और संबंधित एजेंसी नियमों के अनुसार जांचेंगे। निवेश धोखाधड़ी, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया पर पैसे भेजने, सामान की डिलीवरी न होने या अन्य विवादों पर अलग नियम लागू हो सकते हैं। ग्राहक को अपने मामले की श्रेणी और लागू दिशा-निर्देशों की पुष्टि करनी चाहिए।

यह भी महत्वपूर्ण है कि मुआवजे की सुविधा एक निर्धारित सीमा तक है। इसे बैंकिंग सुरक्षा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। ग्राहक को सतर्क रहना होगा और अनजान कॉल या लिंक से बचना होगा। डिजिटल लेन-देन में सावधानी ही सबसे पहला सुरक्षा उपाय है।

नए नियम कब से लागू होंगे?

रिपोर्ट के अनुसार, ये निर्देश 1 जनवरी 2027 से किए गए पात्र इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन पर लागू होंगे। इसका मतलब है कि नियम लागू होने से पहले हुए लेन-देन पर वही व्यवस्था लागू होगी या नहीं, यह संबंधित RBI निर्देशों की प्रभावी तारीख और शर्तों से तय होगा। ग्राहक को किसी पुराने मामले के लिए नई व्यवस्था को स्वतः लागू नहीं मानना चाहिए।

बैंक अपने ग्राहकों को शिकायत दर्ज कराने के तरीके, आधिकारिक संपर्क माध्यम और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देंगे। ग्राहक को अपने बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा निर्देश पढ़ने चाहिए। यदि कोई एजेंट मुआवजा दिलाने के नाम पर अग्रिम फीस या OTP मांगता है, तो सतर्क रहें। मुआवजे के नाम पर दूसरी ठगी भी हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. RBI का नया Digital Fraud Compensation Rule कब लागू होगा?

रिपोर्ट के अनुसार नया ढांचा 1 जनवरी 2027 से पात्र इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन पर लागू होगा। ग्राहक को अपने मामले की तारीख और लेन-देन का प्रकार देखकर पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।

2. ऑनलाइन ठगी में अधिकतम कितना मुआवजा मिल सकता है?

पात्र मामले में शुद्ध नुकसान का 85 प्रतिशत या ₹25,000, इनमें से जो कम हो, मुआवजा मिल सकता है। यह सुविधा ₹50,000 तक के सकल नुकसान वाली निर्धारित श्रेणी के लिए है।

3. ठगी होने पर कितने दिन में शिकायत करनी होगी?

रिपोर्ट में पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक और National Cyber Crime Reporting Portal या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने की शर्त बताई गई है। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रिकवरी की संभावना के लिए उतना बेहतर है।

4. क्या हर UPI या Online Scam पर 85% पैसा वापस मिलेगा?

नहीं। नियम पात्र इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग धोखाधड़ी, नुकसान की सीमा और अन्य शर्तों पर निर्भर है। हर विवाद या निवेश धोखाधड़ी स्वतः इस योजना में शामिल नहीं होगी। बैंक जांच के बाद पात्रता तय करेगा।

5. ऑनलाइन फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

तुरंत बैंक के आधिकारिक माध्यम से शिकायत करें और 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें। शिकायत नंबर सुरक्षित रखें, खाते के पासवर्ड बदलें और OTP, PIN या CVV किसी से साझा न करें।

निष्कर्ष

RBI का नया ढांचा 1 जनवरी 2027 से पात्र छोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड पीड़ितों को सीमित राहत दे सकता है। मुआवजे के लिए पांच दिन में शिकायत और सभी पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी होगा।

स्रोत: The Economic Times

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी है। किसी धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत बैंक और आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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