रिलायंस इंडस्ट्रीज भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल कारोबार में बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही नए कारोबार उसकी कमाई और विकास के प्रमुख आधार बन सकते हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने कारोबार का विस्तार केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रख रही है। कंपनी अब स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी निर्माण और डिजिटल कारोबार पर तेजी से निवेश कर रही है। पहली तिमाही के नतीजों के बाद कंपनी ने बताया कि उसकी नई ऊर्जा परियोजनाएं तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रही हैं और आने वाले वर्षों में यह कारोबार मुनाफे का बड़ा स्रोत बन सकता है।
रिलायंस की नई ऊर्जा रणनीति
⚡ नई ऊर्जा कारोबार की प्रमुख बातें
- कंपनी: रिलायंस इंडस्ट्रीज
- फोकस: स्वच्छ ऊर्जा और बैटरी निर्माण
- बैटरी लक्ष्य: 120 गीगावॉट घंटा क्षमता
- पहला चरण: 40 गीगावॉट घंटा क्षमता
- सोलर क्षमता: 20 गीगावॉट एकीकृत निर्माण
- लक्ष्य: भविष्य में मुनाफे का बड़ा स्रोत बनाना
कंपनी का लक्ष्य बैटरी निर्माण क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 120 गीगावॉट घंटा तक पहुंचाना है। फिलहाल इस साल 40 गीगावॉट घंटा क्षमता हासिल करने की तैयारी चल रही है। रिलायंस का कहना है कि इससे वह दुनिया की बड़ी ऊर्जा भंडारण कंपनियों में शामिल हो सकती है।
रिलायंस 20 गीगावॉट की एकीकृत सोलर निर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। गुजरात के कच्छ में कंपनी ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया है और इस साल के अंत तक वहां बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा कंपनी ने ग्रीन अमोनिया से जुड़ा एक समझौता भी किया है और अतिरिक्त क्षमता बढ़ाने के लिए अन्य साझेदारों से बातचीत जारी है।
ब्रोकरेज को दिख रही मजबूत संभावनाएं
ब्रोकरेज फर्म Nuvama का मानना है कि रिलायंस का नया ऊर्जा कारोबार वित्त वर्ष 2027 से कंपनी की कमाई में महत्वपूर्ण योगदान देना शुरू कर सकता है। ब्रोकरेज के अनुसार शुरुआती सोलर मॉड्यूल कारोबार से ही कंपनी के शुद्ध लाभ में करीब 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं अपनी परियोजनाओं से सस्ती बिजली मिलने पर बिजली लागत घटेगी, जिससे लाभ में लगभग 5 प्रतिशत का अतिरिक्त सुधार संभव है।
रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों में नई ऊर्जा परियोजनाओं का योगदान लगातार बढ़ सकता है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक कंपनी के कुल मुनाफे में इस कारोबार की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपने कुल लाभ का आधे से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से हासिल करना है।
📱 डिजिटल कारोबार में तेजी
- ऑनलाइन किराना: 116% वार्षिक बढ़ोतरी
- कुल लेनदेन: 46% की वृद्धि
- जियोमार्ट: नया ऐप और विस्तारित नेटवर्क
- डिलीवरी: हजारों पिन कोड तक पहुंच
- फोकस: डार्क स्टोर और तेज डिलीवरी
- उम्मीद: 18–24 महीनों में मुनाफे पर असर
डिजिटल कारोबार का तेजी से विस्तार
रिलायंस रिटेल भी डिजिटल कारोबार को तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी किराना, फैशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई क्षेत्रों में ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार कर रही है। हालिया तिमाही में ऑनलाइन किराना ऑर्डर में सालाना आधार पर 116 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ग्राहकों के कुल लेनदेन में 46 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
कंपनी ने बताया कि वह देशभर में अपने डिलीवरी नेटवर्क का विस्तार कर रही है और अब हजारों पिन कोड तक सेवाएं पहुंचा रही है। जियोमार्ट ऐप को भी नए रूप में पेश किया गया है। इसके साथ ही डार्क स्टोर नेटवर्क बढ़ाने और तेज डिलीवरी व्यवस्था को मजबूत करने पर निवेश किया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि अगले 18 से 24 महीनों में इन निवेशों का असर मुनाफे और नकदी प्रवाह पर दिखाई देने लगेगा।
लंबी अवधि की विकास योजना पर फोकस
फैशन और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में भी डिजिटल रणनीति का असर दिख रहा है। कंपनी की तेज डिलीवरी सेवा के ऑर्डर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर अब जियोमार्ट नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, जिससे कम समय में उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाए जा रहे हैं。
रिलायंस का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद कंपनी अपने दीर्घकालिक विकास की योजना पर लगातार आगे बढ़ रही है। स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल कारोबार और नई तकनीकों में निवेश के जरिए कंपनी भविष्य में मजबूत विकास की उम्मीद कर रही है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले आधिकारिक जानकारी और वित्तीय सलाह अवश्य लें।

