भारत की नई ग्रामीण रोजगार योजना में महिलाओं की भागीदारी शुरुआती चरण में काफी मजबूत रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना शुरू होने के पहले 20 दिनों में कुल रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को रोजगार के साथ आर्थिक रूप से मजबूत बनने के नए अवसर मिल रहे हैं।
नई ग्रामीण रोजगार योजना में महिलाओं की भागीदारी मजबूत
विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत 1 जुलाई से 20 जुलाई के बीच कुल 4.62 करोड़ व्यक्ति-दिन का रोजगार पैदा हुआ। इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई रही। व्यक्ति-दिन का अर्थ है कि एक व्यक्ति को एक दिन के लिए रोजगार मिलने पर उसे एक व्यक्ति-दिन माना जाता है।
नई योजना में महिलाओं की भूमिका केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है। कई जगहों पर महिलाएं काम की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। करीब 61 प्रतिशत कार्यस्थलों पर महिलाओं को पर्यवेक्षक बनाया गया है, जिससे काम की गुणवत्ता और व्यवस्था में सुधार हो रहा है।
ग्रामीण रोजगार योजना की मुख्य बातें
- रोजगार अवधि: 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन
- महिला भागीदारी: शुरुआती चरण में 63 प्रतिशत से अधिक
- कुल रोजगार: 4.62 करोड़ व्यक्ति-दिन
- पर्यवेक्षक भूमिका: 61 प्रतिशत कार्यस्थलों पर महिलाएं
- उद्देश्य: रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण
महिलाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी वाले राज्यों में केरल सबसे आगे रहा, जहां यह आंकड़ा करीब 89 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद तमिलनाडु में 87 प्रतिशत, राजस्थान में 74 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 70 प्रतिशत, असम में 67 प्रतिशत, मणिपुर में 65 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 64 प्रतिशत भागीदारी रही।
महिलाओं को मिल रहे हैं रोजगार के नए अवसर
इस योजना के तहत महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोले गए हैं। अब वे काम की निगरानी, सामाजिक जांच, पौधों की देखभाल, खाद बनाने की इकाइयों, स्वयं सहायता समूह से जुड़े काम और ग्रामीण बाजार जैसी गतिविधियों में भी हिस्सा ले रही हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इस योजना को महिला सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बना रही है। योजना में बच्चों की देखभाल की सुविधा भी जोड़ी गई है, ताकि छोटे बच्चों वाली महिलाएं भी आसानी से काम कर सकें।
योजना से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव
- मजदूरी: ₹298.8 से बढ़कर ₹327.4 प्रतिदिन
- रोजगार गारंटी: 125 दिन तक रोजगार
- सुविधाएं: बच्चों की देखभाल की व्यवस्था
- तकनीक: Digital निगरानी और Transparency
- लक्ष्य: ग्रामीण विकास और आय में बढ़ोतरी
नई योजना के तहत रोजगार की गारंटी अवधि को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसके साथ ही दैनिक मजदूरी में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले औसत मजदूरी ₹298.8 थी, जो अब बढ़कर ₹327.4 प्रतिदिन हो गई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं की भूमिका पर फोकस
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को केवल मजदूरी देने वाली योजना तक सीमित रखना नहीं है। इसके जरिए गांवों में स्थायी विकास, आधारभूत ढांचे का निर्माण और लोगों की आय बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। योजना में Digital निगरानी, संपत्तियों की पहचान और Transparency बढ़ाने के लिए कई व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती आंकड़े सकारात्मक हैं, लेकिन लंबे समय तक सफलता के लिए समय पर भुगतान, बेहतर व्यवस्था और रोजगार की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी होगा। केवल महिलाओं की संख्या बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इससे परिवारों की आय और जीवन स्तर में सुधार भी होना चाहिए।
इस योजना के जरिए महिलाओं की Workforce भागीदारी बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में Infrastructure मजबूत करने और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए इस योजना के लिए ₹95,692.31 करोड़ का प्रावधान किया है। आने वाले समय में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने में अहम योगदान दे सकती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के लिए है, आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग की वेबसाइट देखें।
