रूस-यूक्रेन अनाज संकट: गेहूं की supply पर बढ़ा खतरा

रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब अनाज की आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। दोनों देशों की ओर से अनाज से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने के कारण गेहूं और दूसरे जरूरी खाद्य पदार्थों की supply को लेकर चिंता बढ़ गई है। काला सागर का इलाका दुनिया के लिए गेहूं की आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। सामान्य स्थिति में रूस दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब एक चौथाई हिस्सा देता है, जबकि यूक्रेन की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जारी हमले लंबे समय तक चलते हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष से अनाज supply पर बढ़ा खतरा

गर्मियों के दौरान दोनों देशों ने अनाज से जुड़े ठिकानों पर हमले बढ़ा दिए हैं। यह समय फसल की कटाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। यूक्रेन की ओर से बताया गया कि अगस्त के पहले आधे हिस्से में उसका निर्यात पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में केवल करीब 20 प्रतिशत रहा। वहीं रूस के अनाज निर्यात में भी लगभग आधी गिरावट आने की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं के बीच Chicago बाजार में गेहूं की कीमत जुलाई की शुरुआत से करीब 25 प्रतिशत बढ़ चुकी है और यह 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। मक्का और चावल की कीमतों में भी लगभग इतनी ही तेजी देखी गई है।

इस स्थिति का असर केवल गेहूं तक सीमित नहीं रह सकता, क्योंकि गेहूं, चावल, मक्का और जौ जैसे अनाजों की कीमतों में अक्सर एक-दूसरे के साथ बदलाव देखने को मिलता है। वर्ष 2022 में भी रूस के हमलों के कारण ओडेसा और आसपास के क्षेत्रों से अनाज भेजने को लेकर बड़ी चिंता पैदा हुई थी। उस समय तुर्की की मध्यस्थता से कुछ समय के लिए स्थिति संभली थी, लेकिन इस बार हालात अधिक गंभीर दिखाई दे रहे हैं। यूक्रेन के पास अब रूस के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता भी अधिक है, जिससे अनाज की supply पर खतरा और बढ़ सकता है।

अनाज बाजार पर संघर्ष का असर

  • रूस और यूक्रेन के अनाज निर्यात पर दबाव
  • काला सागर की supply व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा
  • गेहूं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
  • मक्का और चावल की कीमतों में भी तेजी
  • अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार में चिंता बढ़ी

अनाज ठिकानों पर हमले रोकने का प्रस्ताव

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अनाज से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकने के लिए समझौते का प्रस्ताव रखा था, लेकिन रूस ने इसे स्वीकार नहीं किया। दोनों देशों के बीच तेल और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को लेकर भी तनाव जारी है। यूक्रेन का मानना है कि उसके लिए अनाज का महत्व रूस की तुलना में कहीं अधिक है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था में कृषि और अनाज निर्यात की बड़ी भूमिका है।

मिस्र और उत्तरी अफ्रीका पर पड़ सकता है असर

रूस और यूक्रेन से आने वाला गेहूं भूमध्यसागर के रास्ते मिस्र, अल्जीरिया और मोरक्को जैसे देशों तक पहुंचता है। उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के कुछ देशों में लोगों के भोजन का लगभग आधा हिस्सा गेहूं पर निर्भर है। इसलिए यदि काला सागर से अनाज की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो इन देशों में खाद्य कीमतें और महंगाई बढ़ सकती है। दुनिया के सबसे बड़े गेहूं आयातकों में शामिल मिस्र में इस साल महंगाई पहले ही बढ़कर करीब 15 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है।

फिलहाल अनाज का पर्याप्त भंडार मौजूद

हालांकि फिलहाल दुनिया के पास अनाज का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वर्ष 2025 में अर्जेंटीना से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक अच्छी गेहूं की फसल हुई थी, जिससे बाजार को कुछ राहत मिली है। रूस और यूक्रेन के किसान अपनी फसल को करीब एक साल तक सुरक्षित रख सकते हैं। अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष कम होता है और युद्धविराम होता है, तो रुकी हुई फसल बाद में बाजार में आ सकती है। इसी वजह से गेहूं की कीमतें अभी भी 2022 में बढ़े उच्च स्तर से करीब 30 प्रतिशत नीचे हैं।

आने वाले समय की बड़ी चुनौतियां

  • अमेरिका में गेहूं उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत कमी
  • कनाडा में किसानों का कैनोला की ओर बढ़ता रुख
  • ऑस्ट्रेलिया में सूखे से उत्पादन पर खतरा
  • काला सागर से अनाज supply कमजोर होने की आशंका
  • कई देशों में खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम

दुनिया के दूसरे गेहूं उत्पादकों पर भी दबाव

लेकिन आगे की स्थिति इतनी आसान नहीं हो सकती। अमेरिका में सूखे के कारण सर्दियों में होने वाले गेहूं का उत्पादन करीब 20 प्रतिशत घटा है। कनाडा में किसानों ने बेहतर कीमत मिलने के कारण गेहूं की जगह कैनोला की ओर ज्यादा रुख किया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में मौसम की खराब स्थिति और सूखे से आने वाले समय में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में अगर रूस और यूक्रेन के बीच हमले बढ़ते रहे, तो काला सागर से अनाज की supply और कमजोर हो सकती है। इसका असर आने वाले समय में दुनिया के कई देशों की खाद्य कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।

Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रस्तुत की गई है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कीमतों और अनाज की supply से जुड़े आंकड़ों में समय के साथ बदलाव संभव है।

Gourav Kumar Singh

About the Author

Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

Read More →

Leave a Comment