केंद्र सरकार कपड़ा और गारमेंट उद्योग में काम करने वाले लोगों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए अगले पांच वर्षों में ₹25,000 करोड़ खर्च करने की योजना पर विचार कर रही है। Samarth 2.0 नाम की इस प्रस्तावित योजना का मकसद ऐसे कुशल कर्मचारी तैयार करना है, जिनकी जरूरत बदलती तकनीक, फैक्ट्री के काम और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुसार बढ़ रही है। यह प्रस्ताव अभी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में है, इसलिए इसे स्वीकृत योजना या जारी हो चुकी राशि नहीं समझना चाहिए।
Samarth 2.0 में क्या खास होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, कपड़ा मंत्रालय के प्रस्ताव की जांच खर्च वित्त समिति कर चुकी है और इसे जल्द केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। योजना को मंजूरी मिलने के बाद इसे उद्योग से जुड़े संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य भागीदारों के जरिए लागू किए जाने की उम्मीद है। इसका जोर प्रशिक्षण संस्थानों और कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर होगा, ताकि लोगों को काम के दौरान उपयोग होने वाले कौशल सिखाए जा सकें।
प्रस्तावित ₹25,000 करोड़ का खर्च मौजूदा Samarth 1.0 योजना के तहत मार्च 2026 तक पांच वर्षों में खर्च किए गए ₹740 करोड़ से काफी अधिक होगा। रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए Samarth 1.0 का आवंटन ₹300 करोड़ बताया गया है। नई योजना का उद्देश्य केवल ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनकी काम करने की क्षमता, रोजगार मिलने की संभावना और उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनाना भी है।
🧵 Samarth 2.0: मुख्य बातें
- प्रस्तावित खर्च: ₹25,000 करोड़
- योजना की अवधि: अगले पांच साल
- मुख्य क्षेत्र: कपड़ा और गारमेंट उद्योग
- लक्ष्य: उद्योग की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित कर्मचारी
- मौजूदा स्थिति: अंतिम मंजूरी का इंतजार
कपड़ा उद्योग के लिए प्रशिक्षण क्यों जरूरी है?
कपड़ा और गारमेंट सेक्टर कृषि के बाद देश में रोजगार देने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, यह करीब 4.5 करोड़ लोगों को सीधे रोजगार देता है और 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका को सहारा देता है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण कामगार शामिल हैं। ऐसे में प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होने से कामगारों की क्षमता बढ़ाने और रोजगार के अवसर बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशिक्षण वास्तविक काम की जरूरतों से जुड़ा होना चाहिए। तकनीक, गुणवत्ता के मानक और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की अपेक्षाएं बदलती रहती हैं। यदि प्रशिक्षण केंद्र निर्यातकों और फैक्ट्रियों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करें, तो कर्मचारियों को ऐसे कौशल मिल सकते हैं जिनका इस्तेमाल वे अपने काम में कर सकें। केवल प्रशिक्षण पाने वालों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा; रोजगार और उत्पादकता में सुधार भी अहम होगा।
भारत के टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ाने की तैयारी
भारत 2030 तक कपड़ा और गारमेंट निर्यात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए मुक्त व्यापार समझौतों यानी FTA से मिलने वाले अवसरों का बेहतर इस्तेमाल करने की जरूरत होगी। कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के 15 FTA साझेदारों में कपड़ा उत्पादों का बाजार करीब 198 अरब डॉलर का है, जबकि इन देशों को भारत का मौजूदा निर्यात लगभग 11.5 अरब डॉलर बताया गया है।
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता इस वर्ष लागू हुआ है, जबकि यूरोपीय संघ के साथ समझौता 2027 की शुरुआत से लागू होने की उम्मीद बताई गई है। इन समझौतों से भारतीय कपड़ा और परिधान उत्पादों को शुल्क में राहत मिलने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, अभी यूरोपीय संघ भारतीय उत्पादों पर उत्पाद के हिसाब से 12% तक शुल्क लगाता है, जबकि बांग्लादेश को कुछ श्रेणियों में कम विकसित देश का दर्जा होने के कारण शुल्क-मुक्त पहुंच मिलती है। नए समझौते लागू होने पर भारत की प्रतिस्पर्धी स्थिति बदल सकती है।
📦 निर्यात बढ़ाने के लक्ष्य
- 2030 का लक्ष्य: कपड़ा और गारमेंट निर्यात 100 अरब डॉलर
- FTA साझेदार: 15 देशों के साथ बाजार तक पहुंच
- साझेदारों का बाजार: रिपोर्ट के अनुसार करीब 198 अरब डॉलर
- मौजूदा निर्यात: इन बाजारों में करीब 11.5 अरब डॉलर
- अन्य कदम: मेगा टेक्सटाइल पार्क और मशीनों व तकनीक का उन्नयन
Samarth 1.0 के तहत कितने लोगों को प्रशिक्षण मिला?
Samarth 1.0 की शुरुआत 2017 में हुई थी। इसके तहत कपड़ा और गारमेंट क्षेत्र में नए कर्मचारियों को शुरुआती प्रशिक्षण देने के साथ मौजूदा कर्मचारियों को नए कौशल सिखाने और पुराने कौशल को बेहतर करने का काम किया जाता है। संगठित कताई और बुनाई क्षेत्र को इस योजना से बाहर रखा गया है। इसे उद्योग संगठनों, राज्य सरकार की एजेंसियों और मंत्रालय से जुड़े संस्थानों के जरिए लागू किया जाता है।
कपड़ा मंत्रालय के आधिकारिक डैशबोर्ड के 16 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 4,614 प्रशिक्षण केंद्रों और 323 कार्यान्वयन भागीदारों के माध्यम से 7,38,182 लोगों को प्रशिक्षित किया गया था। वहीं, कौशल सुधार और दोबारा प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 168 सक्रिय केंद्रों और 33 भागीदारों के जरिए 26,786 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। Samarth 2.0 के लिए अहम चुनौती यह होगी कि प्रशिक्षण के साथ-साथ लोगों को बेहतर रोजगार और उद्योग को प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Samarth 2.0 योजना क्या है?
Samarth 2.0 कपड़ा और गारमेंट उद्योग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रस्तावित सरकारी योजना है। इसका लक्ष्य उद्योग की बदलती तकनीक और काम की जरूरतों के मुताबिक कुशल कर्मचारी तैयार करना है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए पांच वर्षों में ₹25,000 करोड़ खर्च करने पर विचार हो रहा है।
2. क्या Samarth 2.0 को मंजूरी मिल गई है?
दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव खर्च वित्त समिति की जांच से गुजर चुका है और इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सकता है। इसका अर्थ है कि अंतिम मंजूरी बाकी है। योजना के लागू होने, आवेदन प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी।
3. Samarth 2.0 के लिए कितनी राशि प्रस्तावित है?
अगले पांच वर्षों के लिए ₹25,000 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव बताया गया है। यह Samarth 1.0 के तहत मार्च 2026 तक पांच वर्षों में खर्च हुए ₹740 करोड़ से काफी अधिक है। प्रस्तावित राशि और अंतिम बजट में बदलाव हो सकता है, क्योंकि मंजूरी की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
4. इस योजना से किसे फायदा हो सकता है?
योजना लागू होने पर कपड़ा और परिधान उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों, प्रशिक्षण लेने वाले नए लोगों और संबंधित कंपनियों को फायदा हो सकता है। खास तौर पर महिलाओं और ग्रामीण कामगारों के लिए बेहतर कौशल रोजगार के अवसर बढ़ा सकता है, लेकिन वास्तविक लाभ योजना के नियमों और प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।
5. भारत कपड़ा निर्यात बढ़ाने पर जोर क्यों दे रहा है?
भारत का लक्ष्य 2030 तक कपड़ा और गारमेंट निर्यात को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाना है। इसके लिए प्रशिक्षित कामगार, बेहतर उत्पाद गुणवत्ता, आधुनिक मशीनें और मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसर अहम हैं। प्रशिक्षण और तकनीकी सुधार भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर सकते हैं।
निष्कर्ष
Samarth 2.0 के तहत प्रस्तावित ₹25,000 करोड़ का निवेश कपड़ा उद्योग में कौशल विकास और निर्यात बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। इसकी सफलता अंतिम मंजूरी, उद्योग से तालमेल और प्रशिक्षण के बाद रोजगार के वास्तविक अवसरों पर निर्भर करेगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। योजना अभी प्रस्तावित है; राशि, नियम और लागू होने की तारीख में बदलाव संभव है।
