भारत में तुरंत घरेलू मदद देने वाली सेवा स्नैबिट का कारोबार तेजी से बढ़ाने की कोशिश का असर उसके वित्तीय नतीजों में दिखाई दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का घाटा बढ़कर करीब 167.75 करोड़ रुपये हो गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में उसे 5.70 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। कंपनी ने ग्राहकों तक सेवा पहुँचाने, घरेलू कामगारों की उपलब्धता बढ़ाने और प्रचार पर बड़ी रकम खर्च की।
स्नैबिट का संचालन Maestroedge Solutions Pvt. Ltd. करती है। कंपनी के वित्तीय विवरणों के अनुसार, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वर्ष में उसकी परिचालन आय बढ़कर 12.25 करोड़ रुपये रही। पिछले वित्त वर्ष में यह केवल 26.35 लाख रुपये थी। आमदनी में तेज बढ़ोतरी के बावजूद खर्च उससे कहीं अधिक रहा। कुल खर्च बढ़कर 194.76 करोड़ रुपये पहुँच गया, जबकि एक साल पहले यह 6.81 करोड़ रुपये था।
स्नैबिट के वित्तीय नतीजे
- वित्त वर्ष: 2025-26
- कुल घाटा: 167.75 करोड़ रुपये
- परिचालन आय: 12.25 करोड़ रुपये
- कुल खर्च: 194.76 करोड़ रुपये
- पिछले वर्ष का घाटा: 5.70 करोड़ रुपये
- मुख्य वजह: कामगारों, सेवा संचालन और प्रचार पर अधिक खर्च
कंपनी का सबसे बड़ा खर्च घरेलू सेवाएँ देने वाले पेशेवरों से जुड़ा रहा। इस मद में 63.07 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद प्रचार पर 48.69 करोड़ रुपये, कर्मचारियों पर 46.02 करोड़ रुपये और सेवाएँ पूरी कराने पर 23.83 करोड़ रुपये खर्च किए गए। कंपनी की आमदनी में प्लेटफॉर्म सेवाओं से 10.82 करोड़ रुपये और यूनिफॉर्म की बिक्री से 1.42 करोड़ रुपये शामिल थे। ग्राहकों को दिए गए कुछ डिस्काउंट घटाने के बाद कंपनी अपनी आमदनी दर्ज करती है।
बैंक जमा पर मिले ब्याज जैसी दूसरी आमदनी से कंपनी को 14.77 करोड़ रुपये मिले। इससे उसकी कुल आय 27.01 करोड़ रुपये रही। फिर भी खर्च और आमदनी के बीच बड़ा अंतर बना रहा। ये आँकड़े दिखाते हैं कि तेजी से ग्राहक जोड़ने और सेवा का दायरा बढ़ाने के लिए कंपनी को फिलहाल भारी निवेश करना पड़ रहा है।
तुरंत घरेलू मदद देने वाली कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि ग्राहक के घर के पास पर्याप्त कामगार उपलब्ध रहें। ग्राहक बुकिंग करते ही सेवा चाहता है, इसलिए कंपनी को अलग-अलग इलाकों में कामगारों की उपलब्धता बनाए रखनी पड़ती है। जब एक ही क्षेत्र में कई बुकिंग मिलती हैं, तो कामगार कम समय में अधिक काम कर सकते हैं। लेकिन दूर-दूर स्थित घरों में जाने से यात्रा का समय बढ़ता है और हर बुकिंग की लागत भी ऊपर जाती है।
कंपनी के सामने कारोबार बढ़ाने की चुनौती
- कामगारों पर खर्च: 63.07 करोड़ रुपये
- प्रचार पर खर्च: 48.69 करोड़ रुपये
- बुकिंग की समस्या: घरों के बीच दूरी बढ़ने पर यात्रा में ज्यादा समय लगता है
- मुनाफे की चुनौती: हर घंटे की सेवा से होने वाली आमदनी को लागत से ऊपर रखना जरूरी है
- संभावित कदम: एक ही इलाके में बुकिंग जोड़ना और व्यस्त समय में अलग कीमत रखना
उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, अभी एक पेशेवर लगभग साढ़े नौ घंटे काम करके रोज आठ से दस बुकिंग पूरी करता है। इस व्यवस्था में सेवा देने की लागत करीब 95 से 100 रुपये प्रति घंटे बैठती है। यह लागत तभी संभाली जा सकती है, जब बुकिंग एक-दूसरे के पास हों और कामगार को एक घर से दूसरे घर तक पहुँचने में ज्यादा समय न लगे। दूर के इलाकों में विस्तार करने पर यही मॉडल महँगा पड़ सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में इस तरह की सेवा की कीमत 200 रुपये प्रति घंटे से ऊपर करनी पड़ सकती है, ताकि कारोबार को लाभ में लाया जा सके। फिलहाल कंपनियाँ अधिक मांग वाले इलाकों पर ध्यान दे रही हैं, आसपास की बुकिंग एक ही कामगार को देने की कोशिश करती हैं और व्यस्त समय में ज्यादा शुल्क भी ले सकती हैं। ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि सेवा की कीमत इलाके, समय और उपलब्धता के हिसाब से बदल सकती है।
स्नैबिट ने वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन गतिविधियों में 157.46 करोड़ रुपये नकद इस्तेमाल किए। यह औसतन हर महीने करीब 13.12 करोड़ रुपये के नकद खर्च के बराबर है। हालांकि पूरे साल का औसत अगले वित्त वर्ष में कंपनी के खर्च की रफ्तार को पूरी तरह नहीं बताता। वित्त वर्ष के अंत में कंपनी के पास नकद और बैंक शेष के रूप में 292.21 करोड़ रुपये थे। इसमें 285.70 करोड़ रुपये जमा के रूप में थे। इसके अलावा कंपनी के पास 26.65 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड भी थे। ये रकम अप्रैल में हुई नई फंडिंग से पहले की हैं।
अप्रैल में स्नैबिट ने 56 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी। इसके बाद कंपनी की कुल जुटाई गई पूँजी 112 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई। उस दौर में कंपनी का मूल्यांकन करीब 350 से 400 मिलियन डॉलर बताया गया था। प्रतिस्पर्धी कंपनी प्रोंटो लगभग 60 मिलियन डॉलर जुटा चुकी है और उसके पिछले दौर में उसका मूल्यांकन करीब 200 मिलियन डॉलर बताया गया। वहीं अर्बन कंपनी के बोर्ड ने शुक्रवार को शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन 2,500 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना को मंजूरी दी। कंपनी ने कहा कि इस रकम का इस्तेमाल मौजूदा कारोबार, इंस्टाहेल्प और संभावित अधिग्रहणों में किया जा सकता है।
इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए केवल तेजी से विस्तार करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह भी साबित करना होगा कि ग्राहक से मिलने वाली रकम कामगारों, यात्रा, प्रचार और संचालन की लागत को पूरा कर सकती है। स्नैबिट की बढ़ती आमदनी मांग में बढ़ोतरी का संकेत देती है, लेकिन मौजूदा घाटा बताता है कि स्थायी मुनाफे तक पहुँचने के लिए कंपनी को बुकिंग की संख्या, सेवा की कीमत और हर काम की लागत के बीच बेहतर संतुलन बनाना होगा।
इस विषय पर कंपनी और सेवा क्षेत्र की जानकारी के लिए लाइवमिंट की वेबसाइट भी देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. वित्त वर्ष 2025-26 में स्नैबिट को कितना घाटा हुआ?
वित्त वर्ष 2025-26 में स्नैबिट का घाटा बढ़कर 167.75 करोड़ रुपये हो गया। इससे पिछले वित्त वर्ष में कंपनी को 5.70 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
2. स्नैबिट की परिचालन आय कितनी रही?
कंपनी की परिचालन आय वित्त वर्ष 2025-26 में 12.25 करोड़ रुपये रही। पिछले वर्ष यह 26.35 लाख रुपये थी। आमदनी बढ़ने के बावजूद कंपनी का कुल खर्च काफी अधिक रहा।
3. स्नैबिट का सबसे बड़ा खर्च किस मद में हुआ?
कंपनी ने घरेलू सेवा देने वाले पेशेवरों से जुड़े खर्च पर 63.07 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बाद प्रचार और कर्मचारियों से जुड़े खर्च बड़े मद रहे।
4. तुरंत घरेलू मदद देने वाली सेवाओं की लागत क्यों बढ़ सकती है?
जब ग्राहकों के घर एक-दूसरे से दूर होते हैं, तो कामगारों को यात्रा में अधिक समय लगता है। इससे एक दिन में पूरी होने वाली बुकिंग घट सकती हैं और हर सेवा की लागत बढ़ जाती है।
5. स्नैबिट ने कितनी फंडिंग जुटाई है?
अप्रैल में 56 मिलियन डॉलर जुटाने के बाद स्नैबिट की कुल फंडिंग 112 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई। उस फंडिंग दौर में कंपनी का मूल्यांकन करीब 350 से 400 मिलियन डॉलर बताया गया था।
निष्कर्ष
स्नैबिट की आमदनी तेजी से बढ़ी है, लेकिन विस्तार की लागत ने घाटा भी काफी बढ़ा दिया है। कंपनी के लिए आगे की चुनौती अधिक बुकिंग हासिल करने के साथ हर सेवा की लागत नियंत्रित करना होगी। टिकाऊ मुनाफा तभी संभव होगा, जब कीमत और संचालन में बेहतर संतुलन बनेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध वित्तीय जानकारी पर आधारित है। आँकड़े और अनुमान बदल सकते हैं। इसे निवेश संबंधी सलाह न मानें।
