Reliance की Strand Life Sciences को कैंसर टेस्ट तकनीक का पेटेंट

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज (Strand Life Sciences) को खून की जांच के जरिए शुरुआती चरण में कैंसर का पता लगाने वाली नई तकनीक के लिए भारत में पेटेंट मिल गया है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक साधारण ब्लड सैंपल की मदद से कैंसर की जल्दी पहचान करने और यह पता लगाने में मदद करेगी कि कैंसर शरीर के किस हिस्से से शुरू हुआ है।

खून की जांच से कैंसर पहचानने वाली नई तकनीक को मिला पेटेंट

कंपनी के अनुसार, इस नई तकनीक में ब्लड सैंपल से डीएनए का विश्लेषण किया जाता है। इसके लिए जीनोम सीक्वेंसिंग, डीएनए पर होने वाले रासायनिक बदलाव (मिथाइलेशन), फ्रैगमेंट विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाता है। इन सभी तकनीकों को मिलाकर कैंसर से जुड़े डीएनए की पहचान अधिक सटीक तरीके से की जा सकती है।

इस पेटेंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए डीएनए के मिथाइलेशन पैटर्न को कम त्रुटि के साथ पहचानने की नई विधि विकसित की गई है। इससे शुरुआती चरण में कैंसर का पता लगाने की क्षमता पहले की तुलना में बेहतर हो सकती है।

कैंसर की शुरुआती पहचान क्यों जरूरी है?

भारत में हर साल लगभग 15 लाख नए कैंसर के मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में इलाज कठिन हो जाता है और मरीज के ठीक होने की संभावना भी कम हो सकती है। यही वजह है कि समय रहते कैंसर की पहचान करने वाली तकनीकों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

🧬 कैंसर डिटेक्शन टेक्नोलॉजी की खास बातें

  • तकनीक: ब्लड सैंपल से कैंसर की शुरुआती पहचान
  • आधार: डीएनए विश्लेषण, जीनोम सीक्वेंसिंग और AI
  • फायदा: बीमारी का जल्दी पता लगाने में मदद
  • विशेषता: कैंसर शुरू होने वाले हिस्से की पहचान

कंपनी का कहना है कि मौजूदा कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम केवल कुछ प्रकार के कैंसर तक सीमित हैं और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करना आसान नहीं है। नई तकनीक भविष्य में बड़े पैमाने पर कैंसर की शुरुआती जांच को आसान और अधिक प्रभावी बना सकती है, खासकर तब जब जीनोम सीक्वेंसिंग की लागत लगातार कम हो रही है।

AI आधारित लिक्विड बायोप्सी तकनीक की दिशा में बड़ा कदम

स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश हरिहरन ने कहा कि यह पेटेंट एआई आधारित लिक्विड बायोप्सी तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य कैंसर की जांच को अधिक सटीक, किफायती और ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।

स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज एक जीनोमिक्स रिसर्च और डायग्नोस्टिक्स कंपनी है, जिसकी शुरुआत भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से हुई थी। साल 2021 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस कंपनी का अधिग्रहण किया था।

भारत में बढ़ रहा है जीनोमिक्स टेस्टिंग बाजार

उद्योग के अनुमान के अनुसार, भारत का जीनोमिक्स टेस्टिंग बाजार वर्ष 2030 तक लगभग 2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। पिछले पांच वर्षों में जीनोम सीक्वेंसिंग की लागत में करीब 50 प्रतिशत की कमी आने से इस क्षेत्र में तेजी से विकास होने की उम्मीद है।

🔬 जीनोमिक्स और कैंसर जांच का भविष्य

  • बाजार अनुमान: 2030 तक भारत का जीनोमिक्स टेस्टिंग बाजार करीब 2 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना
  • तकनीकी विकास: जीनोम सीक्वेंसिंग की लागत में पिछले पांच वर्षों में लगभग 50% कमी
  • भविष्य की संभावना: बड़े स्तर पर कैंसर की शुरुआती जांच को आसान बनाने में मदद
  • मुख्य उद्देश्य: सटीक, किफायती और अधिक लोगों तक कैंसर जांच पहुंचाना

Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार और जागरूकता के उद्देश्य से है, निवेश या स्वास्थ्य संबंधी सलाह नहीं है।

Gourav Kumar Singh

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