टाटा समूह भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। कंपनी की इकाई Tata Electronics गुजरात के धोलेरा में देश का पहला बड़े स्तर का चिप निर्माण प्लांट तैयार कर रही है। हालांकि शुरुआत में कंपनी जिस तकनीक से चिप बनाना चाहती थी, अब उसकी शुरुआत उससे पुरानी तकनीक से करने की तैयारी है।
भारत में चिप निर्माण की इस बड़ी परियोजना पर दुनिया भर की नजर है। टाटा का लक्ष्य धीरे-धीरे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाना और देश को आयात पर निर्भरता से बाहर निकालना है।
टाटा धोलेरा प्लांट में पुरानी तकनीक से शुरू करेगा चिप उत्पादन
जानकारी के अनुसार टाटा का धोलेरा प्लांट शुरुआत में 90 नैनोमीटर तकनीक पर आधारित चिप का उत्पादन कर सकता है। यह तकनीक काफी पुरानी मानी जाती है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से औद्योगिक उपकरणों और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में किया जाता है। पहले कंपनी ने 28 नैनोमीटर तकनीक से शुरुआत करने की योजना बताई थी, जो ज्यादा आधुनिक और व्यावसायिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corp. (PSMC) के साथ साझेदारी की है। कंपनी का कहना है कि धोलेरा प्लांट में 28 नैनोमीटर से लेकर 110 नैनोमीटर तक की अलग-अलग तकनीक पर चिप बनाई जाएंगी। कंपनी के अनुसार शुरुआत 55 नैनोमीटर और 90 नैनोमीटर तकनीक से होगी, इसके बाद 28 नैनोमीटर तकनीक को भी शामिल किया जाएगा।
Tata Semiconductor Project Highlights
- स्थान: धोलेरा, गुजरात
- कंपनी: Tata Electronics
- साझेदारी: Powerchip Semiconductor Manufacturing Corp.
- शुरुआती तकनीक: 90nm और 55nm
- भविष्य की योजना: 28nm चिप निर्माण
- निवेश योजना: करीब 10.7 अरब डॉलर
सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत के सामने बड़ी चुनौती
सेमीकंडक्टर निर्माण एक बेहद जटिल प्रक्रिया है और इसमें लंबे अनुभव की जरूरत होती है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देश इस क्षेत्र में भारत से कई दशक आगे हैं। दुनिया की बड़ी कंपनियां पहले से ही अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर रही हैं, ऐसे में भारत के लिए शुरुआत से पूरा सिस्टम तैयार करना एक बड़ी चुनौती है।
टाटा समूह इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य भारत को चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। केंद्र सरकार भी सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है। हाल ही में सरकार ने चिप डिजाइन, निर्माण उपकरण और सप्लाई चेन विकसित करने के लिए नई सहायता योजना को मंजूरी दी है।
धोलेरा चिप प्लांट से भारत को फायदा
- भारत में चिप निर्माण क्षमता बढ़ेगी
- आयात पर निर्भरता कम होगी
- नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे
- Technology और Manufacturing सेक्टर मजबूत होंगे
- सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन विकसित होगी
- भारत वैश्विक चिप बाजार में मजबूत होगा
2028 तक शुरू हो सकता है व्यावसायिक उत्पादन
भारत सरकार की पहले से चल रही योजना के तहत टाटा के धोलेरा प्लांट को भी समर्थन मिल रहा है। इस परियोजना पर करीब 10.7 अरब डॉलर के निवेश की योजना है। शुरुआत में उम्मीद थी कि यहां 2026 के अंत तक उत्पादन शुरू हो जाएगा, लेकिन अब इसके 2028 के मध्य तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 90 नैनोमीटर तकनीक से शुरुआत करना भले ही कम आधुनिक कदम लगे, लेकिन इससे कंपनी को निर्माण प्रक्रिया सीखने, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने और सप्लाई नेटवर्क तैयार करने में मदद मिलेगी। चिप निर्माण में अनुभव हासिल करने के बाद कंपनी आगे की आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ सकती है।
28nm और 90nm चिप तकनीक में अंतर
28 नैनोमीटर तकनीक आज भी काफी महत्वपूर्ण है और इसका इस्तेमाल स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, संचार उपकरण और वाहनों में किया जाता है। वहीं 90 नैनोमीटर तकनीक का उपयोग पुराने लेकिन स्थिर बाजारों में ज्यादा होता है।
भारत के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करना केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की Technology और Manufacturing क्षमता को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। अगर टाटा का यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो इससे देश में नई नौकरियां पैदा होंगी और भारत वैश्विक चिप बाजार में अपनी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। परियोजना और उद्योग संबंधी निर्णय आधिकारिक जानकारी के आधार पर लें।

