भारत में जहां रसोई गैस की कीमतों पर अक्सर चर्चा होती है, वहीं इंडोनेशिया भी एलपीजी पर भारी खर्च और सब्सिडी के बोझ से जूझ रहा है। देश में लगभग 90 प्रतिशत परिवार खाना बनाने के लिए LPG का इस्तेमाल करते हैं। वर्ष 2025 में इंडोनेशिया ने 92 लाख टन से अधिक एलपीजी की खपत की, जिसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा गैस आयात करनी पड़ी। इसी वजह से सरकार पर हर साल बड़ी राशि की Subsidy का बोझ पड़ रहा है।
इंडोनेशिया सरकार एलपीजी पर बढ़ते खर्च को कम करने के लिए नए विकल्पों पर काम कर रही है। सरकार का मानना है कि लंबे समय में बिजली से चलने वाले Induction चूल्हे आयातित LPG पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इंडोनेशिया में LPG सब्सिडी का बढ़ता बोझ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 3 किलो वाले सब्सिडी सिलेंडर पर सरकार करीब 30 हजार इंडोनेशियाई रुपिया की सहायता देती है। वर्ष 2025 में केवल इस योजना पर लगभग 87 ट्रिलियन रुपिया खर्च हुए। वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत बढ़ने से सरकार का खर्च और ज्यादा बढ़ गया है।
इस चुनौती से निपटने के लिए इंडोनेशिया सरकार ने कई विकल्पों पर विचार किया है। इनमें घरेलू प्राकृतिक गैस से बनने वाली CNG, कोयले से तैयार होने वाला DME और बिजली से चलने वाला Induction चूल्हा शामिल हैं। सरकार का मकसद आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करना और सब्सिडी का खर्च घटाना है।
इंडोनेशिया की LPG सब्सिडी एक नजर में
- 90% परिवार LPG का उपयोग करते हैं
- 2025 में 92 लाख टन से अधिक LPG की खपत
- 80% से ज्यादा LPG आयात की गई
- 3 किलो सिलेंडर पर सरकारी सब्सिडी
- 2025 में लगभग 87 ट्रिलियन रुपिया खर्च
- ऊर्जा सुरक्षा सरकार की बड़ी चुनौती
CNG और DME क्यों नहीं बने आसान विकल्प
रिपोर्ट के अनुसार CNG को एलपीजी का विकल्प बनाना आसान नहीं होगा। इसके लिए नए प्लांट, पाइपलाइन, बड़े सिलेंडर और सुरक्षित वितरण व्यवस्था पर भारी निवेश करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था तैयार करने में काफी समय और पैसा लगेगा। इसके अलावा गैस की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
कोयले से बनने वाले DME को भी सस्ता विकल्प नहीं माना गया है। अध्ययन में बताया गया कि यदि पूरे देश में एलपीजी की जगह DME का उपयोग किया जाए तो सरकार को मौजूदा एलपीजी सब्सिडी से दोगुना से भी अधिक खर्च करना पड़ सकता है। अनुमान है कि इसके लिए हर साल करीब 194 ट्रिलियन रुपिया की सहायता देनी होगी, जो मौजूदा व्यवस्था से कहीं ज्यादा है।
Induction चूल्हे के प्रमुख फायदे
- आयातित LPG पर निर्भरता कम
- सरकारी सब्सिडी का बोझ घट सकता है
- मौजूदा बिजली नेटवर्क का उपयोग
- अलग ईंधन आपूर्ति की जरूरत नहीं
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने की संभावना
- लंबी अवधि में सरकारी खर्च में बचत
Induction तकनीक पर सरकार का फोकस
रिपोर्ट में सबसे बेहतर विकल्प Induction चूल्हे को बताया गया है। इसके लिए शुरुआत में एक बार निवेश करना होगा, लेकिन बाद में सरकार को हर साल एलपीजी पर होने वाले बड़े खर्च से राहत मिल सकती है। बिजली से चलने वाले चूल्हे के लिए अलग ईंधन आपूर्ति की जरूरत नहीं होती और यह मौजूदा बिजली नेटवर्क पर आसानी से काम कर सकता है।
इंडोनेशिया की सरकारी बिजली कंपनी ने पहले भी कुछ शहरों में Pilot Project चलाया था। इस दौरान परिवारों को मुफ्त इंडक्शन चूल्हा, बर्तन और जरूरी बिजली कनेक्शन दिया गया। शुरुआती नतीजों में पाया गया कि लोगों के मासिक खाना पकाने के खर्च में कमी आई और सरकार की सब्सिडी का बोझ भी घटा।
रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकला
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार बड़े स्तर पर Induction तकनीक अपनाती है तो शुरुआती निवेश कुछ ही वर्षों में निकल सकता है। इसके बाद कई वर्षों तक सरकार को बड़ी वित्तीय बचत होगी और आयातित एलपीजी पर निर्भरता भी कम हो जाएगी।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि केवल ईंधन बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि इंडोनेशिया लंबे समय के लिए सब्सिडी का बोझ कम करना चाहता है, तो बिजली आधारित Cooking व्यवस्था सबसे किफायती और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकती है। इससे सरकारी खर्च कम होगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य में आयात पर निर्भरता भी घटेगी।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी नीति या निवेश संबंधी निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य देखें।

