कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और ऑनलाइन कारोबार के बढ़ने से दुनिया भर में डेटा केंद्रों की मांग तेज हुई है। लेकिन बड़े डेटा केंद्रों को चलाने के लिए बहुत अधिक बिजली और पानी चाहिए। इसी चुनौती को देखते हुए Thailand ने डेटा केंद्रों के लिए नई नीति का मसौदा तैयार किया है, जिसमें परियोजनाओं को बिजली, पानी और आर्थिक योगदान के आधार पर परखा जाएगा।
इस खबर की पूरी जानकारी
FurtherAsia की 1 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, Thailand के Ministry of Digital Economy and Society ने 27 अक्टूबर को डेटा केंद्र विकास का मसौदा ढांचा मंजूर किया। इसके बाद Cabinet स्तर पर इसकी समीक्षा होनी थी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो नई परियोजनाओं के आवेदन 2027 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है। अभी इसे अंतिम लागू नियम नहीं समझना चाहिए।
मसौदे का मुख्य बदलाव यह है कि नए डेटा केंद्रों को केवल जमीन या कर छूट के आधार पर अनुमति नहीं मिलेगी। डेवलपर को यह बताना होगा कि उसे कितनी बिजली और पानी चाहिए, वह स्थानीय अर्थव्यवस्था में कितना योगदान देगा और पर्यावरण पर उसका क्या असर होगा। सरकार एक तय प्रक्रिया के जरिए परियोजनाओं की तुलना कर सकती है।
📌 Thailand Data Centre Policy: आंकड़े
- • निर्माणाधीन परियोजनाएं: लगभग 50
- • निर्माणाधीन बिजली मांग: 5.4 GW से अधिक
- • मंजूरी की प्रतीक्षा में: 117 परियोजनाएं
- • इनकी बिजली मांग: 29.6 GW से अधिक
- • पहले से चल रहे केंद्र: 35, बिजली खपत 2.5 GW से अधिक
रिपोर्ट में National Economic and Social Development Council के आंकड़ों का उल्लेख है। इनके अनुसार, लगभग 50 डेटा केंद्र परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और उन्हें 5.4 गीगावाट से अधिक बिजली की जरूरत होगी। इसके अलावा 117 परियोजनाएं मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं, जिनकी कुल बिजली मांग 29.6 गीगावाट से अधिक बताई गई है।
Thailand में पहले से 35 डेटा केंद्र संचालित हैं, जो 2.5 गीगावाट से अधिक बिजली का उपयोग करते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल उद्योग का विस्तार बिजली व्यवस्था पर कितना दबाव डाल सकता है। डेटा केंद्रों में सर्वर लगातार चलते हैं, इसलिए बिजली की मांग सामान्य कार्यालय या दुकान की तुलना में अधिक स्थिर और लगातार रहती है।
Thailand के Board of Investment के आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक 57 डेटा केंद्र परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। इन परियोजनाओं का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 811.4 अरब Thai Baht बताया गया है। इनमें Google, Amazon Web Services, NTT Data, STT GDC और Equinix जैसे निवेशकों के नाम शामिल हैं।
इस योजना का उद्योग पर संभावित असर
सरकार की चिंता यह है कि यदि सभी परियोजनाएं एक साथ बिजली मांगें, तो राष्ट्रीय ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है। बिजली संयंत्र, ट्रांसमिशन लाइन और वितरण नेटवर्क तैयार करने में समय और पूंजी लगती है। यदि किसी डेटा केंद्र को समय पर बिजली नहीं मिलती, तो उसकी सेवा प्रभावित हो सकती है और निवेश का लाभ देर से मिल सकता है।
नई व्यवस्था में परियोजनाओं के लिए सरकारी स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रस्तुति दौर रखे जाने का प्रस्ताव है। डेवलपर को अपनी योजना, बिजली और पानी की जरूरत, स्थान और आर्थिक योगदान समझाना होगा। इसके बाद एक केंद्रीय जांच निकाय आवेदन की समीक्षा करेगा और संबंधित समिति योग्य परियोजनाओं का चयन करेगी। इससे सीमित संसाधनों का उपयोग अधिक योजनाबद्ध तरीके से हो सकता है।
डेटा केंद्रों में पानी का उपयोग मुख्य रूप से शीतलन व्यवस्था से जुड़ा होता है। सर्वर लगातार काम करते हैं और गर्मी पैदा करते हैं। तापमान नियंत्रित रखने के लिए अलग-अलग तकनीक अपनाई जाती है, जिनमें कुछ प्रणालियां पानी का उपयोग करती हैं। यदि किसी क्षेत्र में पानी की कमी है, तो परियोजना को कम पानी वाली शीतलन तकनीक या पुनर्चक्रित पानी का विकल्प देखना पड़ सकता है।
भारत और एशिया के लिए इसका महत्व
⚠️ नई नीति का उद्योग पर असर
- • नई नीति: बिजली, पानी और आर्थिक योगदान की जांच
- • आवेदन: मंजूरी मिलने पर 2027 की शुरुआत में संभावित
- • पहले से स्वीकृत परियोजनाएं: मसौदे में पीछे से नियम लागू नहीं
- • उद्योग अवसर: UPS, बैटरी, शीतलन और विद्युत उपकरण
- • मुख्य चुनौती: ग्रिड क्षमता और जल संसाधन
पर्यावरणीय रिपोर्टिंग भी मसौदे का हिस्सा है। कंपनियों से बिजली खपत, पानी उपयोग और पर्यावरणीय असर की जानकारी मांगी जा सकती है। इसके साथ सार्वजनिक डैशबोर्ड का प्रस्ताव है, जिससे मंजूरी और परियोजना से जुड़े आंकड़े अधिक पारदर्शी हो सकते हैं। ऐसी जानकारी स्थानीय प्रशासन और बिजली कंपनियों को भविष्य की मांग का अनुमान लगाने में मदद दे सकती है।
मसौदे में पहले से चल रही परियोजनाओं पर नए नियम पीछे से लागू नहीं करने की बात भी कही गई है। इससे पहले निवेश कर चुकी कंपनियों को कुछ सुरक्षा मिलती है। हालांकि नई परियोजनाओं के लिए संसाधनों और स्थानीय लाभ की जांच अधिक कड़ी हो सकती है। अंतिम नियमों में इस व्यवस्था का दायरा और स्पष्ट किया जाएगा।
भारत के लिए Thailand का यह कदम महत्वपूर्ण उदाहरण हो सकता है। भारत में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल भुगतान के विस्तार के कारण डेटा केंद्रों की जरूरत बढ़ रही है। यदि बड़ी परियोजनाओं को बिजली और पानी की उपलब्धता से जोड़कर देखा जाए, तो सरकार और निवेशकों को शुरुआत में ही संसाधन योजना बनानी होगी।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
भारत में डेटा केंद्र स्थापित करने के लिए जमीन, बिजली, फाइबर नेटवर्क, सुरक्षा, कर नीति और पर्यावरणीय मंजूरी महत्वपूर्ण हैं। बड़े शहरों के आसपास डिजिटल सेवाओं की मांग अधिक है, लेकिन वहीं जमीन और बिजली की लागत भी बढ़ सकती है। इसलिए कुछ कंपनियां ऐसे स्थानों पर भी विचार करती हैं जहां बिजली और नेटवर्क की उपलब्धता के साथ परिचालन लागत संतुलित हो।
इस बदलाव से बिजली उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी अवसर मिल सकते हैं। डेटा केंद्रों को ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, बैकअप बिजली, केबल, बैटरी, शीतलन उपकरण और निगरानी प्रणालियों की जरूरत होती है। यदि परियोजनाओं की मंजूरी अधिक व्यवस्थित होती है, तो आपूर्तिकर्ताओं को मांग का अनुमान लगाने और उत्पादन योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, कड़ी जांच से कुछ परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में अधिक समय लग सकता है। जिन कंपनियों ने पहले से जमीन खरीद ली है लेकिन बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की, उन्हें अपनी योजना बदलनी पड़ सकती है। इससे कुछ निवेशक ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देंगे जहां ग्रिड क्षमता, पानी और प्रशासनिक सहायता पहले से उपलब्ध हो।
आगे किन बातों पर नजर रखनी होगी
निवेशकों को अब केवल घोषित परियोजनाओं की संख्या पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्हें यह देखना होगा कि कौन सी परियोजनाएं बिजली कनेक्शन हासिल कर चुकी हैं, किसे पर्यावरणीय मंजूरी मिली है और किसके पास वित्तीय व्यवस्था पूरी है। 117 प्रस्तावित परियोजनाओं की पूरी मांग एक साथ पूरी हो पाएगी या नहीं, यह बिजली उत्पादन और ग्रिड विस्तार पर निर्भर करेगा।
आगे की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी Thailand Cabinet का निर्णय, अंतिम चयन मानदंड और 2027 की आवेदन प्रक्रिया होगी। यदि नीति लागू होती है, तो डेटा केंद्र उद्योग में संसाधन दक्षता और बिजली योजना को ज्यादा महत्व मिलेगा। इससे परियोजनाओं की संख्या से अधिक उनकी व्यवहारिकता और स्थानीय लाभ पर ध्यान केंद्रित हो सकता है।
इस विषय पर मूल रिपोर्ट यहां पढ़ें: संबंधित उद्योग रिपोर्ट।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: Thailand के नए Data Centre Rules का उद्देश्य क्या है?
मसौदे का उद्देश्य नए डेटा केंद्रों को बिजली, पानी, पर्यावरणीय असर और स्थानीय आर्थिक योगदान के आधार पर चुनना है। इससे सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग और बिजली ग्रिड पर दबाव नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
सवाल 2: Thailand में कितनी परियोजनाएं मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं?
रिपोर्ट में 117 परियोजनाओं का उल्लेख है। इनकी संयुक्त बिजली मांग 29.6 गीगावाट से अधिक बताई गई है। यह मांग भविष्य की ग्रिड योजना के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
सवाल 3: क्या नए नियम पहले से चल रहे डेटा केंद्रों पर लागू होंगे?
मसौदे के अनुसार, मौजूदा परियोजनाओं पर नए नियम पीछे से लागू नहीं होंगे। हालांकि अंतिम नीति जारी होने पर सरकार द्वारा तय शर्तों और अपवादों को ध्यान से पढ़ना जरूरी होगा।
सवाल 4: डेटा केंद्रों को इतनी बिजली क्यों चाहिए?
डेटा केंद्रों में सर्वर लगातार चलते हैं और उन्हें ठंडा रखना पड़ता है। इसके अलावा नेटवर्क, सुरक्षा और बैकअप प्रणालियां भी बिजली लेती हैं। इसलिए उनकी बिजली मांग सामान्य इमारतों से बहुत अधिक होती है।
सवाल 5: भारत के डेटा सेंटर उद्योग को इससे क्या सीख मिलती है?
भारत को डेटा केंद्रों की मंजूरी के साथ बिजली, पानी, ग्रिड और पर्यावरण की योजना पहले से बनानी चाहिए। इससे परियोजनाओं में देरी घट सकती है और डिजिटल ढांचे का विकास अधिक टिकाऊ हो सकता है।
निष्कर्ष
Thailand का मसौदा दिखाता है कि डेटा केंद्रों का भविष्य केवल निवेश पर नहीं, बल्कि बिजली, पानी और ग्रिड क्षमता पर भी निर्भर है। भारत के लिए भी यह महत्वपूर्ण सीख है।
अस्वीकरण: यह लेख सार्वजनिक नीति रिपोर्ट पर आधारित है। मसौदे को अंतिम सरकारी नियम न मानें और आधिकारिक अधिसूचना जांचें।