हैदराबाद के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग यात्री को ट्रेन रद्द होने के बाद टिकट का Refund नहीं मिलने पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अब Consumer Commission ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को टिकट की रकम ब्याज सहित लौटाने और 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
ट्रेन रद्द होने के बाद Refund के लिए शुरू हुई कानूनी लड़ाई
हैदराबाद के कपरा निवासी एन.के. गणपति दिसंबर 2023 में तमिलनाडु गए थे। उन्होंने तिरुनेलवेली जाने के लिए तीन रेलवे टिकट बुक किए थे। लेकिन भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति के कारण उनकी ट्रेनें रद्द कर दी गईं।
ट्रेन रद्द होने के बाद गणपति ने अपनी यात्रा के लिए दूसरे विकल्पों का सहारा लिया और काफी परेशानियों का सामना करते हुए 22 दिसंबर 2023 को वापस हैदराबाद लौट आए।
रेलवे से Refund नहीं मिलने पर Consumer Commission पहुंचे
घर लौटने के बाद उन्होंने रद्द हुई टिकटों का पैसा वापस लेने के लिए South Central Railway अधिकारियों से संपर्क किया। हालांकि, रेलवे ने उनका Refund देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने Ranga Reddy District Consumer Commission में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई करते हुए Consumer Commission ने माना कि रेलवे की ओर से सेवा में कमी हुई है। आयोग ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय यात्री की पहली प्राथमिकता अपनी सुरक्षा और सुरक्षित घर पहुंचना होती है।
आयोग ने रेलवे की दलील को माना गलत
आयोग ने कहा कि ऐसे हालात में केवल तकनीकी कारणों के आधार पर Refund रोकना और यात्री को कई कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना सही नहीं है। यह सेवा में कमी के अंतर्गत आता है।
Consumer Commission ने South Central Railway को आदेश दिया कि वह यात्री की 5,955 रुपये की टिकट राशि 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। इसके अलावा बुजुर्ग यात्री को हुई परेशानी के लिए 15,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 10,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
रेलवे को 45 दिनों में करना होगा भुगतान
आयोग ने रेलवे को 45 दिनों के अंदर आदेश का पालन करने को कहा है। अगर तय समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो अतिरिक्त 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
यह मामला यात्रियों के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से यात्रा प्रभावित होने पर यात्रियों को उचित Refund और सुविधा मिलना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। किसी भी कानूनी मामले में विशेषज्ञ सलाह लें।
