भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था में यूपीआई को शुरू हुए 10 साल पूरे हो गए हैं। 25 अगस्त 2016 को शुरू हुई यह सुविधा आज देश में रोजमर्रा के भुगतान का बड़ा माध्यम बन चुकी है। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 241.62 अरब लेनदेन हुए, जो पिछले साल की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक हैं।
हालांकि, एक लेनदेन की औसत रकम घटकर करीब 1,300 रुपये रह गई है। महामारी के दौरान यह आंकड़ा 1,836 रुपये तक पहुंच गया था। जून 2026 में खुदरा भुगतान की संख्या में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 84 प्रतिशत और कुल रकम के हिसाब से करीब 58 प्रतिशत रही।
यूपीआई के 10 साल और डिजिटल भुगतान में बदलाव

महंगाई को समझने के लिए सेवाओं से जुड़ा एक नया आंकड़ा भी सामने आया है। वाणिज्य मंत्रालय ने जून 2026 में सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक शुरू किया था। इसका आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है। इसमें बैंकिंग, प्रतिभूति लेनदेन, बीमा, पेंशन फंड प्रबंधन, रेलवे, हवाई यात्री सेवाओं और दूरसंचार जैसी सात सेवाओं को शामिल किया गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में हवाई यात्री सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर 31.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि बैंकिंग क्षेत्र में गिरावट बनी रही। सरकार ने साफ किया है कि इन सेवाओं से पूरे सेवा क्षेत्र की तस्वीर नहीं मिलती, इसलिए इनके लिए कोई संयुक्त भार तय नहीं किया गया है।
देश में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने एक बार फिर ‘कांदा एक्सप्रेस’ का इस्तेमाल किया है। नासिक से विशेष रेल रेक के जरिए प्याज को उन शहरों तक भेजा जा रहा है जहां इसकी मांग ज्यादा है। यह व्यवस्था पहली बार अक्टूबर 2024 में कीमतों को स्थिर रखने के सरकारी प्रयास के तहत अपनाई गई थी।
इस बार नासिक के लासलगांव से प्याज दिल्ली भेजा जा रहा है और आगे दूसरे शहरों में भी इसकी आपूर्ति की योजना है। 22 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 36.5 प्रतिशत बढ़कर 38.7 रुपये प्रति किलो हो गई थी। थोक कीमत भी 40.5 प्रतिशत बढ़कर 31.2 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। दिल्ली में सरकार बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो बेचने की योजना बना रही है।
प्याज की कीमत और सरकारी कदम
निवेश और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बड़े आंकड़े भी चर्चा में रहे। सरकार को 11 हवाई अड्डों के निजीकरण से करीब 8,622 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। इनमें वाराणसी, अमृतसर और भुवनेश्वर जैसे हवाई अड्डे शामिल हैं। कोल इंडिया वित्त वर्ष 2030 तक सालाना एक अरब टन कोयला उत्पादन के लक्ष्य के लिए रेल संपर्क और कोयला ढुलाई पर एक लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है। इसमें कोयला गैसीकरण के लिए 30,000 करोड़ रुपये और रेलवे संपर्क के लिए 23,463 करोड़ रुपये शामिल हैं।
अप्रैल से जून की तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यह चार तिमाहियों का सबसे निचला स्तर हो सकता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कुछ सांख्यिकीय प्रभावों को इसके पीछे प्रमुख कारण माना गया है। इसके बावजूद अर्थशास्त्रियों के अनुमान में गिरावट पहले की आशंका से कम गंभीर दिखाई दे रही है। भारतीय रेलवे राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना के तहत करीब 2.62 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखता है। इसके लिए रेलवे लाइन, स्टेशन विकास, माल टर्मिनल, बिजली परियोजनाओं और बजट होटलों में निजी भागीदारी बढ़ाने की योजना है।
📱 यूपीआई और डिजिटल भुगतान
- शुरुआत: 25 अगस्त 2016
- 10 साल: 2026 में यूपीआई के 10 साल पूरे
- लेनदेन: वित्त वर्ष 2025-26 में 241.62 अरब
- बढ़ोतरी: पिछले साल से करीब 30 प्रतिशत अधिक
- खुदरा भुगतान: जून 2026 में करीब 84 प्रतिशत हिस्सेदारी
- औसत रकम: एक लेनदेन में करीब 1,300 रुपये
प्रवासी भारतीयों की जमा राशि में भी बदलाव देखने को मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में एनआरआई जमा 23 प्रतिशत घटकर 2.8 अरब डॉलर रह गया। इसकी मुख्य वजह रुपये में रखे जाने वाले एनआरई खातों में कमी रही। वहीं विदेशी मुद्रा में जमा राशि बढ़ी। रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ाने के लिए जून में विशेष डॉलर-रुपया अदला-बदली सुविधा शुरू की थी। इसके बाद विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़कर 1.7 अरब डॉलर हो गया।
जुलाई में भारत उभरते बाजारों की सूची में भी पहले स्थान पर रहा। उसे 100 में से 77.3 अंक मिले, जबकि वियतनाम और मलेशिया दोनों 73.2 अंक के साथ पीछे रहे। भारत की आर्थिक वृद्धि, निर्यात और शेयर बाजार में विदेशी निवेश ने इसकी स्थिति मजबूत की। जुलाई में निर्यात वृद्धि 19.5 प्रतिशत रही। हालांकि विनिर्माण पीएमआई घटकर 53.5, महंगाई बढ़कर 4.5 प्रतिशत और रुपये की डॉलर के मुकाबले कीमत में 0.9 प्रतिशत की गिरावट रही, जिससे भारत के कुल अंक पर असर पड़ा।
📊 अर्थव्यवस्था के प्रमुख आंकड़े
- जीडीपी वृद्धि: 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान
- एनआरआई जमा: 23 प्रतिशत घटकर 2.8 अरब डॉलर
- निर्यात वृद्धि: जुलाई में 19.5 प्रतिशत
- उभरते बाजार: भारत को पहला स्थान
- भारत का स्कोर: 100 में से 77.3 अंक
- महंगाई: जुलाई में 4.5 प्रतिशत
Frequently asked questions
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. यूपीआई की शुरुआत कब हुई थी?
यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को हुई थी। पिछले दस वर्षों में यह भारत में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन गया है। आज लोग इसका इस्तेमाल खरीदारी, बिल भुगतान, पैसे भेजने और कई रोजमर्रा के खर्चों के लिए करते हैं।
2. 2026 में प्याज की कीमत क्यों बढ़ी?
अगस्त 2026 में प्याज के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। खुदरा और थोक दोनों बाजारों में कीमत बढ़ी। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने नासिक से दिल्ली सहित अन्य शहरों तक बफर स्टॉक पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की।
3. भारत की आर्थिक वृद्धि दर कितनी रहने का अनुमान है?
अप्रैल से जून 2026 की अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। पश्चिम एशिया में तनाव और अन्य आर्थिक प्रभावों के कारण वृद्धि की रफ्तार पिछली कुछ तिमाहियों की तुलना में धीमी रहने की संभावना है।
4. एनआरआई जमा राशि में कितनी गिरावट आई?
वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में एनआरआई जमा 23 प्रतिशत घटकर 2.8 अरब डॉलर रह गई। रुपये वाले एनआरई खातों में कमी इसका प्रमुख कारण रही, जबकि विदेशी मुद्रा में जमा राशि के प्रवाह में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
5. उभरते बाजारों में भारत का स्थान क्या रहा?
जुलाई 2026 में भारत ने उभरते बाजारों की सूची में पहला स्थान हासिल किया। उसे 100 में से 77.3 अंक मिले। मजबूत आर्थिक वृद्धि, निर्यात में तेजी और शेयर बाजार में विदेशी निवेश ने भारत की बेहतर स्थिति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निष्कर्ष:
भारत की अर्थव्यवस्था में इस सप्ताह डिजिटल भुगतान, महंगाई, प्याज की कीमत, एनआरआई जमा और विकास दर से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए। आंकड़े बताते हैं कि कुछ क्षेत्रों में दबाव के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति में मजबूती बनी हुई है।