दिल्ली से नागालैंड के दीमापुर तक घर का सामान भेजने के लिए ₹1.15 लाख देने वाली एक महिला को करीब दो महीने की देरी के बाद भी पूरा सामान नहीं मिला। उनके सामान में से 23 चीजें गायब थीं और एलईडी टीवी तथा एयर कंडीशनर समेत कई वस्तुएं खराब हालत में पहुँचीं। इस मामले में दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी और अर्बन कंपनी को कुल ₹3.5 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया। यह मामला उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है, क्योंकि सामान भेजने की सेवा लेते समय समय पर डिलीवरी और नुकसान की जिम्मेदारी स्पष्ट होना चाहिए।
दिल्ली से नागालैंड सामान भेजने में क्या हुआ?
शिकायतकर्ता लॉन्गचार ने सितंबर 2020 में अर्बन कंपनी के माध्यम से घर बदलने की सेवा बुक की थी। सामान में फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, घर की दूसरी चीजें और उनकी कार शामिल थी। सामान 20 सितंबर 2020 को ट्रक में लादा गया, लेकिन उसे पहुँचने में काफी देर हुई। कार 23 अक्टूबर को मिल गई, जबकि घर का बाकी सामान 19 नवंबर को पहुँचा।
सामान की जाँच करने पर महिला को पता चला कि भेजी गई 93 वस्तुओं में से केवल 70 ही मिलीं। बाकी 23 वस्तुएँ गायब थीं। एयर कंडीशनर टूटा हुआ था और मरम्मत के लायक नहीं बताया गया। एलईडी टीवी के साथ बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान भी क्षतिग्रस्त मिले।
📦 सामान की डिलीवरी में सामने आई समस्याएँ
- भुगतान: सेवा के लिए ₹1.15 लाख दिए गए
- देरी: सामान पहुँचने में लगभग दो महीने लगे
- गायब सामान: भेजी गई 93 वस्तुओं में से 23 नहीं मिलीं
- नुकसान: एलईडी टीवी, एयर कंडीशनर और दूसरी चीजें खराब मिलीं
- शिकायत: महिला ने मुआवजे के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख किया
पैकर्स एंड मूवर्स ने क्या जवाब दिया?
महिला के अनुसार, शुरुआत में सामान ढोने वाली कंपनी ने खराब वस्तुओं की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया और दूसरे पक्षों को दोष दिया। कई बार बात करने के बाद कंपनी ने एयर कंडीशनर के नुकसान के लिए ₹25,000 देने की बात कही। अन्य खराब वस्तुओं के लिए भी मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया था।
कंपनी ने गायब हुई 23 वस्तुएँ कूरियर से भेजने की बात भी कही, लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक वे वस्तुएँ उन्हें कभी नहीं मिलीं। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने सेवा के लिए दिए गए ₹1.15 लाख वापस करने के साथ आर्थिक नुकसान, मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए भी मुआवजा माँगा। उनकी कुल माँग ₹7.75 लाख थी।
अर्बन कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी पर क्या कहा?
अर्बन कंपनी ने आयोग के सामने कहा कि उसका मंच ग्राहकों को स्वतंत्र सेवा प्रदाताओं से जोड़ता है, इसलिए वह सामान के नुकसान या भुगतान की वापसी के लिए जिम्मेदार नहीं है। आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। उसने दस्तावेजों में देखा कि संबंधित मूविंग कंपनी की अर्बन कंपनी के मंच पर 4.45 की रेटिंग थी।
आयोग के अनुसार, ग्राहक सेवा बुक करने से पहले मंच पर दी गई रेटिंग को देख सकते हैं। इसलिए केवल मध्यस्थ होने की दलील देकर जिम्मेदारी से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता। आयोग ने देरी, खराब सामान और 23 वस्तुओं के गायब होने को सेवा में गंभीर कमी माना। उपभोक्ता अपने अधिकारों के बारे में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की वेबसाइट पर भी जानकारी ले सकते हैं।
⚖️ उपभोक्ता आयोग का मुआवजे पर फैसला
- पैकर्स एंड मूवर्स: ₹3 लाख मुआवजा देने का निर्देश
- अर्बन कंपनी: ₹50,000 देने का निर्देश
- मुआवजे का कारण: सेवा में कमी, मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और कानूनी खर्च
- कुल राशि: दोनों कंपनियों से ₹3.5 लाख
- समय सीमा: आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर भुगतान
कंज्यूमर कमीशन ने कितना मुआवजा देने को कहा?
दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी को सामान की हानि और खराबी तथा सेवा में कमी के लिए ₹3 लाख देने का आदेश दिया। अर्बन कंपनी को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च के लिए ₹50,000 देने को कहा गया। दोनों कंपनियों को आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर भुगतान करना है।
सामान शिफ्ट कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
घर का सामान भेजने से पहले सभी वस्तुओं की सूची और उनकी तस्वीरें सुरक्षित रखें। बुकिंग की रसीद, भुगतान का प्रमाण, सेवा की शर्तें और कंपनी से हुई बातचीत को संभालकर रखें। टीवी या अन्य महँगे उपकरणों की पैकिंग और बीमा से जुड़ी शर्तें पहले पूछ लें। सामान पहुँचने पर सूची से मिलान करें और नुकसान दिखे तो तुरंत लिखित शिकायत करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. इस मामले में महिला ने कितने रुपये दिए थे?
महिला ने दिल्ली से नागालैंड के दीमापुर तक घरेलू सामान भेजने के लिए ₹1.15 लाख का भुगतान किया था। सामान देर से पहुँचा, 23 वस्तुएँ गायब थीं और कई चीजें टूटी हुई मिलीं।
2. उपभोक्ता आयोग ने कुल कितना मुआवजा तय किया?
आयोग ने दोनों कंपनियों को मिलाकर ₹3.5 लाख देने का निर्देश दिया। इसमें पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी के लिए ₹3 लाख और अर्बन कंपनी के लिए ₹50,000 शामिल हैं।
3. कितनी घरेलू वस्तुएँ गायब मिली थीं?
शिकायतकर्ता ने 93 वस्तुएँ भेजी थीं, लेकिन उन्हें केवल 70 मिलीं। इस तरह 23 वस्तुएँ गायब थीं। इसके अलावा एलईडी टीवी, एयर कंडीशनर और कुछ अन्य सामान क्षतिग्रस्त अवस्था में पहुँचे।
4. अर्बन कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी को लेकर क्या दलील दी?
अर्बन कंपनी ने कहा कि उसका मंच स्वतंत्र सेवा प्रदाताओं को ग्राहकों से जोड़ता है। आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और माना कि मंच पर दिखाई गई सेवा प्रदाता की रेटिंग ग्राहक के फैसले को प्रभावित कर सकती है।
5. सामान भेजने के दौरान नुकसान हो तो ग्राहक क्या कर सकता है?
ग्राहक सामान की सूची, तस्वीरें, भुगतान रसीद और कंपनी के साथ हुई बातचीत के प्रमाण सुरक्षित रख सकता है। पहले कंपनी को लिखित शिकायत देनी चाहिए। समाधान न मिले तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन या उपभोक्ता आयोग से मदद ली जा सकती है।
निष्कर्ष
यह मामला बताता है कि सामान शिफ्ट कराने की सेवा चुनते समय केवल कीमत या रेटिंग देखना काफी नहीं है। लिखित शर्तें, सामान की सूची और नुकसान की जिम्मेदारी पहले स्पष्ट करें। सेवा में कमी होने पर प्रमाण सुरक्षित रखकर शिकायत करना उपभोक्ता के लिए मददगार हो सकता है।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। कानूनी सलाह के लिए योग्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।