अमेरिका से एशिया तक कच्चा तेल पहुँचाना पहले के मुकाबले काफी महँगा हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के बाद समुद्री रास्तों पर जोखिम बढ़ा है और तेल टैंकर किराए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुँच गए हैं। इसका असर एशियाई रिफाइनरियों की खरीद पर दिखाई दे रहा है।
टैंकर का किराया बढ़ने से तेल कारोबार पर दबाव
अमेरिका के खाड़ी तट से चीन तक कच्चा तेल ले जाने वाले बड़े टैंकर का किराया गुरुवार तक करीब 6 करोड़ डॉलर पहुँच गया। फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद यह दर तीन गुने से अधिक हो चुकी है। इसी महीने किराया बढ़कर लगभग 7.96 करोड़ डॉलर तक भी पहुँचा था। संघर्ष से पहले के पाँच वर्षों में इस मार्ग पर औसत किराया 80 लाख डॉलर से कम था।
करीब 30 दिन की यात्रा के लिए सबसे बड़े तेल टैंकर को किराए पर लेना अब नया जहाज़ बनाने की लागत के लगभग आधे के बराबर पड़ सकता है। इसमें कच्चे तेल की कीमत शामिल नहीं है, जो करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही है। Valero Energy के तेल कारोबार प्रमुख रैंडी हॉकिन्स के अनुसार, केवल ढुलाई पर हर बैरल के लिए 30 से 35 डॉलर तक खर्च हो सकता है। यह पिछले साल के मुकाबले सात गुना तक है।
तेल टैंकर किराये में तेज उछाल
- मुख्य मार्ग: अमेरिका के खाड़ी तट से चीन
- हाल का किराया: करीब 60 मिलियन डॉलर
- इस महीने का उच्च स्तर: लगभग 79.6 मिलियन डॉलर
- संघर्ष से पहले औसत: 8 मिलियन डॉलर से कम
- प्रभाव: एशिया तक तेल पहुँचाने की लागत बढ़ी
एशियाई रिफाइनरियों की खरीद में बड़ी कमी
व्यापारियों के अनुसार, नवंबर में डिलीवरी के लिए एशियाई रिफाइनरियों द्वारा अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद इस महीने करीब 50 प्रतिशत घटकर 2.4 करोड़ से 2.6 करोड़ बैरल रह गई। यदि महीने के अंत तक यही रफ्तार बनी रहती है, तो यह लगभग सात वर्षों का सबसे निचला स्तर हो सकता है। हालांकि, कुछ कारोबारियों को उम्मीद है कि महीने के अंत में होने वाले सौदों से कुल मात्रा 4 करोड़ बैरल तक पहुँच सकती है।
ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी Vortexa का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं दिख रहा जिससे निकट भविष्य में खरीद में तेज उछाल की उम्मीद की जा सके। कंपनी के विश्लेषक रोहित राठौड़ के मुताबिक, महँगी ढुलाई के कारण अमेरिका से एशिया तक लंबी दूरी पर तेल भेजने का आर्थिक फायदा कम हो गया है।
अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर
एशियाई मांग घटने का असर अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। टेक्सास के पर्मियन बेसिन से निर्यात होने वाला तेल बुधवार को Magellan East Houston केंद्र पर बेंचमार्क वायदा कीमत से केवल 25 सेंट ऊपर कारोबार कर रहा था। छह सप्ताह पहले इसका प्रीमियम 3 डॉलर से अधिक था।
मेक्सिको की खाड़ी में गहरे समुद्र से निकाला जाने वाला मध्यम गुणवत्ता का Mars कच्चा तेल भी सस्ता हुआ है। वायदा कीमत के मुकाबले इसका प्रीमियम मार्च के आखिर में 17.50 डॉलर था, जो घटकर 6 डॉलर रह गया। यह बदलाव दिखाता है कि महँगी ढुलाई और कमजोर मांग अमेरिकी तेल के कारोबार को प्रभावित कर रही है।
शिपिंग संकट के पीछे प्रमुख वजहें
- समुद्री जोखिम: होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव
- जहाज़ों की कमी: छोटे टैंकरों से तेल उठाकर बड़े जहाज़ों में स्थानांतरण
- अतिरिक्त खर्च: बीमा और ईंधन की ऊँची लागत
- खरीदारों पर असर: अमेरिका से तेल खरीदने का आर्थिक लाभ घटा
- व्यापक नतीजा: वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर दबाव
होर्मुज के आसपास जहाज़ों की आवाजाही क्यों मुश्किल हुई?
Valero के अनुसार, फारस की खाड़ी में अब छोटे जहाज़ों का इस्तेमाल बढ़ा है, क्योंकि उनके ईरान की ओर से हमले की चपेट में आने की आशंका अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। जलडमरूमध्य पार करने के बाद उनका तेल ओमान की खाड़ी में इंतजार कर रहे बड़े जहाज़ों में स्थानांतरित किया जाता है। इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता है और कई टैंकर लंबे समय तक व्यस्त रहते हैं।
इसके अलावा, बीमा प्रीमियम और ईंधन की ऊँची कीमतें भी ढुलाई महँगी बना रही हैं। इस विषय पर वैश्विक तेल बाजार की जानकारी के लिए LiveMint पर भी रिपोर्ट देखी जा सकती है। जब तक समुद्री मार्गों पर जोखिम और माल ढुलाई की लागत कम नहीं होती, तब तक एशियाई खरीदारों के लिए अमेरिका से कच्चा तेल मँगाना कम आकर्षक रह सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। ऊर्जा बाजार की कीमतें और परिस्थितियाँ तेजी से बदल सकती हैं। निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
