अमेरिका में नौकरी कमजोर, क्या अब ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी?

अमेरिका में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बदलती उम्मीदें वैश्विक बाजारों, खासकर भारत पर भी असर डाल सकती हैं।

हाल ही में अमेरिकी बाजार में यह उम्मीद बढ़ गई थी कि फेडरल रिजर्व इस साल तीन बार तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है और पहली बढ़ोतरी सितंबर में हो सकती है, क्योंकि महंगाई अभी भी तय लक्ष्य 2% से ऊपर बनी हुई है।

फेड की ब्याज दर उम्मीदों में बदलाव

लेकिन जून महीने के कमजोर जॉब डेटा के बाद यह सोच बदलने लगी है। अब बाजार के लोग मान रहे हैं कि फेड शायद इतनी तेज़ी से दरें नहीं बढ़ाएगा। CME FedWatch टूल के अनुसार सितंबर में दर बढ़ने की संभावना पहले 66% थी, जो अब घटकर करीब 54% रह गई है।

📉 अमेरिकी जॉब मार्केट डेटा (जून)

  • निजी नौकरियां: ~98,000
  • नॉन-फार्म पेरोल: ~57,000
  • अनुमान: इससे अधिक था
  • संशोधन: अप्रैल और मई के आंकड़े नीचे
  • संकेत: रोजगार बाजार कमजोर

अमेरिका में निजी कंपनियों की नौकरियों और नॉन-फार्म पेरोल के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। जून में निजी नौकरियां करीब 98,000 बढ़ीं जबकि अनुमान इससे ज्यादा था। वहीं नॉन-फार्म पेरोल केवल 57,000 बढ़ी, जो अनुमान से काफी कम है। इसके अलावा अप्रैल और मई के आंकड़ों को भी नीचे की तरफ संशोधित किया गया है, जिससे यह संकेत मिला कि रोजगार बाजार पहले जितना मजबूत नहीं है।

फेड नीति और महंगाई का दबाव

कमजोर नौकरी के आंकड़ों के कारण फेडरल रिजर्व पर दबाव बढ़ सकता है कि वह ब्याज दरें आक्रामक तरीके से न बढ़ाए। हालांकि फेड अभी भी महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने पर ध्यान दे रहा है। फेड चेयर ने कहा है कि कीमतों को स्थिर करना उनकी प्राथमिकता है, भले ही महंगाई अभी ज्यादा है। अगली बड़ी बैठक 28-29 जुलाई को होनी है और 14 जुलाई को आने वाला महंगाई डेटा इस फैसले में अहम भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो फेड आगे जाकर एक और दर बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं कुछ का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें और कम रहती हैं तो महंगाई भी घट सकती है और तब फेड दरें रोक सकता है। कुल मिलाकर इस साल दरों को लेकर स्थिति काफी अनिश्चित बनी हुई है।

भारत पर संभावित असर

अमेरिका की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। अगर अमेरिका में दरें और बढ़ती हैं तो डॉलर मजबूत होगा और अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा आकर्षक बनेंगे। इससे विदेशी निवेशक (FPI) भारत से पैसा निकालकर अमेरिका में निवेश कर सकते हैं, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव आ सकता है।

💰 भारत पर संभावित प्रभाव

  • FPI फ्लो: बाहर जा सकता है
  • डॉलर: मजबूत हो सकता है
  • रुपया: कमजोर होने की संभावना
  • बाजार: दबाव में आ सकता है
  • नीति असर: घरेलू दरों पर प्रभाव

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इससे रुपये पर भी असर पड़ेगा और वह कमजोर हो सकता है। साथ ही भारत में भी ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है क्योंकि घरेलू नीतियां अक्सर वैश्विक रुझानों के साथ चलती हैं। इसलिए फेड के फैसले का असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर फेड की नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और इसका प्रभाव वैश्विक बाजारों पर लगातार देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है, निवेश निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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