अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे इस समय सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ती चिंता और वैश्विक सप्लाई को लेकर आशंका ने तेल बाजार को फिर से अस्थिर कर दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब कच्चे तेल के बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में उछाल
ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। माना जा रहा है कि अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए नए हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसकी वजह से तेल के दाम ऊपर गए हैं।
🛢️ कच्चे तेल की ताजा कीमतें और बढ़त
- ब्रेंट क्रूड: 75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर
- WTI क्रूड: मजबूत बढ़त के साथ कारोबार
- बुधवार की तेजी: करीब 2 प्रतिशत उछाल
- मुख्य वजह: अमेरिका-ईरान तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता
- जोखिम क्षेत्र: होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल व्यापार
- बाजार संकेत: पश्चिम एशिया तनाव से तेल कीमतों पर दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त डिलीवरी वाला वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 2.1 प्रतिशत बढ़कर 71.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं सितंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 1.9 प्रतिशत की तेजी के साथ 75.53 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल बाजार में यह उछाल ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और तेहरान से जुड़े कुछ अहम तेल निर्यात रास्तों पर दबाव बढ़ गया है।
WTI और ब्रेंट क्रूड के ताजा भाव
तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव है। अमेरिका ने कहा है कि उसने व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के खिलाफ शक्तिशाली सैन्य कार्रवाई की है। वहीं ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा अमेरिका ने वह छूट भी वापस ले ली है, जिसके तहत ईरान को कुछ शर्तों के साथ तेल निर्यात की अनुमति मिली हुई थी। इस फैसले ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने का डर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है। हाल के दिनों में जहाजों पर हुए हमलों और सैन्य गतिविधियों ने शिपिंग कंपनियों और तेल उत्पादक देशों की चिंता बढ़ा दी है। अगर इस रास्ते से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
⚠️ होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों टिकी है बाजार की नजर?
- अहम मार्ग: दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है
- बढ़ता तनाव: जहाजों पर हमले और सैन्य गतिविधियां चिंता बढ़ा रही हैं
- सप्लाई जोखिम: आवाजाही प्रभावित होने पर वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है
- कीमतों पर असर: तेल के दामों में और तेजी देखने को मिल सकती है
- बाजार फोकस: अमेरिका-ईरान तनाव और समुद्री सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
- निवेशकों की नजर: पश्चिम एशिया के हर नए घटनाक्रम पर बनी हुई है
वैश्विक सप्लाई और बाजार की आगे की चिंता
हालांकि इससे पहले कुछ अंतरराष्ट्रीय बैंकों और बाजार विशेषज्ञों का मानना था कि आने वाले समय में तेल बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। ओपेक प्लस भी धीरे-धीरे उत्पादन कटौती में राहत देने की दिशा में बढ़ रहा था। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने बाजार की धारणा बदल दी है। अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और वैश्विक सप्लाई पर बनी हुई है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेजी बनी रह सकती है।
डिस्क्लेमर: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई स्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं, निवेश से पहले ताजा अपडेट जरूर देखें।

