US-ईरान तनाव से चढ़ा कच्चा तेल, Brent $110 तक जा सकता है

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब crude oil prices पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि यदि तनाव और बढ़ा तो मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ेगा।

Brent crude 33 सेंट यानी करीब 0.4% बढ़कर 85.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI crude 42 सेंट यानी 0.5% की बढ़त के साथ 80.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले तीन कारोबारी सत्रों में ब्रेंट करीब 12% तक चढ़ चुका है और अब कीमतें लगभग एक महीने के उच्च स्तर के आसपास बनी हुई हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव से Crude Oil Prices में लगातार तेजी

तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं। साथ ही अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान की ओर जा रहे एक खाली तेल टैंकर को भी रोकने की जानकारी दी है। इन घटनाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है कि यदि हालात और बिगड़े तो तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

🛢️ Crude Oil Market Update

  • Brent Crude: 85.28 डॉलर प्रति बैरल
  • WTI Crude: 80.02 डॉलर प्रति बैरल
  • लगातार तेजी: चौथा कारोबारी सत्र
  • मुख्य वजह: अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव
  • बाजार चिंता: मध्य पूर्व से तेल सप्लाई पर खतरा
  • प्रभाव: वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता

Strait of Hormuz पर बढ़ी बाजार की चिंता

बाजार की सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान जहाजों पर हमले बंद नहीं करता और इस समुद्री मार्ग को दोबारा नहीं खोलता, तब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल Kharg Island को भी निशाना बनाने के विकल्प पर विचार कर रहा है। दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि जब तक अमेरिका सैन्य हमले और बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा।

📈 एक्सपर्ट्स का ऑयल प्राइस आउटलुक

  • Goldman Sachs: Brent 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है
  • Choice Broking: Brent 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर सकता है
  • जोखिम: होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने की आशंका
  • सकारात्मक स्थिति: तनाव घटने पर कीमतें 60 डॉलर तक लौट सकती हैं
  • निवेशकों की नजर: अमेरिका-ईरान तनाव और तेल सप्लाई

विशेषज्ञों ने जताई तेल कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका

तनाव के कारण तेल टैंकरों के संचालन पर भी असर पड़ रहा है। हाल के महीनों में कई देश समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करके सप्लाई जारी रख रहे थे, लेकिन मौजूदा हालात ने इस व्यवस्था को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही जारी है और कई जहाजों को अमेरिकी सेना की सुरक्षा भी मिल रही है।

Goldman Sachs का अनुमान है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है तो इस साल की चौथी तिमाही में Brent crude 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच सकता है। हालांकि अगर भू-राजनीतिक तनाव कम हो जाता है और उत्पादन तेजी से बढ़ता है तो साल के अंत तक कीमतें फिर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक लौट सकती हैं।

वहीं Choice Broking के कमोडिटी विशेषज्ञ आमिर मकदा का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ने पर Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकता है। उनके अनुसार फिलहाल बाजार में जोखिम को लेकर प्रीमियम जुड़ चुका है और यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन प्रभावित हुआ तो निवेशकों की खरीदारी और बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति केवल तेल बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक महंगाई, ऊर्जा लागत और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े हर नए घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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