अमेरिका के लेबर मार्केट से जुड़ी ताजा रिपोर्ट में जून 2026 के दौरान रोजगार वृद्धि में तेज गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार इस महीने देश में केवल लगभग 57,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो पिछले महीनों की तुलना में काफी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण बढ़ती महंगाई, वैश्विक अनिश्चितताएं और आर्थिक दबाव हैं, जिनकी वजह से कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती में सतर्क रुख अपना रही हैं।
अमेरिका में जून 2026 की नौकरी रिपोर्ट
हालांकि बेरोजगारी दर में मामूली सुधार देखने को मिला है और यह घटकर 4.2 प्रतिशत पर आ गई है। लेकिन यह कमी मुख्य रूप से इस वजह से मानी जा रही है कि कई बेरोजगार लोग अब नौकरी की तलाश छोड़ रहे हैं, जिससे उन्हें आधिकारिक बेरोजगार आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मई 2026 की तुलना में जून में नौकरी वृद्धि आधे से भी कम रही, जो यह संकेत देता है कि अमेरिकी कंपनियां फिलहाल आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर अनिश्चित हैं। पिछले कुछ महीनों में भी रोजगार के आंकड़ों में लगातार संशोधन किया गया है, जिससे वास्तविक स्थिति और अधिक कमजोर दिखाई दे रही है।
बेरोजगारी दर और नौकरी सृजन का ट्रेंड
विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मध्यम गति से बढ़ रही है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार पहले की तुलना में धीमी हो सकती है। पहली तिमाही में देश की GDP लगभग 2.1 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी थी, हालांकि आगे के महीनों के लिए आर्थिक मंदी की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अब श्रम बाजार पर कई संरचनात्मक बदलावों का असर पड़ रहा है। एक ओर जहां जन्म दर और इमिग्रेशन में कमी के कारण वर्कफोर्स की वृद्धि सीमित हो रही है, वहीं दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर यह चिंता बढ़ रही है कि भविष्य में यह कई तरह की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है।
अर्थव्यवस्था और भविष्य की अनिश्चितता
आर्थिक जानकारों का अनुमान था कि जून में करीब 1 लाख नई नौकरियां जुड़ सकती हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे काफी कम रहा। खासकर हॉस्पिटैलिटी और सरकारी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन कुल मिलाकर यह वृद्धि अपेक्षा से कमजोर साबित हुई।
कुल मिलाकर, जून 2026 के रोजगार आंकड़े यह संकेत देते हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है और कंपनियां आने वाले समय को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। हालांकि बेरोजगारी दर स्थिर बनी हुई है, लेकिन नौकरी सृजन में आई गिरावट अर्थव्यवस्था की गति पर सवाल खड़े करती है।

