टाटा स्टील ने अपने यूके (UK) कारोबार के मुनाफे में सुधार का लक्ष्य आगे बढ़ा दिया है। कंपनी अब उम्मीद कर रही है कि उसका ब्रिटेन स्थित बिजनेस Financial year 2028-29 तक लाभ में आ जाएगा, जबकि पहले यह लक्ष्य 2025-26 रखा गया था। यह बदलाव मुख्य रूप से वहां चल रहे बड़े संरचनात्मक बदलाव और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) प्रोजेक्ट में हो रही देरी के कारण किया गया है।
Tata Steel UK बिजनेस का मुनाफा लक्ष्य FY29 तक टला
कंपनी के चेयरमैन ने बताया कि यूके कारोबार के लिए अब लक्ष्य यह है कि वह FY29 तक न केवल EBITDA के स्तर पर बल्कि कर के बाद मुनाफे (PAT) के स्तर पर भी सकारात्मक हो जाए। उनका कहना है कि जैसे ही EAF प्रोजेक्ट पूरा होगा, कंपनी वहां के घाटे को पूरी तरह खत्म करने की स्थिति में आ सकती है। पहले यह उम्मीद FY28 तक परियोजना पूरी होने की थी, लेकिन अब इसे एक वर्ष आगे बढ़ाकर FY29 कर दिया गया है।
इस देरी का मुख्य कारण ब्रिटेन की नेशनल ग्रिड से बिजली कनेक्शन मिलने में आ रही बाधाएं बताई गई हैं। टाटा स्टील का मानना है कि यह परियोजना उसके यूके संचालन को पूरी तरह बदल देगी, क्योंकि इसके तहत पुराने ब्लास्ट फर्नेस को हटाकर आधुनिक और कम उत्सर्जन वाली उत्पादन तकनीक अपनाई जा रही है।
यूके EAF प्रोजेक्ट में देरी के कारण
टाटा स्टील ने पहले ही पोर्ट टैलबॉट स्थित अपने दोनों ब्लास्ट फर्नेस बंद कर दिए हैं और फिलहाल कंपनी वहां आयातित स्टील स्लैब को प्रोसेस करके डाउनस्ट्रीम गतिविधियां चला रही है। कंपनी का उद्देश्य धीरे-धीरे अपने यूके ऑपरेशन को अधिक कुशल और कम लागत वाला बनाना है।
कंपनी के अनुसार भारत उसका मुख्य विकास और नकदी (cash flow) का स्रोत बन चुका है। पिछले दस वर्षों में भारत में टाटा स्टील की Ebitda कमाई लगभग 10,000 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिससे कंपनी को अपने अंतरराष्ट्रीय पुनर्गठन में मदद मिल रही है।
भारत बना टाटा स्टील का मुख्य ग्रोथ इंजन
यूके में कंपनी को सस्ते आयात और कमजोर कीमतों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वहां का बाजार लगातार दबाव में है। इसके अलावा नीदरलैंड्स में भी कंपनी को नियामकीय (regulatory) चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके समाधान के लिए वह वहां की सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY26 में टाटा स्टील की कुल परिचालन आय में लगभग 6% की वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ भी तीन गुना बढ़कर 10,793 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। कंपनी की कुल आय में यूके बिजनेस का योगदान लगभग 10% के आसपास है।
वित्तीय प्रदर्शन और वैश्विक रणनीति
कुल मिलाकर टाटा स्टील का ध्यान अब अपने विदेशी कारोबार के पुनर्गठन और भारत में मजबूत आधार के सहारे वैश्विक संचालन को संतुलित करने पर केंद्रित है, ताकि आने वाले वर्षों में कंपनी अधिक स्थिर और लाभदायक संरचना तैयार कर सके।

