World Gold Council रिपोर्ट: केंद्रीय बैंक सोना खरीद जारी

World Gold Council की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक केंद्रीय बैंक अब भी सोने की खरीदारी को लेकर सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं। मई 2026 में विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों ने कुल मिलाकर लगभग 41 टन सोना नेट आधार पर खरीदा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक स्तर पर सोना अभी भी विदेशी मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी में बढ़ोतरी

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस खरीदारी में मुख्य योगदान पोलैंड और चीन जैसे देशों का रहा। पोलैंड ने लगभग 18 टन और चीन ने करीब 10 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। इसके अलावा उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान ने भी लगातार सोना खरीदने की प्रवृत्ति जारी रखी। सिंगापुर ने भी काफी समय बाद दोबारा सोना खरीदा और अपने भंडार में लगभग 4 टन की वृद्धि की।

वहीं दूसरी ओर कुछ देशों ने सोने की बिक्री भी की। तुर्की और रूस इस महीने प्रमुख विक्रेता रहे, जिन्होंने अपने भंडार से क्रमशः लगभग 3 टन और 6 टन सोना कम किया। इसके बावजूद वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़े बताते हैं कि कई देश लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं, जिनमें पोलैंड सबसे आगे है।

पोलैंड और चीन की सोने की रणनीति

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पोलैंड ने अब तक वर्ष के दौरान लगभग 64 टन सोना जमा किया है और उसका कुल भंडार 600 टन से अधिक हो चुका है। चीन का सोने का भंडार भी लगातार बढ़ रहा है और वह दुनिया के शीर्ष खरीदार देशों में शामिल है। उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान भी अपने कुल विदेशी भंडार में सोने की हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ा रहे हैं।

विश्व गोल्ड काउंसिल के सर्वे के अनुसार अधिकांश केंद्रीय बैंकों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग और भंडार दोनों में वृद्धि होगी। लगभग 90 प्रतिशत केंद्रीय बैंक अधिकारियों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक गोल्ड रिजर्व बढ़ेगा, जबकि रिकॉर्ड स्तर पर केंद्रीय बैंक अपने स्वयं के भंडार में भी वृद्धि की योजना बना रहे हैं।

केंद्रीय बैंकों का बदलता रुख और वैश्विक ट्रेंड

विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय बैंक अब सोने को एक सुरक्षित और स्थिर संपत्ति के रूप में देख रहे हैं, खासकर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रा उतार-चढ़ाव के बीच। इसी कारण कई देश अपनी विदेशी मुद्रा रणनीति में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दक्षिण कोरिया जैसे कुछ देश अब Gold ETF के माध्यम से सोने में निवेश की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि यह तरीका भंडारण लागत कम करने और अधिक तरलता (liquidity) प्रदान करने में मदद करता है। हालांकि अभी भी अधिकांश केंद्रीय बैंक सीधे सोना खरीदकर ही अपने भंडार में जोड़ते हैं।

लैटिन अमेरिका में भी सोने की खरीदारी में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है, जहां चिली, ग्वाटेमाला, बोलिविया और उरुग्वे जैसे देशों ने सीमित मात्रा में अपने सोने के भंडार को बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में सोने की मांग और अधिक बढ़ सकती है।

Gourav Kumar Singh

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