भारत सरकार देश में semiconductor (चिप) निर्माण और डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए नई योजना पर काम कर रही है। India Semiconductor Mission (ISM) के CEO अमितेश सिन्हा के अनुसार, नई incentive scheme के तहत भारतीय chip design startups को 9% deployment incentive दिया जाएगा, जिससे शुरुआती कंपनियों को चिप बनाने की महंगी प्रक्रिया में मदद मिल सकेगी।
भारत में semiconductor industry को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार नई योजनाओं पर काम कर रही है। इस नई पहल का उद्देश्य भारतीय chip startups को आर्थिक सहायता देना और देश को global semiconductor market में मजबूत स्थिति दिलाना है।
भारतीय Chip Startups को मिलेगा 9% Deployment Incentive
अमितेश सिन्हा ने बताया कि शुरुआती स्तर की chip कंपनियों को prototype तैयार करने में काफी समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। कई बार एक prototype chip तैयार करने में एक साल से ज्यादा समय लग सकता है और इसकी लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में सरकार की यह योजना startups को आर्थिक सहायता देने का काम करेगी।
उन्होंने कहा कि बड़ी global कंपनियों जैसे Nvidia और Qualcomm को chip fabrication में छूट मिलती है, लेकिन छोटी भारतीय कंपनियों को ऐसी सुविधा नहीं मिल पाती। इसी अंतर को कम करने के लिए Semicon 2.0 योजना के तहत भारतीय startups को 9% तक की मदद देने का फैसला किया गया है।
India Semiconductor Mission योजना की मुख्य बातें
- Chip design startups को 9% deployment incentive
- Prototype chip तैयार करने में भारी लागत
- Semicon 2.0 योजना के तहत सहायता
- भारतीय chip technology और patent विकसित करने का लक्ष्य
- Fabrication facilities तक बेहतर पहुंच की योजना
- Semiconductor ecosystem मजबूत करने पर जोर
भारत में अपनी Chip Technology विकसित करने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में भारत अपनी खुद की chip technology और patent विकसित कर सके। इसके लिए startups को fabrication facilities तक बेहतर पहुंच देने की कोशिश की जा रही है। सरकार कुछ प्रमुख chip fabs के साथ समझौते करने की संभावना भी तलाश रही है, ताकि भारतीय startups को प्राथमिकता मिल सके।
भारत में पहले भी कुछ कंपनियों ने chip trial किया है। घरेलू startups ने TSMC जैसी बड़ी semiconductor manufacturing कंपनी के जरिए 12nm और 28nm technology पर trial chips तैयार किए हैं। इसके अलावा Belgium की Imec जैसी संस्थाओं की मदद से भी भारतीय कंपनियों को फायदा पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
भारत के Semiconductor Future की प्रमुख बातें
- Tata की Dholera semiconductor fab 2028 तक शुरू होने की उम्मीद
- Chip production और testing में तेजी आने की संभावना
- Supply chain और machinery को भारत में विकसित करने की योजना
- C-DAC chip startups के applications की जांच में मदद करेगा
- AI chip development पर भी काम जारी
- रोजगार और नई technology कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा
भारत में Semiconductor Manufacturing को बढ़ाने की योजना
देश में Tata की Dholera semiconductor fab के 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद भारत में chip production और testing की प्रक्रिया तेज हो सकती है और startups को घरेलू स्तर पर बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
Semiconductor ecosystem को मजबूत करने के लिए सरकार सिर्फ chip बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इससे जुड़ी machinery और supply chain को भी भारत में विकसित करना चाहती है। हालांकि, दुनिया की सबसे उन्नत photolithography machine जैसी technology को तुरंत विकसित करना आसान नहीं है, लेकिन छोटे स्तर से शुरुआत कर धीरे-धीरे इस क्षेत्र को मजबूत करने की योजना है।
सरकार और C-DAC की भूमिका
अमितेश सिन्हा ने कहा कि Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) पहले से ही India Semiconductor Mission में अहम भूमिका निभा रहा है। C-DAC भारतीय chip design startups के applications की जांच और validation में मदद करता है। वहीं AI chip development का काम अलग तरीके से जारी रहेगा।
सरकार बड़ी कंपनियों को भी semiconductor research और development में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। इसके लिए Meity एक special purpose vehicle के जरिए निवेश और royalty model पर काम करेगी। इस योजना के तहत सरकार कंपनियों के chip design और development में किए गए निवेश के बराबर मदद देगी।
भारत के लिए Semiconductor Sector क्यों जरूरी है
सरकार का मानना है कि semiconductor sector में निवेश बढ़ने से भारत में नई technology कंपनियां विकसित होंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश chip manufacturing के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। योजनाओं और निवेश से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें।

