US PERM Suspension: भारतीय IT कंपनियों की भर्ती रणनीति में बदलाव?

अमेरिका में रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़े PERM आवेदन आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए रोक दिए जाने के बाद भारतीय आईटी क्षेत्र की भर्ती रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। 7 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार इस फैसले से प्रभावित कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएलटेक और कैपजेमिनी शामिल हैं। इस घटनाक्रम से भारतीय पेशेवरों के स्थायी निवास आवेदन और कंपनियों की अमेरिका में काम करने वाली टीमों की योजना प्रभावित हो सकती है।

अमेरिका में PERM आवेदन पर रोक क्या है?

अमेरिका के श्रम विभाग ने 8 अक्टूबर 2026 को आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों से जुड़े नए और लंबित PERM आवेदनों को रोकने की जानकारी दी थी। PERM प्रक्रिया अधिकांश नियोक्ता-प्रायोजित रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदनों का शुरुआती चरण होती है। इस प्रक्रिया में नियोक्ता को यह दिखाना होता है कि संबंधित पद के लिए आवश्यक शर्तों के अनुसार योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से लागू नियमों का उल्लंघन नहीं होगा।

इस रोक का अर्थ यह नहीं है कि इन कंपनियों में काम कर रहे सभी भारतीय कर्मचारियों के मौजूदा एच-1बी वीजा या नौकरी अपने आप रद्द हो जाएंगे। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक असर मुख्य रूप से स्थायी निवास की प्रक्रिया के PERM चरण पर है। पहले से मंजूर कुछ अन्य आव्रजन दस्तावेजों और मौजूदा रोजगार अनुमति की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए हर कर्मचारी को अपने मामले की जानकारी कंपनी और योग्य आव्रजन विशेषज्ञ से लेनी चाहिए।

भारतीय आईटी कंपनियों पर दबाव क्यों बढ़ सकता है?

भारत की कई बड़ी आईटी कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों को तकनीकी सेवाएं देती हैं। इनके कर्मचारी परियोजनाओं के अनुसार भारत और अमेरिका, दोनों जगह काम करते हैं। कुछ कर्मचारी लंबे समय तक अमेरिका में रहकर स्थायी निवास की प्रक्रिया शुरू करते हैं। यदि इस प्रक्रिया में देरी होती है, तो अनुभवी कर्मचारियों के लिए भविष्य की योजना बनाना कठिन हो सकता है। इससे कंपनियों को प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने और नए लोगों को आकर्षित करने में चुनौती आ सकती है।

कंपनियों के लिए एक विकल्प अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की नियुक्ति बढ़ाना हो सकता है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों को बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर नियुक्त करना महंगा और कठिन हो सकता है। किसी विशेष तकनीक या परियोजना का अनुभव रखने वाले कर्मचारी तुरंत उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में कंपनियां भारत में अपनी टीमों को मजबूत करने और अधिक काम भारत से कराने पर विचार कर सकती हैं।

PERM रोक से जुड़ी मुख्य जानकारी

  • घोषित तारीख: 8 अक्टूबर 2026
  • प्रभावित कंपनियां: आठ प्रौद्योगिकी कंपनियां
  • प्रक्रिया: रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का शुरुआती चरण
  • मुख्य असर: लंबित और नए PERM आवेदन
  • महत्वपूर्ण: मौजूदा एच-1बी वीजा अपने आप रद्द नहीं

क्या भारतीय कंपनियां भारत में भर्ती बढ़ा सकती हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार अधिक काम भारत में स्थानांतरित करना कई कंपनियों के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। भारत में पहले से बड़े तकनीकी केंद्र, प्रशिक्षित कर्मचारी और वैश्विक ग्राहकों के लिए काम करने का अनुभव मौजूद है। यदि अमेरिकी ग्राहकों की परियोजनाओं का अधिक हिस्सा भारत से संचालित किया जाता है, तो कंपनियों को विदेश में कर्मचारियों की तैनाती पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और अन्य तकनीकी केंद्रों में कुछ भूमिकाओं की मांग बढ़ने की संभावना बन सकती है।

हालांकि भारत में भर्ती बढ़ना अपने आप तय नहीं है। परियोजनाओं की जरूरत, ग्राहक की मंजूरी, डेटा सुरक्षा, समय क्षेत्र, काम की प्रकृति और लागत जैसे कारक तय करेंगे कि कौन-सा काम भारत में स्थानांतरित किया जा सकता है। जिन भूमिकाओं में ग्राहक के साथ सीधे संपर्क या स्थानीय नियामकीय जानकारी जरूरी है, वहां अमेरिका में कर्मचारी रखना जारी रह सकता है। इसलिए यह बदलाव पूरी तरह विदेश से भारत में नौकरियां स्थानांतरित करने जैसा सरल नहीं है।

स्थानीय अमेरिकी भर्ती भी आसान विकल्प नहीं

अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की नियुक्ति से वीजा पर निर्भरता कम हो सकती है, लेकिन इसमें वेतन और भर्ती खर्च अधिक हो सकता है। विशेष तकनीकी कौशल वाले लोगों की उपलब्धता भी सीमित हो सकती है। कंपनियों को यह देखना होगा कि किसी पद के लिए कर्मचारी को अमेरिका में रखना जरूरी है या उसका काम भारत अथवा किसी अन्य केंद्र से किया जा सकता है। इसी वजह से कंपनियां स्थानीय भर्ती और विदेश स्थित टीमों के बीच संतुलन बना सकती हैं।

कुछ कंपनियों ने पहले ही अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। उदाहरण के तौर पर टीसीएस ने पहले कहा था कि अमेरिका में उसके स्थानीय कर्मचारियों का बड़ा आधार है और वह वहां अतिरिक्त नियुक्तियों की योजना रखती है। लेकिन हर कंपनी की स्थिति अलग है। किसी एक कंपनी की घोषणा को पूरे आईटी उद्योग का निर्णय नहीं माना जा सकता।

कर्मचारियों और कंपनियों के लिए जरूरी बातें

  • वीजा: मौजूदा एच-1बी स्थिति अलग से जांचें
  • आवेदन: PERM की व्यक्तिगत स्थिति समझें
  • कंपनी: मानव संसाधन विभाग से लिखित जानकारी लें
  • विकल्प: पात्रता होने पर अन्य आव्रजन मार्ग देखें
  • करियर: स्थान और भूमिका के विकल्प पर विचार करें

भारतीय कर्मचारियों के लिए क्या सावधानी जरूरी है?

अमेरिका में काम कर रहे कर्मचारियों को सोशल मीडिया या सामान्य खबर के आधार पर अपने वीजा की स्थिति के बारे में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। PERM आवेदन, एच-1बी स्थिति, आई-140 याचिका और अन्य आव्रजन चरण अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। किसी कर्मचारी पर असर इस बात से तय होगा कि उसका आवेदन किस चरण में है, किस नियोक्ता के माध्यम से दाखिल हुआ है और कौन-से नियम उस पर लागू होते हैं।

यदि किसी कर्मचारी का आवेदन लंबित है, तो उसे कंपनी के आव्रजन विभाग से लिखित अपडेट लेना चाहिए। नौकरी बदलने, देश छोड़ने या किसी अन्य श्रेणी में आवेदन करने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है। कुछ वैकल्पिक श्रेणियों में पात्रता की शर्तें बहुत सख्त होती हैं और आवेदन स्वीकार होने की गारंटी नहीं होती। कनाडा या किसी अन्य देश में जाने का विकल्प भी व्यक्तिगत परिस्थिति, नौकरी और परिवार की जरूरतों के आधार पर ही देखना चाहिए।

भारतीय आईटी उद्योग के लिए यह घटनाक्रम केवल वीजा का मामला नहीं है। इससे परियोजनाओं का स्थान, कर्मचारियों की उपलब्धता, ग्राहक अनुबंध और लागत प्रभावित हो सकती है। कंपनियां यदि भारत में अधिक काम लाती हैं, तो घरेलू तकनीकी केंद्रों में अवसर बढ़ सकते हैं, लेकिन कर्मचारियों के कौशल और परियोजना की जरूरत के बीच मेल होना जरूरी होगा। इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट अमेरिकी वीजा और भारतीय आईटी भर्ती पर यहां पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. PERM प्रक्रिया क्या है?

PERM अमेरिका में अधिकांश नियोक्ता-प्रायोजित रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदनों का शुरुआती चरण है। इसमें नियोक्ता को पद और भर्ती से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसके बाद पात्रता के अनुसार आवेदन के अगले चरण आगे बढ़ते हैं।

2. किन भारतीय आईटी कंपनियों पर असर पड़ सकता है?

रिपोर्टों में टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक और कॉग्निजेंट सहित आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों के नाम बताए गए हैं। वास्तविक असर हर कंपनी और कर्मचारी के आवेदन की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

3. क्या मौजूदा एच-1बी वीजा रद्द हो जाएंगे?

रिपोर्टों के अनुसार PERM आवेदन पर रोक से मौजूदा एच-1बी वीजा अपने आप रद्द नहीं होते। यह मुख्य रूप से स्थायी निवास की शुरुआती प्रक्रिया से जुड़ा मामला है। व्यक्तिगत स्थिति के लिए आव्रजन विशेषज्ञ से सलाह लें।

4. क्या भारत में आईटी नौकरियां बढ़ सकती हैं?

कुछ कंपनियां अधिक परियोजना कार्य भारत से कराने पर विचार कर सकती हैं। इससे घरेलू तकनीकी केंद्रों में अवसर बन सकते हैं, लेकिन नियुक्तियां ग्राहक की जरूरत, कौशल, लागत और परियोजना की प्रकृति पर निर्भर करेंगी।

5. प्रभावित कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?

कर्मचारियों को अपने आवेदन का चरण, नियोक्ता की स्थिति और लागू नियम समझने चाहिए। कंपनी के मानव संसाधन या आव्रजन विभाग से लिखित जानकारी लें। नौकरी बदलने या दूसरे विकल्प चुनने से पहले योग्य विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

निष्कर्ष

PERM आवेदन पर रोक से भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिका संबंधी कर्मचारी योजनाओं में बदलाव की संभावना बढ़ी है। भारत में अधिक काम लाने का विकल्प उभर सकता है, लेकिन इसका असर कंपनी और कर्मचारी की स्थिति के अनुसार अलग होगा।

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अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। वीजा या ग्रीन कार्ड संबंधी निर्णय से पहले योग्य आव्रजन विशेषज्ञ से सलाह लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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