OBC आरक्षण मामले में ममता सरकार का बड़ा कदम, सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस

अगर आप पश्चिम बंगाल की राजनीति और आरक्षण से जुड़े मामलों पर नजर रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी-अपनी याचिकाएं वापस ले ली हैं। ये याचिकाएं कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थीं, जिसमें 77 जातियों को दिए गए ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) दर्जे को रद्द कर दिया गया था। इनमें 75 मुस्लिम समुदाय भी शामिल थे। यह मामला पहले की सरकार के दौरान सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण से जुड़ा यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा याचिका वापस लेने के बाद अब इस मामले की कानूनी दिशा को लेकर नई स्थिति बन गई है।

West Bengal OBC Reservation Case में राज्य सरकार ने याचिका वापस ली

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने अपनी अपील वापस लेने का फैसला किया है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग दोनों को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि यदि कोई अन्य प्रभावित पक्ष चाहे तो वह इस मामले में अलग से अपील कर सकता है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट में आगे की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत उस समय कुल 10 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें राज्य सरकार की याचिका भी शामिल थी। ये सभी याचिकाएं मई 2024 में आए हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थीं।

OBC आरक्षण मामले की मुख्य बातें

  • मामला: पश्चिम बंगाल OBC आरक्षण विवाद
  • याचिका: राज्य सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग ने वापस ली
  • विवाद: 77 जातियों का OBC दर्जा रद्द
  • हाई कोर्ट फैसला: मई 2024
  • सुप्रीम कोर्ट: अन्य प्रभावित पक्ष अपील कर सकते हैं

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले में क्या कहा गया था

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि वर्ष 2010 से 2012 के बीच जिन 77 जातियों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था, उनमें धर्म को प्रमुख आधार बनाया गया था। अदालत ने इसे कानून के अनुरूप नहीं माना और इन समुदायों को दिया गया ओबीसी दर्जा रद्द कर दिया था।

हाल ही में राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार पुरानी ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदायों को फिर से मान्यता दी है। इन समुदायों को सरकारी नौकरियों और सेवाओं में 7 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। नई सूची में कपाली, कुर्मी, कर्मकार, सूत्रधार, स्वर्णकार, नाई, तांती, धनुक, कसाई, देवांगा, गोआला सहित कई समुदाय शामिल हैं। इनमें पहाड़िया, हज्जाम और चौधुली जैसे तीन मुस्लिम समुदाय भी शामिल किए गए हैं।

अब आगे क्या होगा?

  • 66 समुदाय: पुरानी OBC सूची में फिर से शामिल
  • आरक्षण: सरकारी नौकरियों में 7% लाभ
  • नई स्थिति: सरकार ने कानूनी चुनौती वापस ली
  • विकल्प: अन्य प्रभावित पक्ष सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं
  • मामला: कानूनी प्रक्रिया अन्य अपीलों के साथ जारी रह सकती है

सुप्रीम कोर्ट में आगे का रास्ता खुला

इस पूरे मामले के बाद अब यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार ने अपनी कानूनी चुनौती वापस ले ली है, लेकिन यदि कोई अन्य प्रभावित व्यक्ति या संगठन चाहे तो वह सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपनी अपील जारी रख सकता है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध न्यायिक और सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। मामले में अदालत के आगामी आदेशों के अनुसार स्थिति बदल सकती है।

Gourav Kumar Singh

About the Author

Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

Read More →

Leave a Comment