जापान की मुद्रा येन में तेज गिरावट ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। येन इस समय करीब 40 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। जापान में जून महीने में उम्मीद से ज्यादा बड़ा trade deficit सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या Bank of Japan (BOJ) अब अपनी नीतियों में तेजी से बदलाव कर सकता है।
येन की गिरावट से वैश्विक बाजार में चिंता
कई सालों से जापान दुनिया के उन देशों में रहा है जहां interest rate बहुत कम रहे हैं। इसी वजह से दुनियाभर के निवेशक सस्ते कर्ज के लिए जापानी येन का इस्तेमाल करते रहे हैं। वे कम ब्याज पर येन में पैसा उधार लेकर ज्यादा रिटर्न देने वाली जगहों जैसे अमेरिकी बॉन्ड, टेक कंपनियों के शेयर और अन्य बाजारों में निवेश करते हैं।
इस रणनीति को yen carry trade कहा जाता है। यह वैश्विक बाजारों में पैसों की बड़ी सप्लाई का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। जब तक जापान में ब्याज दरें कम रहती हैं और येन कमजोर रहता है, तब तक यह तरीका निवेशकों के लिए फायदेमंद रहता है।
Yen Carry Trade की मुख्य बातें
- क्या है: कम ब्याज पर येन लेकर निवेश करना
- उपयोग: ज्यादा रिटर्न वाले बाजारों में निवेश
- फायदा: कमजोर येन और कम ब्याज दरों में निवेशकों को लाभ
- जोखिम: ब्याज दर बढ़ने पर बाजार में दबाव
- असर: वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव
जापान के व्यापार घाटे ने बढ़ाई चिंता
लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। जून में जापान का व्यापार घाटा 406.9 अरब येन तक पहुंच गया, जो अनुमान से काफी ज्यादा था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कमजोर मुद्रा और महंगे आयात ने जापान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
येन के कमजोर होने के बाद जापानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वे currency market में जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं। वहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार BOJ के अधिकारी महंगाई का दबाव बढ़ने पर ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी पर विचार कर सकते हैं।
BOJ की सख्त नीति से बढ़ सकता है बाजार दबाव
इससे पहले जुलाई-अगस्त 2024 में भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। जब निवेशकों को लगा कि BOJ अपनी monetary policy सख्त कर सकता है, तो येन तेजी से मजबूत हुआ था। इसके बाद कई निवेशकों को अपने येन आधारित निवेश वापस लेने पड़े थे, जिससे दुनियाभर के शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया था।
मौजूदा स्थिति भी कुछ हद तक वैसी ही दिखाई दे रही है। येन फिर से कई दशकों के निचले स्तर पर है और निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या जापान दुनिया का आखिरी low interest rate वाला बड़ा देश बना रह पाएगा।
भारत पर संभावित असर
- सीधा असर: सीमित रहने की संभावना
- वैश्विक हलचल: भारतीय बाजार प्रभावित हो सकते हैं
- Foreign Investors: बिकवाली बढ़ने का जोखिम
- घरेलू निवेश: SIP और घरेलू निवेशक सहारा दे सकते हैं
- रुपया: दबाव में आ सकता है
सस्ते येन फंडिंग का दौर खत्म होने की चिंता
भारत पर इसका सीधा असर सीमित हो सकता है, लेकिन वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ने पर भारतीय शेयर बाजार भी प्रभावित हो सकता है। अगर निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालना शुरू करते हैं, तो Foreign Investors की बिकवाली बढ़ सकती है, जिससे भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर दबाव आ सकता है।
हालांकि, भारत में घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और SIP के जरिए लगातार आने वाला पैसा बाजार को संभालने में मदद कर सकता है। जापानी निवेशकों की भारतीय शेयरों में हिस्सेदारी भी कुल विदेशी निवेश की तुलना में बहुत बड़ी नहीं है।
असल चिंता जापान से आने वाले निवेश की नहीं, बल्कि उस सस्ते येन फंडिंग की है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के बड़े निवेशक करते हैं। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं और येन महंगा होता है, तो कई संस्थागत निवेशकों को अपने कर्ज और निवेश को संतुलित करने के लिए बाजार से पैसा निकालना पड़ सकता है।
निवेशकों की नजर BOJ के अगले कदम पर
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि BOJ अगले हफ्ते ब्याज दर बढ़ाएगा या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या कमजोर येन, बढ़ती महंगाई और बढ़ते व्यापार घाटे के कारण जापान की केंद्रीय बैंक नीति उम्मीद से ज्यादा सख्त हो जाएगी।
अगर दुनिया के सबसे सस्ते कर्ज का दौर खत्म होता है, तो इसका असर केवल जापान तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव Wall Street से लेकर दुनिया के कई बड़े financial market तक दिखाई दे सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी बाजार विश्लेषण पर आधारित है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह जरूर लें।
