अभिजीत दिपके ने अपनी दादी के निधन के बाद परिवार से बातचीत करने की अनुमति को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। इस मामले में दिपके और पुलिस की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें परिवार से बात करने और घर जाने में मदद देने की पेशकश की थी, जबकि दिपके ने आरोप लगाया कि उन्हें फोन इस्तेमाल करने और वकील से बात करने की अनुमति नहीं दी गई।
अभिजीत दिपके ने फोन इस्तेमाल करने की अनुमति पर उठाए सवाल
दिपके ने शाम 6 बजकर 31 मिनट पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि वह अपने चचेरे भाई से संपर्क करना चाहते थे। उनके अनुसार, उनका चचेरा भाई उनकी दादी के साथ रहता था। दिपके ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस से कुछ समय के लिए अपना फोन मांगा था, ताकि वह अपने चचेरे भाई का नंबर देख सकें। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें फोन इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।
दिपके ने यह आरोप भी लगाया कि उन्हें अपने वकील से बात करने का अवसर नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, बाद में पुलिस ने उनसे रात करीब साढ़े तीन बजे अपने पिता को फोन करने के लिए कहा। उन्होंने इस समय पर फोन करने के फैसले पर भी सवाल उठाया, क्योंकि उनके पिता उसी समय अपनी मां को खोने के दुख से गुजर रहे थे।
दिपके की मुख्य शिकायतें
- फोन इस्तेमाल करके अपने चचेरे भाई का नंबर देखने की अनुमति नहीं मिलने का आरोप।
- अपने वकील से बात करने का अवसर नहीं दिए जाने की शिकायत।
- रात करीब साढ़े तीन बजे पिता को फोन करने के सुझाव पर सवाल।
- परिवार में शोक के समय पुलिस की कार्रवाई से मानसिक परेशानी बढ़ने की आशंका।
दिल्ली पुलिस ने वीडियो जारी कर दिया जवाब
दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों के जवाब में एक वीडियो जारी किया है। पुलिस के अनुसार, अधिकारियों ने दिपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी दी थी और परिवार से बात करने का विकल्प भी दिया था। पुलिस का दावा है कि उन्हें कई बार माता-पिता से फोन पर बातचीत करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
वीडियो में दिपके को यह कहते हुए दिखाया गया है कि वह अपने पिता से बात नहीं कर पाएंगे। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें घर लौटने में मदद देने की पेशकश की। पुलिस के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर उनके लिए हवाई यात्रा की व्यवस्था भी की जा सकती थी। हालांकि, वीडियो में दिपके दिल्ली में ही रुकने की बात कहते दिखाई देते हैं।
दिल्ली पुलिस का पक्ष
- पुलिस के अनुसार, दिपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी दी गई थी।
- अधिकारियों ने माता-पिता से फोन पर बात करने का विकल्प दिया था।
- पुलिस का दावा है कि घर लौटने में मदद और हवाई यात्रा की व्यवस्था की पेशकश की गई थी।
- दिपके ने पुलिस के कुछ दावों पर सवाल उठाए हैं और अपनी शिकायत दोहराई है।
रात में पिता को फोन करने के सुझाव पर जताई नाराजगी
दिपके ने अपनी पोस्ट में रात साढ़े तीन बजे पिता को फोन करने के सुझाव पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके पिता पहले ही अपनी मां के निधन के कारण दुखी थे। ऐसे समय में उन्हें फोन करके यह बताना कि अगले दिन उन्हें लंबे समय के लिए जेल जाना पड़ सकता है, परिवार के लिए और अधिक मानसिक परेशानी पैदा कर सकता था। उन्होंने यह भी सवाल किया कि इतनी रात को परिवार से संपर्क करने की जरूरत क्यों पड़ी।
यह विवाद उस समय सामने आया, जब दिल्ली की पुलिस उपायुक्त नेहा यादव ने एक संवाददाता सम्मेलन में पुलिस का पक्ष रखा। उनके अनुसार, अधिकारियों को दिपके की दादी के निधन की जानकारी मिलने के बाद उनसे संपर्क किया गया था। पुलिस ने उन्हें फोन करने, यात्रा की व्यवस्था कराने और अन्य जरूरी सहायता देने की पेशकश की थी। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने कई बार उनके माता-पिता से बात कराने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
जनपथ पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने का मामला
पुलिस ने जनपथ पर प्रस्तावित धरने की अनुमति नहीं दिए जाने के बारे में भी जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, अनुमति से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन नहीं होने, पहले के निर्देशों का अनुपालन नहीं करने और उस समय की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने बताया कि दिल्ली में सुरक्षा बनाए रखने और लोगों की जान-माल की रक्षा के लिए कई क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के बजाय धारा 133 लागू किए जाने का उल्लेख किया गया। हालांकि, पुलिस के बयान में धारा 133 का हवाला दिया गया था।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 10 अक्टूबर को जनपथ पर प्रदर्शन करने के आह्वान से जुड़े मामले में अभिजीत दिपके और उनके दो साथियों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग
फिलहाल, इस मामले में दिपके और दिल्ली पुलिस के दावों के बीच अंतर बना हुआ है। पुलिस द्वारा जारी वीडियो में परिवार से बात करने की पेशकश और घर लौटने में सहायता देने के दृश्य सामने आए हैं, जबकि दिपके ने फोन और वकील तक पहुंच को लेकर अपनी शिकायत दोहराई है। मामले को समझने के लिए दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
दिपके ने आरोप लगाया कि उन्हें फोन इस्तेमाल करके परिवार के सदस्य का नंबर देखने और अपने वकील से बात करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने रात करीब साढ़े तीन बजे पिता को फोन करने के सुझाव पर भी सवाल उठाए।
2. दिल्ली पुलिस ने दिपके के आरोपों पर क्या कहा?
दिल्ली पुलिस का दावा है कि अधिकारियों ने दिपके को परिवार से बात करने, माता-पिता को फोन करने और घर लौटने में सहायता देने की पेशकश की थी। पुलिस के अनुसार, दिपके ने माता-पिता से फोन पर बात करने से इनकार किया था।
3. दिपके अपने पिता को फोन करने के समय से क्यों नाराज थे?
दिपके के अनुसार, उनके पिता अपनी मां के निधन के कारण शोक में थे। उनका कहना था कि रात में फोन करके संभावित जेल जाने की जानकारी देना परिवार की मानसिक परेशानी बढ़ा सकता था। यह उनका अपना पक्ष है।
4. जनपथ पर प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ था। पुलिस ने पहले के निर्देशों और उस समय की सुरक्षा स्थिति का भी हवाला दिया। इन कारणों को पुलिस के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
5. क्या इस मामले में दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि हो गई है?
उपलब्ध विवरण में दिपके और दिल्ली पुलिस के बयान अलग-अलग हैं। पुलिस ने अपना पक्ष रखने के लिए वीडियो जारी किया है, जबकि दिपके ने अपनी शिकायतें दोहराई हैं। पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालने के लिए सभी उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित बयानों की जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
अभिजीत दिपके और दिल्ली पुलिस के बीच फोन, वकील से संपर्क और परिवार से बातचीत को लेकर विवाद सामने आया है। पुलिस ने वीडियो के जरिए अपना पक्ष रखा है, जबकि दिपके ने अपनी शिकायतें दोहराई हैं। मामले की निष्पक्ष समझ के लिए दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों पर ध्यान देना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध बयानों पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
