कंपनियां Software खरीदने के बजाय खुद बना रहीं, AI से बदली रणनीति

मैकिन्से की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियां अब बाहर से software खरीदने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से उसे खुद तैयार करने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 32 प्रतिशत संगठनों ने एक या उससे अधिक software उत्पाद या फीचर खरीदने से इनकार किया, क्योंकि उन्हें लगा कि इन्हें AI coding agents की मदद से अपनी टीम के जरिए बनाया जा सकता है। इससे कंपनियों के तकनीकी फैसलों में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।

कंपनियां software खरीदने के बजाय खुद बनाने पर दे रही हैं जोर

इस बदलाव में technology क्षेत्र सबसे आगे है। यहां 41 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनके संगठनों ने बाहरी software खरीदने के बजाय उसे खुद विकसित करने का फैसला किया। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में यह आंकड़ा 39 प्रतिशत रहा। पेशेवर सेवाओं और ऊर्जा तथा सामग्री से जुड़े क्षेत्रों में 38 प्रतिशत संगठनों ने ऐसा किया। वित्तीय संस्थानों में यह हिस्सेदारी 36 प्रतिशत, मीडिया और दूरसंचार में 34 प्रतिशत तथा दवा और चिकित्सा उत्पाद क्षेत्र में 33 प्रतिशत रही।

वहीं, insurance क्षेत्र में 19 प्रतिशत और सार्वजनिक तथा सामाजिक क्षेत्र में 17 प्रतिशत संगठनों ने बाहर से software लेने के बजाय उसे खुद तैयार करने का विकल्प चुना। रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि बड़ी कंपनियां AI को अपनाने में छोटी कंपनियों से आगे निकल रही हैं। अब इसका इस्तेमाल केवल परीक्षण के तौर पर नहीं हो रहा, बल्कि कई संगठन इसे अपने नियमित कामकाज का हिस्सा बना रहे हैं।

💻 कंपनियों में software बनाने का बढ़ता रुझान

  • 32 प्रतिशत: संगठनों ने कम से कम एक software उत्पाद या फीचर खरीदने से इनकार किया
  • 41 प्रतिशत: technology क्षेत्र में संगठनों ने खुद software विकसित करने का फैसला किया
  • 39 प्रतिशत: स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में ऐसा करने वाले संगठन
  • 38 प्रतिशत: पेशेवर सेवाओं और ऊर्जा तथा सामग्री क्षेत्रों में हिस्सेदारी
  • 36 प्रतिशत: वित्तीय संस्थानों में खुद software बनाने का विकल्प
  • मुख्य बदलाव: कंपनियां अपनी तकनीकी जरूरतों पर ज्यादा नियंत्रण चाहती हैं

बड़ी कंपनियां AI को तेजी से अपना रही हैं

मैकिन्से के वरिष्ठ साझेदार लिवेन वान डर वेकेन के अनुसार, बड़ी कंपनियां AI को तेजी से अपनाने के साथ अपनी technology रणनीति पर भी ज्यादा नियंत्रण ले रही हैं। पहले कई कंपनियों को लगता था कि AI उनके अपने तकनीकी कर्मचारियों की क्षमता से बाहर है और तेजी से आगे बढ़ने के लिए बाहरी साझेदारों की जरूरत होगी। अब कंपनियों का नजरिया बदल रहा है और वे यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कौन से AI उपकरण वे अपनी टीम से खुद बना सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 में से 9 लोगों ने बताया कि उनके संगठन के कम से कम एक कारोबारी काम में नियमित रूप से AI का इस्तेमाल हो रहा है। संगठन के स्तर पर इसका विस्तार भी पिछले साल की तुलना में बढ़ा है। अब 44 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके संगठन में AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल बढ़ रहा है, जबकि पहले यह आंकड़ा 38 प्रतिशत था। तीन या उससे अधिक कामों में AI इस्तेमाल करने वाले संगठनों की हिस्सेदारी भी 51 प्रतिशत से बढ़कर 56 प्रतिशत हो गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनियों को हर चीज खुद ही बनानी चाहिए। सही तरीका यह है कि वे हर जरूरत के हिसाब से फैसला करें कि किसी software को खरीदना बेहतर है या अपनी टीम से तैयार करना। कुछ मामलों में बाहरी साझेदारों की मदद लेकर अपनी अंदरूनी क्षमता बढ़ाना भी उपयोगी हो सकता है। साथ ही कंपनियां खर्च, काम करने के तरीके और तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने की क्षमता पर भी ध्यान दे रही हैं।

🤖 बड़ी कंपनियों में AI और agentic AI का विस्तार

  • 54 प्रतिशत: 1 अरब डॉलर या उससे अधिक कारोबार वाले संगठनों में AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल बढ़ा
  • 27 से 40 प्रतिशत: बड़े संगठनों में एक या अधिक कामों में agentic AI agents का इस्तेमाल बढ़ा
  • 22 प्रतिशत: छोटी कंपनियों में agentic AI agents के इस्तेमाल का आंकड़ा
  • 56 प्रतिशत: तीन या उससे अधिक कामों में AI इस्तेमाल करने वाले संगठनों की हिस्सेदारी
  • 44 प्रतिशत: संगठनों में AI के बड़े स्तर पर इस्तेमाल में बढ़ोतरी बताने वाले लोग
  • मुख्य संकेत: बड़ी कंपनियां AI को नियमित कामकाज और तकनीकी रणनीति में तेजी से शामिल कर रही हैं

बड़ी कंपनियों में AI अपनाने की गति ज्यादा तेज

बड़ी कंपनियों में AI अपनाने की गति ज्यादा तेज दिखाई देती है। जिन संगठनों का सालाना कारोबार कम से कम 1 अरब डॉलर है, उनमें 54 प्रतिशत लोगों ने बताया कि AI का इस्तेमाल पूरे संगठन में बड़े स्तर पर बढ़ रहा है। छोटी कंपनियों में यह आंकड़ा करीब एक तिहाई रहा। बड़ी कंपनियों में agentic AI को अपनाने की गति भी तेज रही। एक या उससे अधिक कामों में ऐसे agents का इस्तेमाल बढ़ाने वाले बड़े संगठनों की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई, जबकि छोटी कंपनियों में यह आंकड़ा 22 प्रतिशत पर स्थिर रहा।

नोट: यह जानकारी रिपोर्ट में दिए आंकड़ों पर आधारित है और वास्तविक परिणाम कंपनी की परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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