भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने कंसल्टिंग इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को बदलना शुरू कर दिया है, लेकिन इससे फीस घटने की उम्मीद फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही। बड़ी कंसल्टिंग और एडवाइजरी फर्में अब AI, विशेषज्ञ निगरानी, डेटा सुरक्षा और वैल्यू-बेस्ड प्राइसिंग के नए मॉडल के साथ खुद को ढाल रही हैं।
यह खबर बताती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से इस्तेमाल के बावजूद भारत की बड़ी कंसल्टिंग और एडवाइजरी कंपनियों की फीस में कोई खास कमी नहीं आई है। कई कंपनियों को उम्मीद थी कि जब कंसल्टिंग फर्म रिसर्च, डेटा प्रोसेसिंग और रिपोर्ट तैयार करने जैसे कामों में AI बॉट्स का इस्तेमाल करने लगी हैं, तो उनकी सेवाएं सस्ती हो जाएंगी।
AI के दौर में भी भारत की कंसल्टिंग कंपनियों की फीस क्यों नहीं घट रही
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कंसल्टिंग कंपनियों का कहना है कि AI से कुछ काम जरूर तेज हुए हैं और जूनियर कर्मचारियों पर निर्भरता कुछ हद तक घटी है, लेकिन इसके बदले उन्हें नई टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग, डेटा सुरक्षा, निगरानी और विशेषज्ञों की भागीदारी पर काफी खर्च करना पड़ रहा है, इसलिए कुल लागत कम नहीं हुई।
दरअसल, पहले किसी प्रोजेक्ट में काफी काम जूनियर एनालिस्ट और नए कंसल्टेंट करते थे। वे रिसर्च तैयार करते, डेटा जुटाते, प्रेजेंटेशन बनाते और फिर सीनियर पार्टनर या मैनेजर अंतिम समीक्षा करते थे। अब AI आधारित टूल्स और प्लेटफॉर्म इन शुरुआती कामों का बड़ा हिस्सा कुछ घंटों में पूरा कर दे रहे हैं, जिनमें पहले कई दिन या कई हफ्ते लग जाते थे।
इसके बावजूद कंपनियों का कहना है कि AI पूरी तरह इंसानी समझ और अनुभव की जगह नहीं ले सकता। अगर AI किसी रिपोर्ट में गलत तथ्य दे दे, डेटा गढ़ दे या संवेदनशील जानकारी से जुड़ा जोखिम पैदा करे, तो उसका असर सीधे क्लाइंट के बिजनेस फैसलों पर पड़ सकता है। इसी वजह से अब प्रोजेक्ट्स में सीनियर विशेषज्ञों की निगरानी पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।
जूनियर काम कम हुए, लेकिन जोखिम और निगरानी की जरूरत बढ़ी
AI के बावजूद कंसल्टिंग फीस क्यों नहीं घटी
- काम तेज हुआ: रिसर्च, डेटा प्रोसेसिंग और रिपोर्ट ड्राफ्टिंग में AI से समय बच रहा है
- जूनियर स्टाफ पर असर: शुरुआती स्तर के कई दोहराव वाले काम अब मशीनें कर रही हैं
- नई लागत: टेक प्लेटफॉर्म, AI टूल्स, ट्रेनिंग और विशेषज्ञ निगरानी पर बड़ा खर्च बढ़ा
- डेटा सुरक्षा: संवेदनशील जानकारी, गलत आउटपुट और AI hallucination से बचाव जरूरी हुआ
- सीनियर भूमिका: अंतिम सलाह, समीक्षा और जोखिम नियंत्रण के लिए अनुभवी पेशेवर पहले से ज्यादा अहम
- नतीजा: AI से productivity बढ़ी, लेकिन कुल फीस में बड़ी कटौती नहीं आई
PwC India के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी विवेक प्रसाद के मुताबिक, AI और नई तकनीकों के दौर में क्लाइंट्स अब तेज नतीजे, ज्यादा लचीलापन और साफ बिजनेस परिणाम चाहते हैं, लेकिन इसके लिए कंसल्टिंग फर्मों को टेक प्लेटफॉर्म, विशेषज्ञ टैलेंट, गवर्नेंस सिस्टम और लगातार ट्रेनिंग पर बड़ा निवेश करना पड़ता है। EY India का भी कहना है कि कंसल्टिंग की फीस किसी तय फॉर्मूले से नहीं चलती, बल्कि हर प्रोजेक्ट की जरूरत, जटिलता और दायरे के हिसाब से तय होती है। कंपनी का मानना है कि AI कुछ दोहराव वाले और प्रशासनिक कामों में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम सलाह देने के लिए सेक्टर की समझ, पेशेवर निर्णय और मानवीय निगरानी अब भी उतनी ही जरूरी है।
कंसल्टिंग फर्म Uniqus Consultech ने भी यही तर्क दिया है कि अगर किसी प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी शामिल की जा रही है, तो उसकी कीमत भी बिल का हिस्सा बनेगी। कंपनी का कहना है कि AI के साथ काम करने के लिए सिर्फ टूल खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिए अतिरिक्त नियंत्रण, गलतियों को रोकने की व्यवस्था और खुद के AI सिस्टम विकसित करने की लागत भी जुड़ती है। यानी एक तरफ जूनियर स्टाफ पर खर्च घटता है, तो दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञ निगरानी पर खर्च बढ़ जाता है।
कंसल्टिंग फर्मों का तर्क: AI के साथ नई टेक, सुरक्षा और विशेषज्ञता की लागत भी जुड़ी
अब इस सेक्टर में फीस तय करने का तरीका भी बदलता दिख रहा है। पहले कई मामलों में बिलिंग घंटे या टीम के आकार के हिसाब से होती थी, लेकिन अब कई कंपनियां “वैल्यू-बेस्ड मॉडल” की तरफ बढ़ रही हैं। इसका मतलब है कि फीस इस आधार पर तय हो सकती है कि किसी प्रोजेक्ट से क्लाइंट को कितना फायदा, कितनी बचत या कितना बिजनेस असर मिलने वाला है। KPMG in India के अधिकारियों का कहना है कि अब बातचीत इस बात पर ज्यादा हो रही है कि AI के जरिए क्लाइंट को अलग और बेहतर नतीजे कैसे दिए जाएं, और उसी हिसाब से फीस तय की जाए।
AI ने कंसल्टिंग फर्मों के लिए एक नया बाजार भी खोल दिया है। अब सिर्फ बड़े कॉरपोरेट ही नहीं, बल्कि ज्यादा कंपनियां AI अपनाने, अपने सिस्टम बदलने, ऑटोमेशन लाने और नई टेक क्षमताएं विकसित करने के लिए बाहरी सलाह ले रही हैं। Kearney India का कहना है कि AI की वजह से कंसल्टिंग का कुल बाजार बड़ा हुआ है। अब प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ रही है, लेकिन टीम की बनावट बदल रही है। पहले जहां ज्यादा जूनियर एनालिस्ट होते थे, अब वहां कम एनालिस्ट और ज्यादा मिड-लेवल या अनुभवी कंसल्टेंट की जरूरत पड़ रही है, क्योंकि काम की प्रकृति बदल चुकी है।
AI के बाद कंसल्टिंग सेक्टर में क्या बदल रहा है
- फीस मॉडल: घंटे और टीम साइज की जगह वैल्यू-बेस्ड मॉडल की तरफ बढ़त
- क्लाइंट मांग: तेज नतीजे, ज्यादा automation और measurable business impact पर जोर
- टीम संरचना: कम जूनियर एनालिस्ट, ज्यादा mid-level और senior consultants की जरूरत
- नया बाजार: AI adoption, ERP, automation और transformation projects के लिए advisory demand बढ़ी
- नए शहरों में विस्तार: टियर-2 और टियर-3 शहरों में consulting firms नए अवसर तलाश रही हैं
- मुख्य बदलाव: सिर्फ speed नहीं, बल्कि accuracy, governance और trusted outcomes पर फोकस
इस बदलाव का असर भारत के छोटे शहरों में भी दिख रहा है। बड़ी कंसल्टिंग और ऑडिट फर्में अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। टैक्स सलाह, पारिवारिक कारोबारों में उत्तराधिकार योजना, मर्जर और अधिग्रहण, ERP सिस्टम लागू करने और बिजनेस प्रोफेशनलाइजेशन जैसी सेवाओं की मांग इन शहरों में बढ़ रही है। यही वजह है कि KPMG, EY, PwC, Deloitte जैसी बड़ी कंपनियां जयपुर, कोयंबटूर, मैसूर, भुवनेश्वर, जमशेदपुर, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में अवसर तलाश रही हैं।
AI से बाजार बढ़ा, टीम संरचना बदली और टियर-2 शहरों में अवसर बढ़े
कुल मिलाकर, AI ने कंसल्टिंग इंडस्ट्री का काम करने का तरीका जरूर बदल दिया है, लेकिन इससे सेवाएं सस्ती होने की उम्मीद फिलहाल पूरी नहीं हुई है। जूनियर स्तर के कई काम अब मशीनें तेजी से कर रही हैं, लेकिन उसी के साथ जोखिम भी बढ़े हैं, जिनसे निपटने के लिए अनुभवी पेशेवरों, बेहतर निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निवेश की जरूरत पड़ रही है। यही कारण है कि भारत की बड़ी कंसल्टिंग फर्में अपनी फीस घटाने के बजाय अब यह बताने में लगी हैं कि AI के दौर में उनकी भूमिका सिर्फ काम जल्दी करने की नहीं, बल्कि सही, सुरक्षित और भरोसेमंद नतीजे देने की है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी व्यावसायिक, तकनीकी या निवेश निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें।

