₹10,000 करोड़ का नया फंड: अब छोटे शहरों के स्टार्टअप्स को भी मिलेगा बड़ा मौका

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भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है और अब सरकार इसे अधिक संगठित, व्यापक और लक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। केंद्र की नई Startup India Fund of Funds 2.0 पहल का मकसद राज्यों, निवेशकों और स्टार्टअप्स को एक साझा राष्ट्रीय ढांचे में जोड़कर खास तौर पर डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग और उभरते शहरों तक पूंजी पहुंचाना है।

यह खबर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़े बदलाव की तरफ इशारा करती है। केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अलग-अलग स्टार्टअप फंड बनाने के बजाय ₹10,000 करोड़ के नए Startup India Fund of Funds 2.0 के तहत मिलकर निवेश करें।

Startup India Fund of Funds 2.0: राज्यों को साझा निवेश प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी

सरकार का मकसद यह है कि स्टार्टअप फंडिंग को एक ही राष्ट्रीय ढांचे के अंदर मजबूत किया जाए, ताकि छोटे शहरों, कस्बों और उभरते स्टार्टअप क्षेत्रों तक भी पूंजी पहुंच सके। खास तौर पर डीप टेक, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और ऐसे सेक्टर, जहां शुरुआत में ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है, उन्हें इस नई व्यवस्था से फायदा मिलने की उम्मीद है।

सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वे अपने अलग फंड बनाने के बजाय इस नई योजना के साथ जुड़ें और अपनी स्टार्टअप नीतियों को इसके अनुसार तैयार करें।

राज्यों को यह भी सुझाव दिया गया है कि वे अपने इनक्यूबेटर्स को डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए मजबूत करें, स्टार्टअप्स को निवेश के लिए तैयार करने में मदद करें, जरूरी दस्तावेज, अनुपालन और कैप टेबल जैसी प्रक्रियाओं को आसान बनाएं, और छोटे शहरों में वर्कशॉप व जागरूकता कार्यक्रम चलाकर संस्थापकों और निवेशकों को जोड़ें। साथ ही, सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग संगठनों को भी सेक्टर आधारित AIFs के साथ जोड़ने की बात कही गई है।

राज्यों के लिए केंद्र की नई रणनीति और निवेश तैयारियों पर जोर

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की बड़ी बातें

  • कुल कोष: ₹10,000 करोड़
  • मुख्य उद्देश्य: राज्यों को अलग-अलग फंड बनाने के बजाय साझा राष्ट्रीय निवेश प्लेटफॉर्म से जोड़ना
  • फोकस सेक्टर: डीप टेक, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, माइक्रो वेंचर कैपिटल और एग्नॉस्टिक फंड
  • लाभार्थी क्षेत्र: टियर-2, टियर-3 शहर, छोटे कस्बे और उभरते स्टार्टअप हब
  • केंद्र की भूमिका: AIFs में निवेश के जरिए पूंजी उपलब्ध कराने का विस्तार
  • राज्यों से अपेक्षा: इनक्यूबेटर मजबूत करना, निवेश तैयारी बढ़ाना और स्थानीय स्टार्टअप नेटवर्क को सक्रिय करना

यह नया Fund of Funds 2.0, 2016 में शुरू हुए पुराने Startup India Fund of Funds का अगला संस्करण है। फरवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी थी। सरकार का मानना है कि पहले फंड के अनुभव के आधार पर अब नई योजना को ज्यादा लक्षित और प्रभावी बनाया गया है।

पुराने मॉडल में निवेश का ढांचा काफी हद तक सेक्टर-न्यूट्रल था, लेकिन अब नई योजना में चार अलग निवेश श्रेणियां बनाई गई हैं—डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग, माइक्रो वेंचर कैपिटल और एग्नॉस्टिक फंड। इसका मतलब यह है कि अब फंडिंग को अलग-अलग जरूरतों और सेक्टरों के हिसाब से बेहतर तरीके से बांटा जा सकेगा।

नई योजना में सरकार की भागीदारी भी बढ़ाई गई है। पहले सरकार किसी AIF में अधिकतम 25% तक निवेश करती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 40% तक किया जा सकता है। डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए निवेश अवधि भी 12 साल से बढ़ाकर 18 साल तक की गई है, क्योंकि इन सेक्टरों में कारोबार खड़ा होने और रिटर्न आने में ज्यादा समय लगता है। इसके अलावा, पहले इस योजना को मुख्य रूप से SIDBI संभालता था, लेकिन अब इसे मल्टी-एजेंसी मॉडल के तहत लागू किया जाएगा, यानी आगे और एजेंसियां भी इसमें शामिल की जा सकती हैं।

नई योजना में क्या बदला: सेक्टर आधारित निवेश, लंबी अवधि और ज्यादा सरकारी भागीदारी

सरकार इस योजना के जरिए सिर्फ बड़े शहरों के स्टार्टअप्स पर ध्यान नहीं देना चाहती, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी निवेश का माहौल बनाना चाहती है। DPIIT के सचिव की अध्यक्षता में एक सशक्त समिति इस पूरे ढांचे की निगरानी करेगी।

साथ ही, निवेश से मिलने वाले रिटर्न का 5% हिस्सा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करने की योजना भी बनाई गई है। इसका उद्देश्य सिर्फ फंड देना नहीं, बल्कि लंबे समय में ऐसा माहौल बनाना है जहां नए स्टार्टअप्स को निवेश, मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ने के बेहतर मौके मिलें।

किन स्टार्टअप्स और शहरों को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है

  • डीप टेक स्टार्टअप्स: जिन्हें शुरुआती चरण में अधिक पूंजी और लंबा निवेश समय चाहिए
  • मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप्स: जिनका कारोबार खड़ा होने और स्केल होने में समय लगता है
  • टियर-2 और टियर-3 शहर: जहां स्टार्टअप्स हैं लेकिन पूंजी और निवेश नेटवर्क सीमित हैं
  • इनक्यूबेटर नेटवर्क: जिन्हें निवेश-तैयारी, अनुपालन और कैप टेबल सहायता के लिए मजबूत किया जाएगा
  • महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स: जिन्हें पहले Fund of Funds मॉडल में भी पूंजी का लाभ मिला था
  • उभरते संस्थापक: जिन्हें वर्कशॉप, जागरूकता कार्यक्रम और निवेशक कनेक्ट के जरिए मदद मिल सकती है

इस कदम को उद्योग जगत से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डीप टेक स्टार्टअप्स को अक्सर शुरुआती दौर में पर्याप्त पूंजी नहीं मिलती, इसलिए यह योजना उनके लिए मददगार साबित हो सकती है।

कुछ राज्यों ने पहले ही अपने स्तर पर फंड शुरू किए हैं, जैसे कर्नाटक ने बेंगलुरु के बाहर इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक क्लस्टर सीड फंड लॉन्च किया है, लेकिन अब केंद्र चाहता है कि सभी राज्य अलग-अलग रास्ते अपनाने के बजाय एक साझा राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के जरिए काम करें, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और ज्यादा स्टार्टअप्स तक मदद पहुंच सके।

टियर-2 और टियर-3 शहरों तक फंडिंग पहुंचाने पर फोकस

DPIIT के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक भारत में 2.35 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को आधिकारिक मान्यता मिल चुकी है और इनसे 24 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं। इनमें करीब आधे स्टार्टअप गैर-मेट्रो क्षेत्रों में मौजूद हैं, जो यह दिखाता है कि उद्यमिता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

1.12 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या पार्टनर है, जबकि 30 से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी स्टार्टअप नीतियां भी जारी की हैं। सरकार के पहले Fund of Funds के तहत 145 से ज्यादा AIFs में ₹10,000 करोड़ से अधिक की प्रतिबद्धता दी गई थी, जिन्होंने आगे चलकर स्टार्टअप्स में ₹27,600 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया। इससे 1,450 से अधिक स्टार्टअप्स को फंडिंग मिली और बड़ी संख्या में महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स तक भी पूंजी पहुंची।

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का बढ़ता आकार और पहले फंड का असर

कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम भारत के स्टार्टअप निवेश ढांचे को ज्यादा संगठित, व्यापक और लक्ष्य-आधारित बनाने की कोशिश है। यदि राज्य सरकारें अलग-अलग फंड बनाने के बजाय इस साझा प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ती हैं, तो इससे न केवल पूंजी का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि छोटे शहरों, नई तकनीक वाले क्षेत्रों और लंबे समय की जरूरत वाले उद्योगों को भी मजबूत सहारा मिल सकेगा।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी निवेश, नीति या व्यावसायिक निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोत अवश्य जांचें।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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