आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती तकनीक के साथ Deepfake वीडियो का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। एक सर्वे के अनुसार, हर दो में से एक भारतीय ने पिछले 12 महीनों में सोशल मीडिया, OTT प्लेटफॉर्म या WhatsApp पर कई नकली वीडियो देखे हैं।
Deepfake Video का बढ़ता खतरा, आधे भारतीयों ने देखे नकली वीडियो
LocalCircles के सर्वे में 35 हजार से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। सर्वे में करीब 48 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने जो वीडियो देखे, उनमें से 10 प्रतिशत से ज्यादा वीडियो बाद में नकली पाए गए।
सर्वे में यह भी सामने आया कि 10 में से 7 लोग चाहते हैं कि Deepfake वीडियो बनाने को अपराध घोषित किया जाए और इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान हो।
Deepfake के खिलाफ सख्त कानून की मांग
यह सर्वे ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार AI से बनाए गए नकली वीडियो और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे मामलों के लिए अलग कानून बनाने पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि मौजूदा कानूनों में ऐसे अपराधों के लिए विशेष प्रावधान नहीं हैं।
सरकार के नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को AI से बने कंटेंट की पहचान बतानी होगी और अवैध नकली सामग्री को तय समय के अंदर हटाना होगा।
AI से बने Fake Content का गलत इस्तेमाल बढ़ा
सरकार ने Deepfake को समाज के लिए एक नई चुनौती बताया है। AI से बनाए गए वीडियो, फोटो और नकली आवाज का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, किसी की छवि खराब करने, धोखाधड़ी करने और लोगों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में Deepfake फाइलों की संख्या साल 2023 में करीब 5 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 80 लाख तक पहुंच गई है।
Deepfake Technology की मुख्य बातें
- सर्वे: 35 हजार से ज्यादा लोगों की राय शामिल
- खतरा: नकली वीडियो, फोटो और आवाज का गलत इस्तेमाल
- मांग: Deepfake बनाने पर सख्त कानून
- कार्रवाई: प्लेटफॉर्म को Fake Content हटाना होगा
- उद्देश्य: डिजिटल सुरक्षा और भरोसा बनाए रखना
Deepfake से लोगों और संस्थानों को नुकसान
सर्वे में शामिल रिपोर्ट के अनुसार, कई संस्थानों ने भी Deepfake से जुड़े हमलों का सामना किया है। वहीं, AI से बनी गलत जानकारी के कारण कई लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की जरूरत है। अदालत ने कहा कि Deepfake का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने और किसी की पहचान की नकल करने के लिए किया जा सकता है।
सरकार और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
न्यायालय ने यह भी कहा कि नया अपराध तय करना और उसके लिए कानून बनाना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए सरकार को इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।
Deepfake तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए आने वाले समय में इसके खिलाफ सख्त नियम और कानून बनाए जाने की संभावना है, ताकि लोगों की सुरक्षा और डिजिटल भरोसा बनाए रखा जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. Deepfake Video क्या होता है?
Deepfake Video AI तकनीक से बनाया गया नकली वीडियो होता है, जिसमें किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा या पहचान को बदलकर गलत जानकारी दिखाई जा सकती है।
2. Deepfake वीडियो खतरनाक क्यों हैं?
Deepfake वीडियो का इस्तेमाल धोखाधड़ी, गलत जानकारी फैलाने, किसी की छवि खराब करने और लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा सकता है।
3. कितने भारतीयों ने Deepfake वीडियो देखे हैं?
सर्वे के अनुसार, करीब आधे भारतीयों ने पिछले 12 महीनों में सोशल मीडिया, OTT या WhatsApp पर नकली वीडियो देखे हैं।
4. क्या Deepfake बनाना अपराध हो सकता है?
सरकार Deepfake वीडियो बनाने और गलत इस्तेमाल रोकने के लिए सख्त नियम और कानून बनाने पर विचार कर रही है।
5. Deepfake से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
किसी भी वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचनी चाहिए और संदिग्ध कंटेंट से सावधान रहना चाहिए।
निष्कर्ष
AI तकनीक के विकास के साथ Deepfake वीडियो का खतरा भी बढ़ रहा है। नकली कंटेंट से बचने के लिए मजबूत कानून, डिजिटल जागरूकता और सावधानी जरूरी है। इससे ऑनलाइन सुरक्षा और लोगों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है।

