Air India Pilot Test: सभी पायलटों की Drug जांच शुरू

एयर इंडिया ने गुरुवार से अपने सभी पायलट और को-पायलट की नशीले या प्रतिबंधित पदार्थों की जांच शुरू कर दी है। टाटा समूह के नियंत्रण में आने के बाद यह पहली बार है जब एयर इंडिया समूह के सभी पायलटों की एक साथ ऐसी जांच की जा रही है। यह कदम फुकेत से दिल्ली आने वाली उड़ान में हुई घटना के बाद उठाया गया है।

एयर इंडिया के सभी पायलटों की जांच शुरू

इस जांच में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस से जुड़े सभी पायलट शामिल हैं। एयर इंडिया के पास 181 विमान और करीब 3,500 पायलट हैं, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास 105 विमान और लगभग 1,500 पायलट हैं। कंपनी ने बताया कि यह जांच मौजूदा नियमों के तहत जरूरी प्रक्रिया से आगे की पहल है।

एयर इंडिया के संचालन विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनीष उप्पल ने पायलटों को भेजे संदेश में कहा कि समूह के सभी पायलटों की पूरी जांच की जाएगी। इसमें ऐसे पदार्थों या दवाओं की पहचान की जाएगी जिनका इस्तेमाल मौजूदा नियमों के तहत अनुमति नहीं है। एयरलाइन ने कहा कि वह पहले से ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सभी जरूरी नियमों का पालन करती है।

कंपनी के अनुसार, यह एक बार की व्यापक जांच है। इसे गुरुग्राम स्थित एयर इंडिया अकादमी, उड़ान के बाद होने वाली ब्रीफिंग जगहों, एयर इंडिया के कार्यालयों और अलग-अलग बेस पर उपलब्ध केंद्रों में किया जा रहा है। एयरलाइन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य यात्रियों और अन्य संबंधित लोगों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बनाए रखना है।

✈️ एयर इंडिया पायलट जांच

  • जांच: सभी पायलट और को-पायलट शामिल
  • एयर इंडिया: करीब 3,500 पायलट
  • एयर इंडिया एक्सप्रेस: करीब 1,500 पायलट
  • उद्देश्य: प्रतिबंधित पदार्थों की पहचान और सुरक्षा भरोसा मजबूत करना
  • स्थान: अकादमी, कार्यालयों और अलग-अलग बेस पर जांच

DGCA के नियमों के तहत जांच की प्रक्रिया

नियमों के अनुसार, DGCA को हर साल कम से कम 10 प्रतिशत पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की नशीले पदार्थों से जुड़ी जांच करानी होती है। एयरलाइनों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने पायलटों के मूत्र के नमूनों की जांच निर्धारित पदार्थों के लिए कराएं।

यदि शुरुआती जांच में किसी नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ की संभावना मिलती है, तो उसे ‘नॉन-नेगेटिव’ माना जाता है। इसके बाद नमूने की पुष्टि के लिए दूसरी जांच की जाती है। अगर दूसरी जांच में भी परिणाम सकारात्मक आता है, तो जांच केंद्र इसकी जानकारी सीधे DGCA को देता है।

पहली बार जांच में सकारात्मक पाए जाने वाले पायलट को इलाज या नशामुक्ति प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसके बाद विशेषज्ञों से फिटनेस प्रमाण मिलने पर वह दोबारा उड़ान भर सकता है। दूसरी बार सकारात्मक परिणाम आने पर लाइसेंस को तीन साल तक निलंबित किया जा सकता है, जबकि तीसरी बार ऐसी स्थिति सामने आने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।

फुकेत-दिल्ली उड़ान घटना के बाद बढ़ी जांच

एयर इंडिया की यह कार्रवाई 4 अगस्त को हुई फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना के बाद सामने आई है। एयरबस A320 विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था और इस घटना में 20 यात्रियों तथा चार केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। विमान का पंजीकरण VT-EXO था और उड़ान संख्या AI 2379 थी। इस घटना को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गंभीर घटना माना है।

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस मामले की जांच कर रहा है। जांच में तकनीकी, संचालन, चिकित्सा और मानव व्यवहार से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है। इसमें उड़ान के आंकड़े, विमान की प्रणालियों से जुड़े रिकॉर्ड, रखरखाव दस्तावेज और संबंधित लोगों के बयान देखे जा रहे हैं।

⚠️ फुकेत-दिल्ली उड़ान की जांच

  • घटना: 4 अगस्त की फुकेत-दिल्ली उड़ान
  • विमान: Airbus A320
  • फ्लाइट: AI 2379
  • पंजीकरण: VT-EXO
  • घायल: 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य
  • जांच एजेंसी: AAIB

जांच केवल पायलटों के व्यवहार तक सीमित नहीं है। अधिकारी विमान में सामने आई संभावित तकनीकी खराबियों और उनके कारणों की भी जांच कर रहे हैं। फ्रांस की विमान सुरक्षा जांच एजेंसी और विमान निर्माता एयरबस के प्रतिनिधि भी तकनीकी जानकारी तथा डिजाइन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में AAIB की सहायता कर रहे हैं।

इस घटना के बाद एयर इंडिया की संचालन व्यवस्था और कॉकपिट में मौजूद चालक दल की फिटनेस पर भी सवाल उठे हैं। मामले को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के निवर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन को भी तलब किया था। एयरलाइन हाल के कुछ अन्य मामलों को लेकर भी नियामकीय निगरानी में रही है।

यह घटना जून 2025 में अहमदाबाद से लंदन जा रहे एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान हादसे के करीब एक साल बाद हुई है। उस हादसे में विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और 260 लोगों की मौत हुई थी। इसलिए नई घटना के बाद एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

एयर इंडिया में नेतृत्व स्तर पर बदलाव

एयर इंडिया में इस समय नेतृत्व स्तर पर भी बदलाव हो रहा है। कंपनी ने 5 अगस्त को इथियोपियन एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख टेवोल्डे गेबरियम को विल्सन का उत्तराधिकारी नियुक्त करने की जानकारी दी थी। वहीं टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भी कहा है कि उनका कार्यकाल 20 फरवरी को समाप्त होने पर वह पद छोड़ देंगे।

दूसरी ओर, इंडिगो ने बताया कि उसने DGCA के नियम आने से कई साल पहले ही अपने फ्लाइट क्रू की ऐसी जांच शुरू कर दी थी। एयरलाइन के अनुसार, इंडिगो में शामिल होने वाले सभी फ्लाइट क्रू की जांच की जाती है, जबकि नियमित कर्मचारियों की जांच समय-समय पर चुने गए आधार पर होती है। कंपनी ने कहा कि वह पायलटों के लिए तय 10 प्रतिशत की न्यूनतम जांच सीमा से आगे जाकर प्रक्रिया अपनाती है।

इंडिगो ने यह भी बताया कि उसके केबिन क्रू, इंजीनियरिंग और ग्राउंड स्टाफ की भी ऐसी जांच की जाती है। एयर इंडिया की मौजूदा व्यापक जांच को इसी तरह सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और यात्रियों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।

Disclaimer: यह जानकारी समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे किसी निष्कर्ष या आधिकारिक जांच रिपोर्ट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

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