एयरपोर्ट पर UDF शुल्क में बड़ा बदलाव! अब अधूरी सुविधा का पैसा नहीं देंगे यात्री

एयरपोर्ट पर यात्रियों से वसूले जाने वाले यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) को लेकर नई व्यवस्था आने की संभावना है। इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों पर अनावश्यक शुल्क का बोझ कम करना और शुल्क व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।

एयरपोर्ट UDF नियमों में बदलाव का प्रस्ताव

एयरपोर्ट पर यात्रियों से लिए जाने वाले यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है। एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AERA) ने प्रस्ताव दिया है कि एयरपोर्ट कंपनियां किसी बड़े निर्माण या विस्तार प्रोजेक्ट का खर्च यात्रियों से तभी वसूलें, जब वह प्रोजेक्ट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाए और यात्रियों के इस्तेमाल के लिए शुरू हो जाए। अभी कई मामलों में एयरपोर्ट कंपनियां प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही उसका खर्च यात्री शुल्क में शामिल कर लेती हैं।

मौजूदा व्यवस्था के तहत एयरपोर्ट ऑपरेटर अपनी पांच साल की योजना में बड़े निर्माण कार्यों का खर्च शामिल करते हैं। मंजूरी मिलने के बाद वे यात्रियों से लिए जाने वाले शुल्क के जरिए इस खर्च की भरपाई शुरू कर सकते हैं, भले ही प्रोजेक्ट अभी पूरा न हुआ हो। AERA का मानना है कि यात्रियों से किसी ऐसी सुविधा का पैसा नहीं लिया जाना चाहिए, जो अभी उपलब्ध ही नहीं है।

UDF नियमों में प्रस्तावित बदलाव

  • प्रस्ताव: प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ही खर्च वसूला जाए
  • संस्था: एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AERA)
  • मौजूदा व्यवस्था: निर्माण शुरू होने से पहले शुल्क वसूली संभव
  • उद्देश्य: यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ कम करना
  • फायदा: शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ना

बड़े एयरपोर्ट विस्तार प्रोजेक्ट पर असर

इस बदलाव की जरूरत तब महसूस हुई जब बेंगलुरु और हैदराबाद एयरपोर्ट ने बड़े विस्तार प्रोजेक्ट की योजनाएं पेश कीं। बेंगलुरु एयरपोर्ट ने करीब 18,635 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है, जबकि हैदराबाद एयरपोर्ट लगभग 14,000 करोड़ रुपये के विस्तार की तैयारी कर रहा है।

अगर AERA का यह प्रस्ताव लागू होता है तो एयरपोर्ट कंपनियों को शुरुआत में खुद निवेश करना होगा और जब प्रोजेक्ट पूरा होकर इस्तेमाल में आएगा, तभी उसका खर्च यात्रियों और एयरलाइंस से लिया जा सकेगा। इससे यात्रियों पर तुरंत अतिरिक्त शुल्क का बोझ कम हो सकता है।

यात्रियों और एयरपोर्ट कंपनियों पर प्रभाव

  • यात्रियों के लिए: अधूरी सुविधाओं का शुल्क नहीं देना होगा
  • एयरपोर्ट कंपनियों के लिए: शुरुआती निवेश खुद करना होगा
  • बड़ा असर: नकदी प्रवाह और फंडिंग पर प्रभाव
  • समर्थन: यात्री संगठनों ने प्रस्ताव का स्वागत किया
  • चुनौती: भविष्य में शुल्क बढ़ोतरी का खतरा

एयरपोर्ट कंपनियों ने जताई चिंता

हालांकि एयरपोर्ट कंपनियां इस बदलाव से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे उनके पैसे के प्रबंधन और प्रोजेक्ट को पूरा करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। बेंगलुरु एयरपोर्ट का कहना है कि नई व्यवस्था से परियोजनाओं की फंडिंग और नकदी प्रवाह पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।

AERA ने बताया कि पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए यात्रियों से शुल्क वसूला गया, लेकिन किसी कारण से वह प्रोजेक्ट तय समय में पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में यात्रियों ने ऐसी सुविधाओं के लिए भी भुगतान किया, जिनका उन्हें लाभ नहीं मिला।

यात्रियों के हित में माना जा रहा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यात्रियों के हित में है, लेकिन भविष्य में जब प्रोजेक्ट पूरे होंगे तो एयरपोर्ट शुल्क में अचानक बढ़ोतरी का खतरा भी रह सकता है। इसलिए शुल्क बढ़ाने की प्रक्रिया को संतुलित तरीके से लागू करना जरूरी होगा।

यात्री संगठनों ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यात्रियों से किसी सुविधा का पैसा तभी लिया जाना चाहिए, जब वह सुविधा वास्तव में उपलब्ध हो जाए। जैसे किसी सड़क का टोल तभी लिया जाता है जब सड़क बनकर तैयार हो जाती है, उसी तरह एयरपोर्ट सुविधाओं के लिए भी भुगतान इस्तेमाल शुरू होने के बाद होना चाहिए।

अगर यह नियम लागू होता है तो आने वाले समय में एयरपोर्ट शुल्क तय करने का तरीका बदल सकता है और यात्रियों को अधूरी परियोजनाओं का खर्च पहले से नहीं उठाना पड़ेगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। नियमों में बदलाव संबंधित प्राधिकरण के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

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