स्पैम कॉल रोकने की तैयारी, WhatsApp और Google से जुड़ेगा TRAI

भारत में बढ़ते स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए सरकार और टेलीकॉम सेक्टर नई व्यवस्था तैयार कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य यूजर्स को अनचाहे कॉल, मैसेज और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बेहतर सुरक्षा देना है।

TRAI स्पैम रोकने के लिए Meta और Google से करेगा डेटा शेयरिंग पर चर्चा

भारत में बढ़ते स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या को कम करने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) एक नई व्यवस्था पर काम कर रही है। इसके तहत TRAI, Meta और Google के साथ बातचीत कर रहा है ताकि WhatsApp और मोबाइल फोन के इन-बिल्ट डायलर ऐप पर मिलने वाली स्पैम शिकायतों को टेलीकॉम कंपनियों के सिस्टम से जोड़ा जा सके।

इस योजना का उद्देश्य स्पैम और ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करना है। फिलहाल WhatsApp और फोन डायलर ऐप पर दर्ज होने वाली स्पैम शिकायतें उन्हीं प्लेटफॉर्म के सिस्टम तक सीमित रहती हैं। TRAI चाहता है कि इन शिकायतों को एक साझा डेटाबेस में शामिल किया जाए, जिससे टेलीकॉम कंपनियां और रेगुलेटर बार-बार स्पैम करने वाले नंबरों की पहचान कर कार्रवाई कर सकें।

TRAI की नई एंटी-स्पैम योजना

  • लक्ष्य: स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज पर तेजी से कार्रवाई
  • साझेदार: Meta, Google और टेलीकॉम कंपनियां
  • डेटा स्रोत: WhatsApp और मोबाइल डायलर ऐप
  • उद्देश्य: साझा स्पैम डेटाबेस तैयार करना
  • फायदा: बार-बार स्पैम करने वाले नंबरों की पहचान

DLT और DND सिस्टम से पहले से हो रही निगरानी

TRAI पहले से ही DLT यानी डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और DND सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। DLT प्लेटफॉर्म पर टेलीकॉम कंपनियां टेलीमार्केटर्स का रजिस्ट्रेशन करती हैं और कमर्शियल मैसेज की निगरानी करती हैं। वहीं DND ऐप के जरिए लोग अनचाहे कॉल और मैसेज की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, TRAI ने Meta और Google के साथ कई बैठकें की हैं ताकि WhatsApp और Google के फोन डायलर से मिलने वाली स्पैम रिपोर्ट को टेलीकॉम कंपनियों के सिस्टम से जोड़ा जा सके। इससे ऐसे लोगों और कंपनियों पर कार्रवाई आसान हो जाएगी जो लगातार यूजर्स को परेशान करने वाले कॉल और मैसेज भेजते हैं।

स्पैम शिकायतों से जुड़ी अहम जानकारी

  • DND ऐप शिकायतें: साल 2025 में 17 लाख से ज्यादा
  • निगरानी: DLT प्लेटफॉर्म के जरिए
  • कनेक्शन: WhatsApp, Google डायलर और टेलीकॉम सिस्टम
  • मुख्य चुनौती: डेटा सुरक्षा और यूजर प्राइवेसी
  • संभावित फायदा: फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी में कमी

WhatsApp डेटा शेयरिंग को लेकर प्राइवेसी चुनौती

TRAI के अनुसार, साल 2025 में DND ऐप के जरिए 17 लाख से ज्यादा स्पैम शिकायतें दर्ज की गई थीं। एक सर्वे के मुताबिक, WhatsApp इस्तेमाल करने वाले बड़ी संख्या में यूजर्स रोजाना अनचाहे कमर्शियल मैसेज का सामना करते हैं।

हालांकि, WhatsApp से स्पैम डेटा साझा करने को लेकर कुछ चुनौतियां भी हैं। Meta यूजर प्राइवेसी और तकनीकी मुद्दों को लेकर सावधानी बरत रहा है। डेटा शेयर करने की प्रक्रिया किस तरह होगी और यूजर्स की निजी जानकारी सुरक्षित कैसे रखी जाएगी, इस पर अभी चर्चा चल रही है।

Truecaller और डायलर ऐप को जोड़ने की तैयारी

TRAI कॉल मैनेजमेंट ऐप जैसे Truecaller और मोबाइल कंपनियों के डायलर ऐप को भी एंटी-स्पैम सिस्टम से जोड़ने की योजना बना रहा है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, इन ऐप पर यूजर्स द्वारा रिपोर्ट किए गए स्पैम कॉल को TRAI के DLT प्लेटफॉर्म पर शिकायत के रूप में दर्ज किया जा सकता है।

टेलीकॉम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सभी कंपनियां मिलकर स्पैम डेटा साझा करती हैं तो फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए डेटा सुरक्षा, तकनीकी व्यवस्था और खर्च को लेकर स्पष्ट नियम बनाना जरूरी होगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। नियमों और तकनीकी व्यवस्थाओं में बदलाव संभव है।

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