मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका-ईरान संबंध, फेडरल रिजर्व की नीति और महंगाई के संकेतों के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। पिछले सप्ताह दोनों देशों के बीच हुए हमलों और युद्धविराम को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक फिसल गई।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोने की कीमतों में गिरावट
शुक्रवार को 1.6 फीसदी की बढ़त के बाद सोमवार को स्पॉट गोल्ड में लगभग 0.9 फीसदी की गिरावट देखी गई। वहीं, सप्ताहांत में दोनों पक्षों के जवाबी हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ और कतर से पेट्रोलियम लेकर जा रहे एक टैंकर पर भी हमला हुआ। इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों ने फिलहाल आगे के हमले रोकने पर सहमति जताई है और मंगलवार को दोहा में वार्ता करने की योजना बनाई है। निवेशकों की निगाहें अब इस बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।
📌 सोने की कीमत में गिरावट की बड़ी बातें
- मुख्य कारण: अमेरिका-ईरान तनाव
- स्पॉट गोल्ड: करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास
- सोमवार की चाल: लगभग 0.9% की गिरावट
- कच्चा तेल: भू-राजनीतिक तनाव से तेजी
- निवेशकों की नजर: दोहा वार्ता के नतीजों पर
बाजार की नजर दोहा वार्ता पर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि 4,000 डॉलर के आसपास सोने की कीमत टिके रहना इस बात का संकेत है कि इस स्तर पर खरीदारी करने वाले निवेशक अभी भी सक्रिय हैं। उनका मानना है कि मामूली गिरावट आने पर बाजार में दोबारा खरीदारी देखने को मिल रही है, जिससे सोने को मजबूत समर्थन मिल रहा है।
इस बीच, अमेरिका के ताजा मुद्रास्फीति आंकड़े भी निवेशकों के लिए अहम रहे। मई में अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक में 0.4 फीसदी की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार के अनुमान के अनुरूप रही। इसके बाद अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों में बदलाव देखने को मिला।
महंगाई और ब्याज दरों का असर
हालांकि, फरवरी के अंत से अब तक सोने की कीमतों में लगभग 23 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई। इसी वजह से यह उम्मीद बढ़ी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रख सकता है, जिसका नकारात्मक असर सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज मुनाफा कमाने वाले कई निवेशक अब बाजार से बाहर निकल चुके हैं। ऐसे में आने वाले समय में सोने की कीमतें भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति पहले की तुलना में अधिक स्थिर रह सकती हैं।
📊 निवेशकों के लिए प्रमुख संकेत
- PCE मुद्रास्फीति: 0.4% मासिक बढ़ोतरी
- ट्रेजरी यील्ड: गिरावट दर्ज
- फेडरल रिजर्व: ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद
- चांदी: 58.50 डॉलर प्रति औंस
- अन्य धातुएं: पैलेडियम और प्लेटिनम में कमजोरी
सोना, चांदी और अन्य धातुओं का ताजा भाव
सिंगापुर समयानुसार सुबह 8:53 बजे स्पॉट गोल्ड 0.6 फीसदी गिरकर 4,064.47 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी की कीमत 1.1 फीसदी गिरकर 58.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इसके अलावा पैलेडियम और प्लेटिनम की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जबकि ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में हल्की बढ़त देखने को मिली।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश संबंधी कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।