इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी Ather Energy के सह-संस्थापक और CEO तरुण मेहता ने सरकार के 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) फंड की तारीफ की है। उन्होंने इसे भारत के तेजी से बढ़ते डीप टेक सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम बताया और कहा कि यह नीति सही समय पर लागू हुई है, जिससे नई तकनीकी कंपनियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
Ather Energy CEO ने RDI फंड को बताया बड़ा कदम
तरुण मेहता के अनुसार, सरकार का 1 लाख करोड़ रुपये का RDI फंड भारत में रिसर्च और नई तकनीक को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनका मानना है कि इससे डीप टेक और हार्डवेयर आधारित स्टार्टअप को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
तरुण मेहता के अनुसार, भारत में डीप टेक और हार्डवेयर से जुड़े स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 18 महीनों में उन्होंने जितने डीप टेक उद्यमियों से मुलाकात की है, उतने पिछले साढ़े 11 वर्षों में नहीं मिले थे। इन क्षेत्रों में ड्रोन, डिफेंस, बैटरी, स्पेस टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग उपकरण बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का RDI फंड एक बड़ी राशि है, जिसका उद्देश्य रिसर्च और नई तकनीक को बढ़ावा देना है। Ather Energy भी इस योजना के शुरुआती लाभार्थियों में शामिल है और कंपनी को कम ब्याज वाले कर्ज के रूप में सहायता मिली है। इस फंड से देश में नई खोज और तकनीकी विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
RDI फंड की मुख्य बातें
- फंड राशि: 1 लाख करोड़ रुपये
- उद्देश्य: रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन को बढ़ावा देना
- लाभार्थी: डीप टेक और हार्डवेयर स्टार्टअप
- क्षेत्र: क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और AI
- सहायता: लंबी अवधि के लिए आर्थिक मदद
- लाभ: नई तकनीक और खोज को बढ़ावा
डीप टेक स्टार्टअप पर बढ़ा फोकस
RDI योजना के तहत क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को लंबी अवधि के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी और इसे 2025 में शुरू किया गया था।
मेहता ने कहा कि आज कई डीप टेक स्टार्टअप केवल निवेशकों की पसंद के कारण नहीं बन रहे हैं, बल्कि वे वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, हार्डवेयर आधारित कंपनियों को तैयार होने में समय लगता है, लेकिन सफल होने पर वे बड़े स्तर पर मूल्य पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि Ather जैसी कंपनियों का विकास यह दिखाता है कि इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप लंबी अवधि में मजबूत growth हासिल कर सकते हैं। इससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ रहा है और नए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप की चुनौतियां
- PLI योजना: कई स्टार्टअप लाभ से बाहर
- कारण: पात्रता नियमों में कठिनाई
- जरूरत: नई कंपनियों के लिए बेहतर समर्थन
- महत्व: EV उद्योग में स्टार्टअप की बड़ी भूमिका
- मांग: ऑटो PLI योजना का विस्तार
- लक्ष्य: नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा
ऑटो PLI योजना में बदलाव की मांग
हालांकि, तरुण मेहता ने ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना में बदलाव की मांग भी की है। उनका कहना है कि कई इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, जबकि वे देश में नई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मौजूदा नियमों के कारण नई कंपनियां पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं कर पातीं। एक तरफ नई कंपनियों के लिए शून्य राजस्व की शर्त है, जबकि दूसरी तरफ मौजूदा कंपनियों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व की आवश्यकता रखी गई है। इससे बीच की श्रेणी में आने वाले स्टार्टअप बाहर रह जाते हैं।
मेहता ने सरकार से अपील की है कि ऑटो PLI योजना का दायरा बढ़ाया जाए ताकि स्टार्टअप को भी इसका फायदा मिल सके। उनके अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की सफलता में स्टार्टअप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और इन्हें आगे बढ़ने के लिए सही नीतिगत समर्थन मिलना चाहिए।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। सरकारी नीतियों और योजनाओं में बदलाव संभव हैं।