Stock Market Crash: गिरावट के बाद भी निवेशकों को मिला बड़ा फायदा

Share Market में निवेश करने वाले हर व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि कहीं पैसा लगाने के तुरंत बाद बाजार में बड़ी गिरावट न आ जाए। कई निवेशक बाजार के सही समय का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन इतिहास बताता है कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वाले लोगों को बड़ी गिरावट के बाद भी अच्छा return मिला है।

बाजार गिरावट के बाद भी निवेशकों को मिला फायदा

एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 के बाद आए सात बड़े बाजार क्रैश के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसमें देखा गया कि अगर किसी निवेशक ने बाजार के सबसे ऊंचे स्तर पर पैसा लगाया होता और फिर भी निवेश जारी रखा होता, तो लंबी अवधि में उसे सकारात्मक परिणाम मिले। यह आंकड़े Nifty 50 TRI के प्रदर्शन पर आधारित हैं।

अध्ययन में डॉट-कॉम बुलबुला, 2004 के चुनाव से जुड़ी बाजार गिरावट, 2006 की वैश्विक ब्याज दरों वाली गिरावट, 2008 का Global Financial Crises, यूरोपीय कर्ज संकट, 2015 में चीन की मुद्रा गिरावट के कारण आई बाजार गिरावट और 2020 के कोरोना संकट को शामिल किया गया।

रिपोर्ट से पता चलता है कि बाजार में गिरावट के समय निवेश करने वालों को शुरुआत में नुकसान जरूर दिखाई दिया, लेकिन लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर उनकी संपत्ति में बढ़ोतरी हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार को सही समय पर पकड़ने के बजाय लंबे समय तक निवेशित रहना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

बड़े बाजार क्रैश से सीख

  • अध्ययन: साल 2000 के बाद सात बड़े बाजार संकट
  • आधार: Nifty 50 TRI प्रदर्शन
  • सबसे बड़ी गिरावट: 2008 वित्तीय संकट
  • मुख्य सीख: लंबे समय तक निवेश बनाए रखना
  • नतीजा: गिरावट के बाद भी सकारात्मक return
  • रणनीति: बाजार टाइमिंग से ज्यादा धैर्य जरूरी

2008 संकट में भी मिला लंबी अवधि का फायदा

सबसे बड़ी गिरावट साल 2008 के वित्तीय संकट के दौरान आई थी। उस समय बाजार अपने उच्चतम स्तर से करीब 59.5 प्रतिशत तक गिर गया था। इसके बावजूद अगर किसी निवेशक ने गिरावट से पहले निवेश किया होता और उसे जून 2026 तक बनाए रखा होता, तो उसे लगभग 9 प्रतिशत सालाना growth मिली। इस दौरान निवेश की कुल वैल्यू करीब 4.7 गुना बढ़ गई।

इसी तरह साल 2000 के डॉट-कॉम संकट से पहले निवेश करने वाले लोगों को शुरुआत में लगभग 50.2 प्रतिशत की गिरावट का सामना करना पड़ा था। लेकिन लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर उन्हें करीब 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिला और जून 2026 तक उनकी संपत्ति लगभग 19.4 गुना बढ़ गई।

सात बड़े बाजार संकटों में से चार ऐसे रहे, जहां लंबे समय में निवेशकों को 10 प्रतिशत या उससे अधिक का सालाना रिटर्न मिला। इससे साफ होता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद धैर्य रखने वाले निवेशकों को फायदा मिल सकता है।

लंबी अवधि निवेश के फायदे

  • धैर्य: बाजार गिरावट में घबराने से बचाव
  • रिटर्न: लंबे समय में संपत्ति बढ़ने की संभावना
  • महंगाई: इक्विटी रिटर्न Inflation से ऊपर रहा
  • रणनीति: सही योजना और जोखिम प्रबंधन जरूरी
  • अवसर: गिरावट में बेहतर निवेश मौके मिल सकते हैं
  • लक्ष्य: लंबी अवधि की वित्तीय योजना पर ध्यान

महंगाई से ऊपर रहा इक्विटी रिटर्न

निवेश से मिलने वाला रिटर्न तभी सही मायने रखता है जब वह महंगाई से ज्यादा हो। आंकड़ों के अनुसार, इन सभी बाजार चक्रों के दौरान Inflation दर औसतन 4 से 6 प्रतिशत के बीच रही। वहीं, सबसे कम 9 प्रतिशत का सालाना इक्विटी रिटर्न भी महंगाई दर से ऊपर रहा।

कोरोना संकट और 2004 की चुनावी अनिश्चितता जैसे समय में शेयर बाजार ने लंबे समय में लगभग 12 से 13 प्रतिशत तक का सालाना रिटर्न दिया। इससे पता चलता है कि बाजार में गिरावट के समय घबराकर निवेश निकालने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाना फायदेमंद हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में गिरावट हमेशा जोखिम नहीं होती, बल्कि अच्छे अवसर भी ला सकती है। हालांकि निवेश करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति, जोखिम क्षमता और लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। सही strategy और धैर्य के साथ लंबे समय में निवेशक बाजार की बड़ी गिरावटों से उबर सकते हैं।

अस्वीकरण: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से दी गई है। निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय सलाह जरूर लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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