दिल्ली के एक दंपति को बैंक की लापरवाही के कारण बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। होम लोन पूरा चुकाने के बाद भी बैंक उनके घर के मूल दस्तावेज वापस नहीं कर पाया। इस मामले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक को दंपति को 15.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
होम लोन चुकाने के बाद भी नहीं मिले प्रॉपर्टी पेपर
मामला दिल्ली के एक कपल से जुड़ा है, जिन्होंने 16 मार्च 2018 को घर खरीदने के लिए एक्सिस बैंक से 1.41 करोड़ रुपये से ज्यादा का होम लोन लिया था। लोन की सुरक्षा के रूप में उन्होंने अपनी संपत्ति के मूल कागजात बैंक के पास जमा किए थे।
दंपति ने 3 मार्च 2021 को पूरा लोन चुका दिया। इसके बाद उन्होंने बैंक से अपने मूल प्रॉपर्टी पेपर वापस मांगे, लेकिन कई बार संपर्क करने के बावजूद बैंक दस्तावेज लौटाने में असफल रहा।
बैंक ने स्वीकार किया दस्तावेज खोने का मामला
अप्रैल 2021 में बैंक ने जानकारी दी कि संपत्ति की मूल बिक्री डीड (Sale Deed) नहीं मिल रही है। बाद में बैंक ने 10 जुलाई 2021 को दस्तावेज खोने की बात स्वीकार की। बैंक ने इसके बाद पुलिस रिपोर्ट, सार्वजनिक सूचना और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त प्रमाणित कॉपी जैसे कदम उठाए।
दस्तावेज नहीं मिलने के बाद दंपति ने सितंबर 2021 में बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत दर्ज की। सुनवाई के दौरान बैंक ने माना कि मूल दस्तावेज उसके पास जमा थे, लेकिन अब वे उपलब्ध नहीं हैं।
बैंक दस्तावेज मामले की मुख्य जानकारी
- बैंक: एक्सिस बैंक
- होम लोन: 1.41 करोड़ रुपये से अधिक
- लोन भुगतान: 3 मार्च 2021
- समस्या: मूल प्रॉपर्टी दस्तावेज गुम
- मुआवजा: 15.5 लाख रुपये
दंपति ने मांगा था 1 करोड़ रुपये मुआवजा
जनवरी 2022 में बैंकिंग लोकपाल ने दंपति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, दंपति ने इसे पर्याप्त नहीं माना और दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मामला पहुंचाया।
दंपति ने आरोप लगाया कि बैंक ने सेवा में लापरवाही की है। उन्होंने मूल दस्तावेज वापस दिलाने या नुकसान के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे और मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये की मांग की थी।
उपभोक्ता आयोग ने बैंक की जिम्मेदारी तय की
उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के दौरान कहा कि बैंक की जिम्मेदारी थी कि वह ग्राहक द्वारा सौंपे गए मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखे। पुलिस शिकायत दर्ज करना, सार्वजनिक सूचना जारी करना और प्रमाणित कॉपी उपलब्ध कराना केवल नुकसान को कम करने के उपाय हैं, इससे बैंक अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
आयोग ने कहा कि संपत्ति के मूल दस्तावेज का महत्व बहुत ज्यादा होता है। इनके बिना मालिक को भविष्य में घर बेचने, गिरवी रखने या अन्य कानूनी कामों में परेशानी हो सकती है।
फैसले में बैंक पर क्या कार्रवाई हुई
- मूल दस्तावेज: बैंक की लापरवाही मानी गई
- मुआवजा: 15 लाख रुपये
- अन्य खर्च: 50 हजार रुपये
- कुल राशि: 15.5 लाख रुपये
- ब्याज: देरी होने पर 9% सालाना
भुगतान में देरी पर देना होगा ब्याज
फैसले में आयोग ने एक्सिस बैंक को मूल प्रॉपर्टी दस्तावेज खोने के लिए 15 लाख रुपये और कानूनी खर्च व अन्य नुकसान के लिए 50 हजार रुपये देने का आदेश दिया। इस तरह कुल मुआवजा 15.5 लाख रुपये तय किया गया।
आयोग ने यह भी कहा कि अगर बैंक दो महीने के अंदर भुगतान नहीं करता है, तो उसे 3 मार्च 2021 से भुगतान की तारीख तक 9% सालाना ब्याज के साथ पूरी राशि देनी होगी।
घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके मूल संपत्ति दस्तावेज बैंक या किसी वित्तीय संस्था के पास जमा रहते हैं। यह मामला बताता है कि बैंक की जिम्मेदारी केवल लोन देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि ग्राहक के दस्तावेजों की सुरक्षा करना भी उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपभोक्ता आयोग के फैसले और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है।
