बैंकों के कर्ज देने के तरीके में पिछले कुछ समय में बदलाव देखने को मिला है। जून तिमाही में खुदरा कर्ज की रफ्तार धीमी हुई, जबकि कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज में तेजी आई। कई बड़े और मध्यम आकार के बैंकों में कॉरपोरेट कर्ज की वृद्धि खुदरा कर्ज से अधिक रही। इसका एक कारण असुरक्षित कर्ज की वृद्धि में कमी और वाहन तथा आवास जैसे कुछ सुरक्षित कर्ज क्षेत्रों की धीमी रफ्तार रही।
बैंकों में कॉरपोरेट कर्ज की रफ्तार बढ़ी
जून तिमाही में ज्यादातर बड़े बैंकों का खुदरा कर्ज सालाना आधार पर 7 से 12 प्रतिशत बढ़ा। भारतीय स्टेट बैंक इस मामले में अलग रहा, जहां खुदरा कर्ज में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। दूसरी ओर, कॉरपोरेट कर्ज की वृद्धि करीब 10 से 18 प्रतिशत रही। एक्सिस बैंक में कॉरपोरेट कर्ज सबसे तेज बढ़ा और इसमें 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
बैंकों के अनुसार, कंपनियों की ओर से कर्ज की मांग बढ़ने के पीछे नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियां मुख्य वजह रही हैं। इन क्षेत्रों में नए निवेश और विस्तार की जरूरत बढ़ने से कंपनियों ने बैंकों से अधिक कर्ज लेना शुरू किया है।
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सी.एस. शेट्टी ने कहा कि पहली तिमाही में आवास क्षेत्र में कर्ज की वृद्धि उम्मीद से थोड़ी धीमी रही। हालांकि बैंक ने इस क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई है। वाहन कर्ज में भी बैंक ने सावधानी बरती, क्योंकि इस क्षेत्र में कंपनियों के बीच कम ब्याज दर और आकर्षक शर्तों को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा है।
आवास और वाहन कर्ज की रफ्तार धीमी
कुछ बैंकों में कृषि कर्ज की वृद्धि भी धीमी रही। बैंकों का कहना है कि इसका संबंध मौसमी बदलाव से है। आम तौर पर कृषि क्षेत्र में कर्ज की मांग वित्त वर्ष की दूसरी और चौथी तिमाही में अधिक रहती है, क्योंकि यह अलग-अलग फसलों की बुवाई के समय से जुड़ी होती है।
एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे कुछ बड़े बैंकों ने व्यक्तिगत कर्ज और क्रेडिट कार्ड जैसे असुरक्षित खुदरा कर्ज में धीमी वृद्धि दर्ज की। हालांकि इन बैंकों ने बताया कि नए कर्ज बांटने की गति में सुधार शुरू हो गया है। इससे आने वाली तिमाहियों में कुल कर्ज पोर्टफोलियो को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक सुब्रत मोहंती ने बताया कि खुदरा कर्ज के अलग-अलग हिस्सों में नए कर्ज बांटने की गति में सुधार हुआ है। पिछले तीन तिमाहियों के दौरान बैंक के खुदरा कर्ज वितरण में करीब 18 प्रतिशत की वृद्धि रही है। बैंक को उम्मीद है कि नए कर्ज बांटने की यह गति धीरे-धीरे कुल कर्ज बही में भी दिखाई देगी।
🏦 बैंकों के कर्ज में बड़ा बदलाव
- खुदरा कर्ज: जून 2026 तक करीब 11.7 प्रतिशत बढ़ा
- उद्योग कर्ज: सालाना आधार पर 19.2 प्रतिशत बढ़ा
- कॉरपोरेट कर्ज: कई बड़े बैंकों में खुदरा कर्ज से तेज वृद्धि
- मुख्य क्षेत्र: नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली और डेटा सेंटर
- तेज बढ़त: सोने के बदले दिए जाने वाले कर्ज में करीब 100 प्रतिशत वृद्धि
खुदरा कर्ज में अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन
क्षेत्र के स्तर पर जून 2026 तक खुदरा कर्ज की वृद्धि करीब 16 प्रतिशत रही। वहीं असुरक्षित कर्ज के कुछ हिस्सों में गिरावट या बहुत कम वृद्धि देखने को मिली। उपभोक्ता सामान के लिए दिए जाने वाले कर्ज में सालाना आधार पर करीब 1 प्रतिशत की कमी रही, जबकि क्रेडिट कार्ड कर्ज की वृद्धि करीब 2 प्रतिशत रही। इसके विपरीत सोने के बदले दिए जाने वाले कर्ज में करीब 100 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, जून तिमाही में कॉरपोरेट कर्ज की तेज वृद्धि के पीछे कुछ अस्थायी कारण भी रहे। भू-राजनीतिक तनाव के कारण कई कंपनियों ने अपनी बैलेंस शीट में अतिरिक्त नकदी रखने, सामान का पर्याप्त भंडार बनाए रखने और चल रही पूंजीगत परियोजनाओं में किसी तरह की रुकावट से बचने के लिए अधिक कर्ज लिया हो सकता है।
इसके बावजूद बड़े निजी बैंक कॉरपोरेट क्षेत्र में कर्ज बढ़ाने को लेकर सहज नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक जैसे कुछ बैंकों में खुदरा कर्ज की वृद्धि कॉरपोरेट कर्ज से अधिक रही। इन बैंकों में भी सोने के बदले कर्ज में तेज वृद्धि ने खुदरा कर्ज को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।
📊 Retail और Corporate Loan में अंतर
- Retail Loan: जून 2026 तक करीब 11.7 प्रतिशत की वृद्धि
- Corporate Loan: कई बड़े बैंकों में 10 से 18 प्रतिशत तक वृद्धि
- Axis Bank: कॉरपोरेट कर्ज में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी
- SBI: खुदरा कर्ज में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि
- Gold Loan: करीब 100 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज
उद्योग क्षेत्र को बैंक कर्ज में तेज बढ़ोतरी
भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक बैंकों का उद्योग क्षेत्र को दिया गया कर्ज सालाना आधार पर 19.2 प्रतिशत बढ़ा। इसी अवधि में खुदरा कर्ज में 11.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि फिलहाल बैंकों की कर्ज रणनीति में कंपनियों और उद्योगों की ओर से मांग बढ़ रही है, जबकि खुदरा क्षेत्र में वृद्धि अपेक्षाकृत संतुलित हो रही है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
