ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि यह हालिया समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को भी दर्शाता है, जिनकी लोकप्रियता में हाल के समय में गिरावट देखी गई है।
जेफ़रीज़ की नवीनतम ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौता भू-राजनीतिक परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, जिसके वैश्विक बाजारों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया यूएस-ईरान सीज़फायर फ्रेमवर्क से सबसे अधिक लाभ ईरान को मिलता दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में लंबे समय से जारी प्रतिबंधों को हटाने और ईरान के करीब 24 अरब डॉलर के Freez Fund को जारी करने का प्रावधान शामिल है। इसमें से लगभग आधी राशि संभवतः आधिकारिक वार्ता शुरू होने से पहले ही उपलब्ध कराई जा सकती है। जेफ़रीज़ का कहना है कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि बातचीत की प्रक्रिया में पहल मुख्य रूप से तेहरान की ओर से की गई है।
ब्रोकरेज फर्म का यह भी दावा है कि यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को उजागर करता है, जिनकी लोकप्रियता में हाल के समय में गिरावट दर्ज की गई है। रॉयटर्स/इप्सोस के एक सर्वे के हवाले से बताया गया है कि 62% लोगों ने उनकी आर्थिक नीतियों को नापसंद किया, जबकि 63% लोगों ने समग्र रूप से उनके नेतृत्व के प्रति नकारात्मक राय व्यक्त की।
मार्केट दृष्टिकोण से, जेफ़रीज़ का मानना है कि Crude oil की कम कीमतें और लंबे समय तक चलने वाला सीज़फायर अमेरिका के बाहर की अर्थव्यवस्थाओं, खासकर साइक्लिकल सेक्टर्स, के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है और उनके प्रदर्शन में सुधार ला सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Artificial intelligence में निवेश का तेज़ उछाल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है। अनुमान के अनुसार, 2026 में अमेरिका की चार प्रमुख हाइपरस्केलर कंपनियाँ—अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा—करीब 680 अरब डॉलर का पूंजीगत खर्च (CapEx) करेंगी, जो Artificial intelligence की तीव्रता को दर्शाता है।
हाल ही में जापान के Bank of japan ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हुए उन्हें 1% तक पहुँचा दिया है, जो पिछले तीन दशकों से अधिक समय का सबसे ऊँचा स्तर माना जा रहा है। मजबूत नाममात्र GDP वृद्धि और बढ़ती महंगाई को देखते हुए, जेफ़रीज़ का मानना है कि ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद जापानी इक्विटी, सरकारी बॉन्ड्स की तुलना में अभी भी अधिक आकर्षक बने हुए हैं।
इसके साथ ही ब्रोकरेज फर्म ने US में महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं को भी रेखांकित किया है। उनका कहना है कि महंगाई अपेक्षा से अधिक समय तक बनी रह सकती है, जिसके चलते मनी मार्केट 2026 के अंत तक लगभग 36 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त ब्याज दर वृद्धि की संभावना को पहले से ही मूल्यांकित कर रहे हैं। जेफ़रीज़ के अनुसार, निवेशकों के लिए ऊँची बॉन्ड यील्ड्स अभी भी प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई हैं।
इसके बावजूद, कॉर्पोरेट आय के अनुमान मजबूत बने हुए हैं। बाजार के मौजूदा आकलनों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में S&P 500 की आय में साल-दर-साल 22.8% की वृद्धि हो सकती है, जिसमें टेक्नोलॉजी सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहने की उम्मीद है।
हालाँकि, जेफ़रीज़ ने यह भी चेतावनी दी है कि इक्विटी मार्केट में सट्टेबाज़ी के संकेत बढ़ते जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में केवल 24.6% शेयर ही बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन कर पाए, जो अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार की बढ़त कुछ सीमित बड़ी कंपनियों तक ही सिमटती जा रही है।
इस स्टडी में SpaceX को लेकर बाजार में दिख रहे तेज़ उत्साह का भी उल्लेख किया गया है। केवल 638 मिलियन डॉलर की अंतर्निहित एसेट वैल्यू के बावजूद, हाल ही में लॉन्च किए गए ग्यारह लेवरेज्ड SpaceX एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में सिर्फ तीन दिनों के भीतर 8.2 अरब डॉलर की ट्रेडिंग गतिविधि दर्ज की गई। जेफ़रीज़ का कहना है कि यह रुझान रिटेल निवेशकों के बीच बढ़ती सट्टेबाज़ी का एक स्पष्ट संकेत है।
इसी बीच, चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था कमजोर संकेत दे रही है। देश में रियल एस्टेट निवेश पर लगातार दबाव बना हुआ है, खुदरा बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है और क्रेडिट ग्रोथ भी सुस्त पड़ गई है। हालांकि, निर्यात क्षेत्र—विशेष रूप से सेमीकंडक्टर शिपमेंट—में तेज़ी देखने को मिल रही है, जिससे समग्र आर्थिक तस्वीर असंतुलित बनी हुई है।
कुल मिलाकर, जेफ़रीज़ का मानना है कि वर्तमान वैश्विक निवेश वातावरण कई जटिल कारकों से प्रभावित है, जिनमें बढ़ती बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से प्रेरित शेयर बाजार की तेज़ी शामिल हैं।

