ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक Bank of England के ताजा फैसले के बाद ब्याज दरों और महंगाई को लेकर बाजार की नजरें आगे की आर्थिक स्थिति पर टिक गई हैं। बैंक ने फिलहाल दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया है, लेकिन भविष्य में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
Bank of England ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव
ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक Bank of England ने गुरुवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। बैंक ने अपनी मुख्य ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला लिया। हालांकि, Monetary Policy Committee के तीन सदस्यों ने बढ़ती महंगाई और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए ब्याज दर बढ़ाने का समर्थन किया।
Bank of England फैसले की मुख्य बातें
- ब्याज दर: 3.75 प्रतिशत पर स्थिर
- वोटिंग: 6-3 के फैसले से दरें बरकरार
- समिति: Monetary Policy Committee ने लिया फैसला
- जोखिम: महंगाई और मध्य-पूर्व तनाव
- रुख: फिलहाल इंतजार और निगरानी की नीति
- भविष्य: आर्थिक आंकड़ों के आधार पर बदलाव संभव
बैंक की बैठक में ब्याज दर को लेकर 6-3 का फैसला हुआ। कुछ अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, ज्यादातर अधिकारियों ने फिलहाल स्थिति पर नजर रखने और इंतजार करने की नीति को सही माना।
Bank of England के गवर्नर Andrew Bailey ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां अभी अनिश्चित बनी हुई हैं और महंगाई से जुड़े जोखिम मौजूद हैं। ऐसे में मौजूदा ब्याज दर को बनाए रखना उचित फैसला है। उन्होंने कहा कि इससे महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
महंगाई बढ़ने की आशंका से बढ़ी चिंता
बैंक के अनुमान के अनुसार ब्रिटेन में महंगाई दर इस साल के अंत तक बढ़कर 3.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। जून में यह 2.6 प्रतिशत थी। अनुमान है कि महंगाई 2028 की शुरुआत तक तय लक्ष्य 2 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेजी को ब्याज दर बढ़ाने की मांग का मुख्य कारण बताया गया है। Catherine Mann ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद को लेकर चिंता जताई और ब्याज दर को 4 प्रतिशत तक बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
- मुद्रा: Sterling में डॉलर के मुकाबले कमजोरी
- बॉन्ड: सरकारी बॉन्ड की पैदावार में हल्की गिरावट
- महंगाई: साल के अंत तक 3.2 प्रतिशत का अनुमान
- ऊर्जा: कीमतों में बढ़ोतरी चिंता का कारण
- सरकार: जीवन-यापन लागत कम करने पर फोकस
- नीति: बॉन्ड घटाने के कार्यक्रम की समीक्षा
कमजोर रोजगार बाजार पर भी ध्यान
हालांकि, कुछ अधिकारियों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर अभी घरेलू महंगाई पर लंबे समय तक दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कमजोर रोजगार बाजार और धीमी वेतन वृद्धि को ध्यान में रखते हुए ब्याज दर स्थिर रखने का समर्थन किया।
बैंक के फैसले के बाद ब्रिटिश मुद्रा Sterling में डॉलर के मुकाबले थोड़ी कमजोरी देखने को मिली। वहीं, सरकारी बॉन्ड की पैदावार में भी हल्की गिरावट आई।
ब्रिटेन की नई सरकार ने जीवन-यापन की बढ़ती लागत को कम करने को प्राथमिकता दी है। सरकार की ओर से घरेलू बिजली बिल पर लगने वाले टैक्स को हटाने जैसे कदमों से महंगाई को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।
आगे की नीति महंगाई और वैश्विक हालात पर निर्भर
Bank of England ने अपने बॉन्ड कम करने के कार्यक्रम का भी आकलन किया है। बैंक ने बताया कि सरकारी बॉन्ड होल्डिंग घटाने से बाजार पर सीमित प्रभाव पड़ा है। सितंबर में Monetary Policy Committee इस कार्यक्रम की रफ्तार को लेकर नया फैसला ले सकती है।
फिलहाल केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए सतर्क रुख अपनाया है। आने वाले समय में महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक घटनाओं के आधार पर ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है। वित्तीय निर्णय लेने से पहले आधिकारिक जानकारी और विशेषज्ञ सलाह अवश्य लें।

