सोमवार 31 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। शुरुआती कारोबार से पहले वैश्विक बाजारों से मिले संकेत दबाव वाले नजर आए। Gift Nifty करीब 24,245 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले वायदा बंद भाव से लगभग 96.4 अंक नीचे था। इससे घरेलू बाजार में गिरावट के साथ शुरुआत की संभावना बढ़ गई है।
शुक्रवार की तेजी के बाद बाजार पर दबाव
पिछले कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को बाजार में अच्छी खरीदारी देखने को मिली थी। Sensex 331 अंक यानी 0.43 प्रतिशत बढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ था। वहीं Nifty 50 में 85 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी रही और यह 24,175.65 के स्तर पर बंद हुआ। इस बढ़त के साथ दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगातार दो सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था।
हालांकि पूरे सप्ताह बाजार का रुख उतार-चढ़ाव वाला रहा। जानकारों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। तकनीकी क्षेत्र से कुछ सहारा मिला, लेकिन कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के कारण बाजार की कुल रिकवरी सीमित रही।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी
एशियाई बाजारों में सोमवार को अधिकतर प्रमुख बाजार गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव नजर आया। वहां प्रमुख सूचकांक में करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि छोटी कंपनियों से जुड़े बाजार में लगभग 3.8 प्रतिशत की कमजोरी रही। जापान का प्रमुख बाजार भी करीब 2.16 प्रतिशत नीचे था। ऑस्ट्रेलिया के बाजार में भी हल्की गिरावट दिखाई दी।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भी वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने रविवार को होरमुज जलडमरूमध्य में ईरान के एक द्वीप पर दो रॉकेट प्रक्षेपण केंद्रों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल के बाजार पर भी पड़ा। सोमवार को तेल की कीमतों में एक डॉलर से अधिक की तेजी दर्ज हुई। Brent कच्चा तेल 1.08 डॉलर यानी 1.23 प्रतिशत बढ़कर 89.18 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। वहीं WTI की कीमत 92 सेंट यानी 1.10 प्रतिशत बढ़कर 84.32 डॉलर प्रति बैरल हो गई। पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख तेल कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी।
होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या में भी कमी देखी गई। सप्ताहांत में यहां से प्रतिदिन करीब पांच बड़े मालवाहक जहाज ही गुजरते दिखाई दिए। इससे पता चलता है कि समुद्री मार्ग पर बढ़ते खतरे को देखते हुए कंपनियां अधिक सावधानी बरत रही हैं। यदि तनाव आगे बढ़ता है तो तेल की आपूर्ति और कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
अमेरिकी वायदा बाजार में भी कमजोरी
अमेरिकी बाजार के वायदा कारोबार में भी सोमवार को कमजोरी रही। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों से जुड़े वायदा भाव नीचे रहे। हालांकि अगस्त महीने में अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन अब तक सकारात्मक रहा है। तकनीकी कंपनियों में तेजी के कारण बाजार को समर्थन मिला और कई प्रमुख सूचकांक महीने के अंत में बढ़त दर्ज करने की स्थिति में हैं।
सोने की कीमतों में सोमवार को ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। पिछले सत्र में तीन प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट के बाद इसमें स्थिरता दिखाई दी। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर मिले संकेतों ने भी सोने के कारोबार को प्रभावित किया। बाजार की आगे की दिशा अब वैश्विक तनाव, तेल की कीमतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति से मिलने वाले संकेतों पर काफी हद तक निर्भर रह सकती है।
📉 सोमवार के बाजार संकेत
- Gift Nifty: करीब 24,245
- Gift Nifty बदलाव: लगभग 96.4 अंक नीचे
- Sensex पिछला बंद: 77,264.51
- Nifty 50 पिछला बंद: 24,175.65
- मुख्य दबाव: वैश्विक बाजार और भू-राजनीतिक तनाव
- निवेशकों की नजर: तेल की कीमत और अमेरिकी ब्याज दर
⚠️ बाजार में बढ़ी वैश्विक चिंता
- Brent: 89.18 डॉलर प्रति बैरल
- WTI: 84.32 डॉलर प्रति बैरल
- एशियाई बाजार: अधिकतर प्रमुख बाजार दबाव में
- होरमुज जलडमरूमध्य: मालवाहक जहाजों की आवाजाही में कमी
- अमेरिकी वायदा: सोमवार को कमजोरी के संकेत
- मुख्य जोखिम: मध्य पूर्व तनाव और तेल आपूर्ति
