भोपाल में 1,548 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क (SSRGSP) अपने लक्ष्य के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देने में पीछे नजर आ रहा है। इस Skill Park को युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन अब तक यहां तय संख्या में छात्र प्रशिक्षण पूरा नहीं कर पाए हैं।
भोपाल के ग्लोबल स्किल पार्क में लक्ष्य से कम युवाओं को मिली ट्रेनिंग
30 एकड़ क्षेत्र में बने इस स्किल पार्क में साल 2024 से Advanced Courses की शुरुआत हुई थी। शुरुआत में दावा किया गया था कि हर साल 6,000 से ज्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी और आने वाले समय में यह संख्या 10,000 तक पहुंचाई जाएगी। हालांकि, अब तक केवल 2,903 युवाओं को ही प्रशिक्षण दिया जा सका है।
इस संस्थान में Advanced CNC and Precision Engineering, Advanced Mechatronics, Advanced Electrical Technology, Advanced Automotive Technology, Advanced Mechanical Technology, Advanced Air Conditioning and Refrigeration और Advanced ICT जैसे कई कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इन कोर्स को सिंगापुर की संस्था ITEES ने डिजाइन किया है।
🎓 स्किल पार्क की ट्रेनिंग रिपोर्ट
- स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश
- लागत: 1,548 करोड़ रुपये
- क्षेत्र: 30 एकड़
- लक्ष्य: हर साल 6,000 से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण
- अब तक ट्रेनिंग: 2,903 युवाओं को प्रशिक्षण
जानकारी की कमी से नहीं भर पा रही हैं सीटें
रिपोर्ट के अनुसार, कई ITI छात्रों को अभी भी इस Skill Park के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी इन कोर्स और सुविधाओं से काफी हद तक अनजान हैं। इसके कारण सीटें पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं।
छोटे शहरों में भी Skill Training को लेकर ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। गुना में चल रहे Skill Center के अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो साल से केंद्र सरकार की ओर से फंड नहीं मिला है। यहां प्रशिक्षण लेने वाले कितने युवाओं को रोजगार मिला, इसका भी पूरा डेटा उपलब्ध नहीं है।
स्किल सेंटर में ट्रेनिंग और रोजगार के आंकड़े
स्किल इंडिया पोर्टल के अनुसार, 2023 से इस सेंटर में 3,186 युवाओं का नामांकन हुआ, लेकिन इनमें से केवल 1,978 युवाओं ने ट्रेनिंग पूरी की और 1,264 को ही Certificate मिल पाया।
शिवपुरी में निजी संस्थानों में गड़बड़ी सामने आने के बाद इस बार सरकारी कॉलेज और ITI में प्रशिक्षण दिया गया। हालांकि, कई बैच में छात्रों की उपस्थिति काफी कम रही। कुछ जगहों पर हाजिरी केवल 5 प्रतिशत रही तो कुछ जगहों पर 53 प्रतिशत तक दर्ज की गई।
⚠️ स्किल पार्क के सामने चुनौतियां
- जानकारी की कमी: कई छात्रों को कोर्स की जानकारी नहीं
- कम भागीदारी: सीटें पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं
- उपकरण उपयोग: कई आधुनिक सुविधाओं का सीमित इस्तेमाल
- फैकल्टी: कुछ सदस्य Contract पर कार्यरत
- प्लेसमेंट: Salary Package की जानकारी सार्वजनिक नहीं
नए कोर्स शुरू करने की योजना अभी अधूरी
स्किल पार्क में IIT और IIM जैसे संस्थानों के साथ मिलकर कई नए Short Term Courses शुरू करने की योजना भी बनाई गई थी। इनमें Web-Mobile Design, Digital Game Design, Animation, Gaming Technology और Artificial Intelligence जैसे कोर्स शामिल थे, लेकिन इनमें से कई कोर्स अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं।
कुछ छात्रों ने बताया कि Skill Park की लैब में मौजूद कई उपकरणों का पूरी तरह उपयोग नहीं हो रहा है। खासतौर पर 3D Printer जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल सीमित है। छात्रों ने यह भी कहा कि कई Faculty सदस्य Contract पर काम कर रहे हैं।
प्लेसमेंट और भविष्य की योजनाओं पर सवाल
संस्थान का दावा है कि अब तक 1,163 छात्रों का Placement हुआ है, लेकिन प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों के Salary Package की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं, संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में छात्रों तक जानकारी कम पहुंची थी, लेकिन अब सभी कोर्स में पर्याप्त संख्या में विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।
स्किल पार्क का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसके शुरुआती लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाए हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है, योजनाओं में समय के साथ बदलाव संभव है।
