बोकारो के दो शिक्षकों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से रची सफलता की कहानी

झारखंड के बोकारो में दो सरकारी शिक्षकों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती कर सफलता की नई मिसाल पेश की है। कोरोना काल में शुरू की गई यह पहल आज लाखों रुपये की सालाना कमाई का जरिया बन चुकी है और आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

बोकारो के दो शिक्षकों ने लिखी सफलता की नई कहानी, ड्रैगन फ्रूट की खेती से हर साल कमा रहे लाखों रुपये

बोकारो के दो शिक्षकों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से बनाई सफलता की नई पहचान

झारखंड के बोकारो में दो सरकारी शिक्षकों ने अपनी सोच और मेहनत के दम पर खेती की ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। कभी विदेशी और महंगा माना जाने वाला ड्रैगन फ्रूट अब उनकी बदौलत स्थानीय बाजारों तक पहुंच रहा है। बोकारो के सेक्टर-1 स्थित राम मंदिर मार्केट के पास सड़क किनारे बिक रहे ताजे ड्रैगन फ्रूट लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।

चांदो पंचायत के उत्क्रमित विद्यालय में कार्यरत शिक्षक दिनेश कुमार सिंह और बलदेव मांझी ने कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में खाली समय का बेहतर उपयोग करने का फैसला किया। इसी दौरान उन्होंने कृषि में कुछ नया करने की ठानी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम से प्रेरित होकर दोनों ने ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती शुरू करने का निर्णय लिया।

🍈 ड्रैगन फ्रूट खेती की मुख्य बातें

  • स्थान: बोकारो, झारखंड
  • किसानों की पहचान: दो सरकारी शिक्षक
  • शुरुआत: कोरोना लॉकडाउन के दौरान
  • प्रारंभिक निवेश: लगभग 8.5 लाख रुपये
  • पौधे: हैदराबाद से 2,000 मंगवाए गए

कैसे शुरू हुई ड्रैगन फ्रूट की खेती?

नई खेती की शुरुआत के लिए दोनों शिक्षकों ने पहले इंटरनेट के माध्यम से जानकारी जुटाई और विशेषज्ञों से सलाह ली। इसके बाद हैदराबाद से करीब 2,000 ड्रैगन फ्रूट के पौधे मंगवाए। इस परियोजना में उन्होंने लगभग 8.5 लाख रुपये का निवेश किया। शुरुआती दौर में मिट्टी की जांच, सिंचाई व्यवस्था और पौधों की देखभाल जैसी कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने धैर्य और लगातार प्रयास से इन कठिनाइयों को पार कर लिया।

आज उनकी मेहनत रंग ला चुकी है। दोनों शिक्षकों के खेत से हर वर्ष लगभग 10 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हो रहा है। उनकी उपज की आपूर्ति झारखंड के रांची, जमशेदपुर और रामगढ़ के अलावा बिहार के सासाराम तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक की जा रही है। बढ़ती मांग के कारण उनका यह कृषि मॉडल अब एक सफल उद्यम के रूप में पहचान बना चुका है।

बलदेव मांझी बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की फसल एक बार लगाने के बाद 15 से 20 वर्षों तक उत्पादन देती है। साल में कई बार फल मिलने के कारण किसानों को नियमित आय होती है। उनका दावा है कि एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती से सालाना 8 से 9 लाख रुपये तक की कमाई संभव है, जिससे यह पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभदायक विकल्प बन गया है।

📊 ड्रैगन फ्रूट खेती से कमाई

  • वार्षिक उत्पादन: लगभग 10 टन
  • फसल की अवधि: 15 से 20 वर्ष
  • संभावित कमाई: 8 से 9 लाख रुपये प्रति एकड़
  • बाजार: झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल
  • फायदा: साल में कई बार उत्पादन

दूसरे किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा

दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, जब उनके खेत में पहली बार ड्रैगन फ्रूट के पौधों पर फूल खिले, तो वह पल उनके लिए बेहद भावुक और यादगार था। उनकी सफलता अब आसपास के किसानों को भी आधुनिक और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने भी दोनों शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में नए अवसर तलाशने वाले लोग ही समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। उनकी यह पहल आधुनिक कृषि और आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। कृषि से होने वाली आय क्षेत्र और परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।

Gourav Kumar Singh

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