शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़त देखने को मिली। इसकी सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। ईरान ने ओमान के साथ मिलकर ऐसे नए नियमों का संकेत दिया है, जिनके तहत दुश्मन माने जाने वाले देशों के जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent और Crude Oil की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
होर्मुज तनाव से Brent और Crude Oil में तेजी
तेल बाजार की प्रमुख बातें
- मुख्य कारण: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव
- Brent: लगभग 83.48 डॉलर प्रति बैरल
- Crude Oil: लगभग 78.84 डॉलर प्रति बैरल
- प्रस्ताव: जहाजों की आवाजाही पर नए नियम
- संभावित असर: वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव
- बाजार: निवेशकों में बढ़ी चिंता
ताजा कारोबार में ब्रेंट तेल लगभग 83.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी मानक तेल 78.84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
गुरुवार को भी तेल की कीमतों में तीन डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेजी आई थी। इसकी वजह ईरान की संसद में उस प्रस्ताव पर चर्चा थी, जिसमें अमेरिका, इजरायल और अन्य विरोधी देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से रोकने की बात कही गई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है और वैश्विक तेल तथा प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से भेजी जाती है।
नए प्रस्ताव से बढ़ी बाजार की चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यदि कोई जहाज इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर उसके माल की कीमत के आधार पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की योजना पर भी विचार कर रहा है। दूसरी ओर ओमान भी अलग शुल्क व्यवस्था पर चर्चा कर रहा है, जबकि अमेरिका बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जहाजों की आवाजाही बनाए रखने के पक्ष में है।
सप्ताह की शुरुआत में बाजार को उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए तनाव कम हो सकता है, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी। लेकिन नए प्रस्ताव सामने आने के बाद निवेशकों की चिंता फिर बढ़ गई और कीमतें दोबारा ऊपर चली गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इस मुद्दे पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
संभावित प्रभाव
- ऊर्जा लागत: बढ़ने की आशंका
- परिवहन खर्च: बढ़ सकता है
- महंगाई: असर पड़ने की संभावना
- मुख्य निगरानी: Iran और LNG से जुड़ी खबरें
- निवेशकों का फोकस: Market की नई गतिविधियां
- जोखिम: तेल आपूर्ति में बाधा
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर
इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब से जुड़े कुछ ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है। ऐसे हालात में ऊर्जा बाजार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में समुद्री मार्गों की स्थिति कैसी रहती है और क्या तेल की आपूर्ति सामान्य बनी रहती है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की बड़ी रुकावट आती है या नए प्रतिबंध लागू होते हैं, तो इसका असर केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कई देशों की ऊर्जा लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर भी प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल निवेशक हर नई जानकारी पर नजर बनाए हुए हैं और Market, Iran तथा LNG से जुड़ी खबरों के आधार पर आगे की दिशा तय कर रहे हैं।