शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता रही। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को दोबारा पूरी तरह खोलने पर अभी तक स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। इसी कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और ऊर्जा बाजार में तेजी देखने को मिली।
Brent में बढ़त, तेल बाजार पर बढ़ी चिंता
कच्चे तेल बाजार की प्रमुख बातें
- मुख्य कारण: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता
- Brent: लगभग 83.65 डॉलर प्रति बैरल
- इस साल बढ़त: 37 प्रतिशत से अधिक
- मुख्य चिंता: वैश्विक तेल आपूर्ति
- निवेशकों का रुख: सतर्क
- फोकस: वैश्विक आर्थिक संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent की कीमत बढ़कर लगभग 83.65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस साल अब तक इसमें 37 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी आशंका तेल की कीमतों को लगातार सहारा दे रही है।
तेल की बढ़ती कीमतों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई दिया। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी रही क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि महंगाई का दबाव बढ़ने पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। इसी वजह से एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा।
रोजगार आंकड़ों और ब्याज दरों पर नजर
विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में हल्का उतार-चढ़ाव बना रहा। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले नए आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
बाजार की सबसे बड़ी नजर अब अमेरिका के जुलाई महीने के रोजगार आंकड़ों पर है। माना जा रहा है कि इन आंकड़ों से यह साफ हो सकता है कि वहां का श्रम बाजार कितना मजबूत है और आगे ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लिया जा सकता है। यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की संभावना बढ़ सकती है।
बाजार की नजर इन संकेतों पर
- Crude Oil: कीमतों की दिशा
- Market: वैश्विक निवेशकों की रणनीति
- Fed: ब्याज दरों के संकेत
- Payrolls: अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट
- डॉलर: सीमित उतार-चढ़ाव
- तेल आपूर्ति: भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर
भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर
इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर अलग-अलग तरह की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि बातचीत आगे बढ़ रही है, जबकि दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े प्रस्तावों और सैन्य गतिविधियों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से निवेशक अभी किसी स्पष्ट दिशा का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की चाल मुख्य रूप से Crude Oil, Market, Fed और Payrolls से जुड़ी खबरों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और आर्थिक आंकड़े संतुलित रहते हैं, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं तनाव बढ़ने या तेल की कीमतों में और तेजी आने की स्थिति में निवेशकों की चिंता फिर बढ़ सकती है।