भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था में अभी लंबे समय तक बढ़ने की काफी संभावना है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने से ऑनलाइन खाना मंगाने, ई-कॉमर्स और सामान पहुंचाने वाली सेवाओं के कारोबार को आगे भी मजबूती मिल सकती है। कंपनियों का कारोबार बढ़ने के साथ लागत को बेहतर तरीके से संभालने और कमाई बढ़ाने की क्षमता में भी सुधार हो सकता है।
भारत के इंटरनेट कारोबार में आगे भी तेजी की उम्मीद

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में हाल के महीनों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। भारत के इंटरनेट क्षेत्र से जुड़े शेयरों के बाजार मूल्य वाले सूचकांक में जून की शुरुआत के निचले स्तर से करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी दौरान निफ्टी 50 में लगभग 6 प्रतिशत की तेजी रही। पिछले चार महीनों में भी इस सूचकांक ने निफ्टी 50 के मुकाबले करीब 18 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन किया है।
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारत के इंटरनेट कारोबार में आगे भी संरचनात्मक वृद्धि जारी रह सकती है। इसके पीछे डिजिटल सेवाओं का बढ़ता इस्तेमाल, ऑनलाइन लेनदेन में बढ़ोतरी और कंपनियों द्वारा बाहरी सेवा प्रदाताओं का अधिक इस्तेमाल प्रमुख कारण हो सकते हैं। हालांकि, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कंपनियां अपनी सेवाओं से कितनी तेजी से कमाई बढ़ा पाती हैं, यह मुनाफे के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
ऑनलाइन भोजन के कारोबार में बढ़ने की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऑनलाइन भोजन की कुल ऑर्डर राशि वित्त वर्ष 2031 तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। वित्त वर्ष 2026 में ऑनलाइन भोजन की पहुंच करीब 15 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 20 प्रतिशत हो सकती है। कम कीमत वाले भोजन की डिलीवरी में भी अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इसमें कम ऑर्डर मूल्य की भरपाई कम संचालन लागत से हो सकती है।
ई-कॉमर्स से जुड़े सामान पहुंचाने के कारोबार में भी काफी विस्तार की संभावना बताई गई है। किराना सामान को छोड़कर ई-कॉमर्स की खेप वित्त वर्ष 2030 तक बढ़कर 15 से 16 अरब तक पहुंच सकती है। भारत में प्रति व्यक्ति ऑनलाइन खेप की संख्या अभी अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में काफी कम है। इसलिए आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में बढ़ने की काफी गुंजाइश है।
📱 इंटरनेट अर्थव्यवस्था के बड़े अवसर
- ऑनलाइन भोजन: वित्त वर्ष 2031 तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये की कुल ऑर्डर राशि का अनुमान
- ऑनलाइन भोजन की पहुंच: वित्त वर्ष 2026 के 15 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2031 तक 20 प्रतिशत होने की संभावना
- ई-कॉमर्स खेप: वित्त वर्ष 2030 तक 15 से 16 अरब तक पहुंचने का अनुमान
- डिजिटल सेवाएं: बढ़ते इस्तेमाल से इंटरनेट कारोबार को सहारा
- मुख्य चुनौती: बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कमाई बढ़ाने की क्षमता
शैडोफैक्स और डेल्हीवरी को मिल सकता है फायदा
ई-कॉमर्स कारोबार बढ़ने और कंपनियों द्वारा सामान पहुंचाने का काम बाहरी एजेंसियों को दिए जाने से शैडोफैक्स और डेल्हीवरी जैसी कंपनियों को फायदा मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स की खेप में शैडोफैक्स की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022 के करीब 8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में लगभग 28 से 30 प्रतिशत हो गई है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक इसकी हिस्सेदारी करीब 34 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
मॉर्गन स्टेनली के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच शैडोफैक्स की आय में हर साल औसतन करीब 28 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। वहीं डेल्हीवरी के लिए यह वृद्धि करीब 18 प्रतिशत रहने का अनुमान है। दोनों कंपनियों की कमाई में एक्सप्रेस पार्सल सेवा का योगदान सबसे बड़ा बना रह सकता है।
ई-कॉमर्स मंचों के लिए भी बढ़ रहे अवसर
रिपोर्ट में ई-कॉमर्स मंचों के लिए ग्राहकों की बढ़ती सक्रियता और कमाई बढ़ाने की क्षमता को भी अहम बताया गया है। मीशो के मामले में अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक एक सक्रिय खरीदार द्वारा किए जाने वाले ऑर्डर की संख्या करीब 16 तक पहुंच सकती है। बेहतर सामान पहुंचाने की लागत और विज्ञापन से होने वाली आय बढ़ने पर कंपनी के मुनाफे में भी सुधार हो सकता है।
🚚 डिलीवरी कारोबार में बढ़ते अवसर
- शैडोफैक्स: वित्त वर्ष 2029 तक ई-कॉमर्स खेप में करीब 34 प्रतिशत हिस्सेदारी का अनुमान
- शैडोफैक्स आय: वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच करीब 28 प्रतिशत औसत सालाना वृद्धि का अनुमान
- डेल्हीवरी: इसी अवधि में करीब 18 प्रतिशत औसत सालाना आय वृद्धि का अनुमान
- मीशो: वित्त वर्ष 2029 तक प्रति सक्रिय खरीदार करीब 16 ऑर्डर का अनुमान
- मुनाफे की संभावना: डिलीवरी लागत और विज्ञापन आय में सुधार से बढ़ सकती है
Disclaimer: यह जानकारी समाचार और सामान्य जानकारी के लिए है। इसे निवेश सलाह न मानें और निवेश से पहले विशेषज्ञ की राय लें।
