भारत में क्रिप्टो एसेट से जुड़े लेनदेन की निगरानी को मजबूत करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य क्रिप्टो प्लेटफॉर्म से मिलने वाली जानकारी को टैक्स व्यवस्था के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना है।
CBDT ने क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग के लिए जारी की नई गाइडलाइन
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने क्रिप्टो एसेट से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। यह दिशा-निर्देश Income-tax Act, 2025 के तहत क्रिप्टो एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए जारी किए गए हैं। इसका उद्देश्य क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी टैक्स अधिकारियों तक सही तरीके से पहुंचाना है। हालांकि, CBDT ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया टैक्स नियम नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद कानूनों के तहत रिपोर्टिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जारी की गई गाइडलाइन है।
इस कदम के साथ भारत ने Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD) के Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है, जिसके तहत अलग-अलग देशों के बीच क्रिप्टो एसेट से जुड़ी टैक्स जानकारी का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
CBDT क्रिप्टो रिपोर्टिंग गाइडलाइन की मुख्य बातें
- उद्देश्य: क्रिप्टो लेनदेन की सही जानकारी उपलब्ध कराना
- कानून: Income-tax Act, 2025 के तहत दिशा-निर्देश
- फ्रेमवर्क: OECD Crypto-Asset Reporting Framework
- लक्ष्य: टैक्स पारदर्शिता बढ़ाना
- लागू संस्था: Crypto-Asset Service Providers
क्रिप्टो एसेट की रिपोर्टिंग क्यों जरूरी हुई
CBDT के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि क्रिप्टो एसेट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने टैक्स व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी की है। उन्होंने बताया कि ऐसे डिजिटल एसेट पारंपरिक वित्तीय प्रणाली से बाहर भी बनाए, रखे और ट्रांसफर किए जा सकते हैं, जिससे टैक्स रिपोर्टिंग में मुश्किलें आ सकती हैं।
नई गाइडलाइन के अनुसार, क्रिप्टो एसेट ऐसी डिजिटल वैल्यू को कहा गया है जो सुरक्षित तकनीक और वितरित लेजर सिस्टम के माध्यम से लेनदेन को प्रमाणित करती है। इसमें ऐसे डिजिटल एसेट शामिल हो सकते हैं जिनका इस्तेमाल आर्थिक अधिकार या मूल्य को दर्शाने के लिए किया जाता है और जिन्हें डिजिटल तरीके से खरीदा या बेचा जा सकता है।
हर डिजिटल एसेट नहीं आएगा रिपोर्टिंग के दायरे में
हालांकि, हर क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग के दायरे में नहीं आएगा। केवल संबंधित क्रिप्टो एसेट पर ही रिपोर्टिंग और जांच से जुड़ी जिम्मेदारी लागू होगी। CBDT ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी एसेट का नाम चाहे Cryptocurrency, Security Token या Non-Fungible Token हो, केवल नाम के आधार पर फैसला नहीं किया जाएगा। उसकी वास्तविक उपयोगिता और कार्यप्रणाली के आधार पर तय किया जाएगा कि वह रिपोर्टिंग के अंतर्गत आता है या नहीं।
कुछ डिजिटल एसेट को रिपोर्टिंग से बाहर रखा गया है। इनमें Central Bank Digital Currency (CBDC), कुछ इलेक्ट्रॉनिक मनी प्रोडक्ट और ऐसे क्रिप्टो एसेट शामिल हैं जिन्हें सर्विस प्रोवाइडर ने उचित जांच के बाद निवेश या भुगतान के लिए उपयोग योग्य नहीं माना है।
क्रिप्टो प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियां
- पहचान: रिपोर्ट योग्य ग्राहकों की जानकारी जुटाना
- जांच: टैक्स निवासी स्थिति की पुष्टि करना
- लेनदेन: क्रिप्टो गतिविधियों का रिकॉर्ड रखना
- रिपोर्टिंग: टैक्स अधिकारियों को जानकारी देना
- अनुपालन: तय प्रक्रिया का पालन करना
Crypto-Asset Service Providers को करनी होगी ग्राहक जांच
नई व्यवस्था के तहत Crypto-Asset Service Providers को अपने सभी रिपोर्ट योग्य ग्राहकों और व्यक्तियों की पहचान करनी होगी। इसमें ऐसे क्रिप्टो उपयोगकर्ता शामिल होंगे जो भारत के बाहर किसी अन्य देश के टैक्स निवासी हैं। इसके अलावा कुछ संस्थाओं से जुड़े नियंत्रक व्यक्तियों की जानकारी भी देनी होगी।
क्रिप्टो प्लेटफॉर्म को अपने ग्राहकों की जांच करनी होगी, यह पता लगाना होगा कि कौन से ग्राहक रिपोर्टिंग के दायरे में आते हैं और फिर तय प्रक्रिया के अनुसार टैक्स अधिकारियों को जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
बड़े क्रिप्टो ट्रांजेक्शन की भी होगी रिपोर्टिंग
रिपोर्टिंग में ग्राहक की पहचान से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ उसके क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी भी शामिल होगी। इसके अलावा 50,000 डॉलर से अधिक मूल्य के ऐसे क्रिप्टो ट्रांजेक्शन भी रिपोर्ट किए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल किसी वस्तु या सेवा की खरीद के लिए किया गया हो।
CBDT का कहना है कि यह गाइडलाइन क्रिप्टो कंपनियों को रिपोर्टिंग नियमों को एक समान तरीके से लागू करने में मदद करेगी। इसके साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर टैक्स पारदर्शिता और सीमापार वित्तीय जानकारी साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है।
